भारत-ब्रिटेन नौसेना: 17वीं कार्यकारी बैठक और 'कोंकण-26' युद्धाभ्यास से समुद्री साझेदारी मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना और ब्रिटेन की रॉयल नेवी ने 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 17वीं कार्यकारी संचालन समूह (Executive Steering Group) की बैठक आयोजित कर समुद्री सहयोग को नई ऊँचाई देने की दिशा में ठोस कदम उठाए। इस बैठक में ऑपरेशनल तालमेल बढ़ाने, उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य की युद्ध अवधारणाओं पर साझा क्षमता विकसित करने पर केंद्रित चर्चा हुई। यह बैठक उसी समय हुई जब दोनों देशों की नौसेनाएँ संयुक्त युद्धाभ्यास 'कोंकण-26' के तहत ब्रिटिश जलक्षेत्र में अपनी परिचालन क्षमता परख रही थीं।
बैठक का नेतृत्व और एजेंडा
बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय नौसेना के सहायक नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल सचिन सिक्वेरा और ब्रिटेन की रॉयल नेवी के रणनीति एवं नीति निदेशक मेजर जनरल पॉल मेनार्ड ने की। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने मौजूदा सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने और नए क्षेत्रों में साझेदारी विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
बैठक में विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों, भविष्य की युद्ध संबंधी अवधारणाओं और नई सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग के रास्ते तलाशे गए। दोनों पक्षों ने लंबे समय से चले आ रहे आपसी विश्वास को आधार बनाते हुए बदलती सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप नए अवसरों की पहचान पर जोर दिया।
'कोंकण-26': समुद्र में साझा ताकत का प्रदर्शन
भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल से लैस युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल 8 अक्टूबर 2026 को ब्रिटेन के प्लायमाउथ बंदरगाह पर पहुँचा। 15 अक्टूबर तक चले इस युद्धाभ्यास में दोनों नौसेनाओं ने समुद्र की सतह पर तालमेल, आकाश में हवाई गतिविधियाँ और पानी के नीचे पनडुब्बी-रोधी अभ्यास एक साथ संपन्न किया।
गौरतलब है कि 'कोंकण' श्रृंखला दो दशक से अधिक समय से जारी वार्षिक अभ्यास है, जो भारत-ब्रिटेन समुद्री साझेदारी की रीढ़ मानी जाती है। समय के साथ इसका दायरा और जटिलता लगातार बढ़ती गई है — अब इसमें ऐसी बहु-आयामी गतिविधियाँ शामिल हैं जो दोनों नौसेनाओं को अलग-अलग समुद्री परिस्थितियों में मिलकर काम करने के लिए तैयार करती हैं।
बंदरगाह से समुद्र तक: दो चरणों में अभ्यास
'कोंकण-26' दो चरणों में आयोजित किया गया। पहले चरण में प्लायमाउथ बंदरगाह पर दोनों नौसेनाओं के कर्मियों ने पेशेवर अनुभव साझा किए, एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा किया और खेल व सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस दौरान आईएनएस त्रिशूल को आगंतुकों के लिए खोला गया, जो दोनों देशों के बीच खुलेपन और पारदर्शिता का प्रतीक रहा।
दूसरे चरण में दोनों नौसेनाएँ समुद्र में उतरीं और वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में संयुक्त युद्धाभ्यास को अंजाम दिया। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियाँ तेज़ी से बदल रही हैं और दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक स्तर पर परिभाषित करने में जुटे हैं।
रणनीतिक महत्व और आगे की राह
भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से गहरा हुआ है। यह 17वीं कार्यकारी संचालन समूह बैठक दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच संस्थागत संवाद की परिपक्वता को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की नियमित उच्चस्तरीय बैठकें न केवल ऑपरेशनल सहयोग को गहरा करती हैं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक विश्वास की नींव भी रखती हैं। आने वाले समय में दोनों नौसेनाओं के बीच प्रौद्योगिकी साझाकरण और संयुक्त क्षमता विकास के नए आयाम स्थापित होने की उम्मीद है।