17 अक्टूबर 2026
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भारत-ब्रिटेन नौसेना अभ्यास 'कोंकण-26' संपन्न: INS त्रिशूल और HMS सदरलैंड ने प्लायमाउथ में दिखाया युद्ध कौशल

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भारत-ब्रिटेन नौसेना अभ्यास 'कोंकण-26' संपन्न: INS त्रिशूल और HMS सदरलैंड ने प्लायमाउथ में दिखाया युद्ध कौशल

सारांश

'कोंकण-26' केवल एक नियमित अभ्यास नहीं था — यह भारत-ब्रिटेन विजन 2035 की रणनीतिक साझेदारी का समुद्री परीक्षण था। INS त्रिशूल और HMS सदरलैंड ने पनडुब्बी रोधी युद्ध से लेकर हथियार परीक्षण तक, प्लायमाउथ के जलक्षेत्र में दो दशकों की नौसैनिक मित्रता को और पुख्ता किया।

मुख्य बातें

भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास 'कोंकण-26' ब्रिटेन के प्लायमाउथ तट पर 8 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच संपन्न हुआ।
भारतीय नौसेना की ओर से स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल और रॉयल नेवी की ओर से एचएमएस सदरलैंड ने भाग लिया।
समुद्री चरण 12 से 15 अक्टूबर तक चला, जिसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, असममित सतही युद्ध और हथियार परीक्षण शामिल रहे।
अभ्यास का संचालन रॉयल नेवी के FOST द्वारा किया गया।
यह अभ्यास भारत-ब्रिटेन विजन 2035 की व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है।
पिछले दो दशकों में 'कोंकण' अभ्यास का दायरा और जटिलता लगातार बढ़ी है।

भारतीय नौसेना और ब्रिटेन की रॉयल नेवी के बीच वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास 'कोंकण-26' ब्रिटेन के प्लायमाउथ तट पर 15 अक्टूबर 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। भारतीय नौसेना ने 17 अक्टूबर को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस संयुक्त अभ्यास ने दोनों देशों की नौसेनाओं को कई पेशेवर और परिचालन क्षेत्रों में मिलकर काम करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

अभ्यास का संचालन और प्रतिभागी पोत

यह संयुक्त अभ्यास 8 से 15 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया। भारतीय नौसेना की ओर से गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल ने भाग लिया, जो 11 अक्टूबर को प्लायमाउथ बंदरगाह पहुँचा था। रॉयल नेवी की तरफ से ड्यूक श्रेणी का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत एचएमएस सदरलैंड शामिल हुआ। अभ्यास का समग्र संचालन रॉयल नेवी के फ्लीट ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स एंड ट्रेनिंग (FOST) द्वारा किया गया।

समुद्री चरण में क्या-क्या हुआ

भारतीय नौसेना के अनुसार, अभ्यास का समुद्री चरण 12 से 15 अक्टूबर तक चार दिनों तक चला। इस दौरान उन्नत नौवहन युद्धाभ्यास, संयुक्त सामरिक प्रशिक्षण, संचार प्रक्रियाओं का परीक्षण, असममित सतही युद्ध, पनडुब्बी रोधी युद्ध तकनीक और हथियारों के परीक्षण जैसी गतिविधियाँ संपन्न हुईं।

ये सभी गतिविधियाँ कई प्रकार के समुद्री खतरों वाले जटिल परिचालन वातावरण में आयोजित की गईं, जिससे दोनों नौसेनाओं की वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त कार्यक्षमता का परीक्षण हो सका।

आपसी तालमेल और परिचालन क्षमता पर असर

नौसेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, पेशेवर अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के ज़रिये 'कोंकण-26' ने जटिल समुद्री परिस्थितियों में भारतीय नौसेना और रॉयल नेवी की संयुक्त परिचालन क्षमता को और मज़बूत किया। इससे दोनों नौसैनिक पोतों के बीच आपसी तालमेल बेहतर हुआ।

गौरतलब है कि पिछले दो दशकों में 'कोंकण' श्रृंखला के अभ्यास का दायरा और जटिलता लगातार बढ़ती रही है, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन समझ और साझा कार्यसंस्कृति गहरी हुई है।

रणनीतिक महत्व और भारत-ब्रिटेन विजन 2035

रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 'कोंकण' अभ्यास अपनी शुरुआत के बाद से भारत और ब्रिटेन के बीच समुद्री सहयोग का एक अहम स्तंभ बन चुका है। यह अभ्यास सुरक्षित, खुले और स्वतंत्र समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करने के दोनों देशों के साझा संकल्प को रेखांकित करता है।

मंत्रालय के अनुसार, 'कोंकण-26' भारत-ब्रिटेन विजन 2035 में उल्लिखित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को भी व्यावहारिक धरातल पर आगे बढ़ाता है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर वैश्विक ध्यान बढ़ रहा है।

आगे क्या

इस अभ्यास की सफलता के बाद दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन सहयोग और गहरा होने की संभावना है। 'कोंकण' श्रृंखला के आगामी संस्करणों में और अधिक जटिल परिदृश्यों और बहुपक्षीय घटकों को शामिल किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'भारत-ब्रिटेन विजन 2035' की भाषा महत्वाकांक्षी है, तो यह देखना ज़रूरी होगा कि क्या यह साझेदारी तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन के ठोस समझौतों में तब्दील होती है — या केवल वार्षिक अभ्यास तक सीमित रहती है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ब्रिटेन नौसेना अभ्यास 'कोंकण-26' क्या है?
'कोंकण-26' भारतीय नौसेना और ब्रिटेन की रॉयल नेवी के बीच आयोजित वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास है, जो इस बार 8 से 15 अक्टूबर 2026 तक ब्रिटेन के प्लायमाउथ तट पर हुआ। इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, हथियार परीक्षण और संयुक्त सामरिक अभ्यास शामिल थे।
'कोंकण-26' में किन युद्धपोतों ने भाग लिया?
भारतीय नौसेना की ओर से गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल और रॉयल नेवी की ओर से ड्यूक श्रेणी का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत एचएमएस सदरलैंड ने भाग लिया। अभ्यास का संचालन रॉयल नेवी के FOST द्वारा किया गया।
'कोंकण' अभ्यास श्रृंखला का रणनीतिक महत्व क्या है?
'कोंकण' अभ्यास पिछले दो दशकों से भारत और ब्रिटेन के बीच समुद्री सहयोग का एक प्रमुख आधार रहा है। यह भारत-ब्रिटेन विजन 2035 की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक रूप देता है और सुरक्षित, खुले समुद्री मार्गों के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
'कोंकण-26' के समुद्री चरण में क्या गतिविधियाँ हुईं?
12 से 15 अक्टूबर तक चले समुद्री चरण में उन्नत नौवहन युद्धाभ्यास, संयुक्त सामरिक प्रशिक्षण, संचार प्रक्रियाओं का परीक्षण, असममित सतही युद्ध, पनडुब्बी रोधी युद्ध और हथियारों के परीक्षण जैसी गतिविधियाँ शामिल रहीं। ये सभी जटिल समुद्री खतरों वाले परिचालन वातावरण में आयोजित की गईं।
आगे भारत-ब्रिटेन नौसेना सहयोग किस दिशा में जाएगा?
'कोंकण-26' की सफलता के बाद दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन सहयोग और गहरा होने की संभावना है। आगामी संस्करणों में और अधिक जटिल परिदृश्यों तथा संभावित बहुपक्षीय घटकों को शामिल किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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