भारत-ताइवान साझेदारी: चीन पर निर्भरता घटाने का बड़ा मौका, रिपोर्ट में खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- ताइवान न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ताइवान को चीन पर आर्थिक निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है।
- भारत की सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता और ताइवान की हार्डवेयर क्षमता मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में नई भूमिका निभा सकती हैं।
- सीआईआई प्रतिनिधिमंडल ने 13-17 अप्रैल 2025 को ताइपे में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट मोबिलिटी में सहयोग पर चर्चा की।
- वर्ष 2024 में ऑर्गेनिक उत्पादों पर म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट से कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है।
- रिपोर्ट में भारत-ताइवान मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर गंभीरता से विचार करने की सिफारिश की गई है।
- ताइवान ने मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु में व्यापार कार्यालय स्थापित किए हैं।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एक ताज़ा रिपोर्ट में यह उजागर किया गया है कि भारत, ताइवान को चीन पर उसकी आर्थिक निर्भरता घटाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग, खनन अन्वेषण, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों में दक्षता तथा उसकी विशाल विदेशी मुद्रा भंडार क्षमता, भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। यह साझेदारी भारत की 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और 'स्किल इंडिया' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को नई ऊर्जा दे सकती है।
सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का संगम — दोनों देशों की पूरक शक्तियां
ताइवान न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी मज़बूत सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए ताइवान की हार्डवेयर क्षमताओं के साथ मिलकर एक शक्तिशाली तकनीकी गठजोड़ बना सकता है। यह सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभदायक होगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी एक नया संतुलन स्थापित करेगा।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब चीन का आक्रामक रुख ताइवान को वैकल्पिक बाजारों की तलाश के लिए मजबूर कर रहा है। भारत का 1.4 अरब की आबादी वाला विशाल उपभोक्ता बाजार ताइवानी उद्योगों के लिए निवेश का सबसे बड़ा गंतव्य बन सकता है।
कृषि से लेकर ऑटोमोबाइल तक — सहयोग के नए आयाम
रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि ताइवान की आधुनिक कृषि तकनीक भारत के कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच हुए ऑर्गेनिक उत्पादों पर म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट ने इस दिशा में पहला ठोस कदम रखा है।
हाल ही में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) का एक प्रतिनिधिमंडल 13 से 17 अप्रैल तक ताइपे दौरे पर गया। इस दौरान ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट मोबिलिटी क्षेत्रों में सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
द्विपक्षीय संबंधों की राह में चुनौतियां
रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि ताइवान में भारतीय कामगारों की सुरक्षा और विशेष रूप से महिला श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर उठी आशंकाओं ने दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर नकारात्मक असर डाला है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि ताइवान की विपक्षी पार्टियों को भारत के घरेलू मुद्दों का इस्तेमाल दोनों देशों के बढ़ते संबंधों को कमज़ोर करने के लिए नहीं करना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत का कुशल और अकुशल श्रमबल दशकों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है, और इस तथ्य को ताइवान को गंभीरता से समझना होगा।
मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में कदम
रिपोर्ट में एक अहम सुझाव यह दिया गया है कि भारत और ताइवान को बाहरी शक्तियों के नकारात्मक हस्तक्षेप से बचते हुए अपने द्विपक्षीय संबंध और मजबूत करने चाहिए। इसके साथ ही दोनों देशों को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
ताइवान के भारत प्रतिनिधि मुमिन चेन और भारत के महानिदेशक निनाद देशपांडे दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। पिछले एक दशक में भारत-ताइवान द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
ताइवान एक्सटर्नल ट्रेड डेवलपमेंट काउंसिल और ताइपे कंप्यूटर एसोसिएशन ने मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु में अपने कार्यालय स्थापित किए हैं, जो इस साझेदारी को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का प्रयास है।
आने वाले महीनों में यदि दोनों देश एफटीए की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो यह न केवल एशिया की आर्थिक भूगोल को बदल सकता है, बल्कि चीन के वर्चस्व को भी एक रणनीतिक चुनौती देगा।