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नौसेना प्रमुख ने युद्धक तैयारियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई

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नौसेना प्रमुख ने युद्धक तैयारियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई

सारांश

भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने युद्धक तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाकर सक्षम बल तैयार करने और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

मुख्य बातें

युद्धक तैयारियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता नई प्रौद्योगिकियों का अपनाना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की जिम्मेदारियां द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों का महत्व समुद्री सुरक्षा के लिए सहयोग को बढ़ाना

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने युद्धक तैयारियों को सबसे अधिक प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने भविष्य के लिए सक्षम बल तैयार करने के लिए उभरती नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने की बात की। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की जिम्मेदारियों का उल्लेख किया और मित्र देशों के साथ द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय अभ्यासों के माध्यम से मजबूत और विश्वसनीय सहयोग विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

ये महत्वपूर्ण बातें नौसेना की कमांडर्स कांफ्रेंस में साझा की गईं। यह सम्मेलन नई दिल्ली में 14 से 17 अप्रैल तक आयोजित हुआ। इस दौरान, नौसेना प्रमुख ने भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा रणनीति 2026 का विमोचन किया, जो रक्षा बलों के विजन 2047 और भारतीय नौसेना के विजन 2047 के अनुरूप तैयार की गई है।

यह रणनीति बदलते सुरक्षा परिदृश्य में अगले दशक के लिए समुद्री क्षेत्र में राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर केंद्रित है। इसमें भू-राजनीतिक परिस्थितियों, विघटनकारी प्रौद्योगिकियों, उच्च रक्षा संगठन में सुधार और युद्ध के बदलते स्वरूप की समग्र समीक्षा शामिल है। इस चार दिवसीय महत्वपूर्ण सम्मेलन में नौसेना की ऑपरेशनल और मैटेरियल तैयारियों, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन समीक्षा की गई।

नौसेना प्रमुख ने बदलते भू-रणनीतिक परिदृश्य को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा में जटिलताएं बढ़ती जा रही हैं। कई संघर्षों की स्थिति, नियम-आधारित व्यवस्था का कमजोर होना और गैर-राज्य तत्वों से बढ़ता खतरा, सभी ने भारतीय नौसेना के लिए परिचालन क्षेत्र को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सम्मेलन के दौरान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और केंद्रीय गृह सचिव ने भी नौसेना कमांडरों के साथ विचार-विमर्श किया।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए नौसेना को युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप, विशेषकर आर्थिक और तकनीकी आयामों के लिए तैयार रहने की सलाह दी। केंद्रीय गृह सचिव ने तटीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया और नौसेना तथा अर्धसैनिक बलों के बीच बेहतर समन्वय की बात की।

केंद्रीय गृह सचिव ने अंतरराष्ट्रीय अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। सम्मेलन के दौरान, नौसेना प्रमुख ने ‘सागर मंथन’ कार्यक्रम का आयोजन भी किया, जहां नौसेना के शीर्ष नेतृत्व और विशेषज्ञों के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास तथा क्षमता निर्माण में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार, नौसेना कमांडर्स का यह सम्मेलन भारतीय नौसेना की भविष्य की रणनीति, तैयारियों और साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कदम आवश्यक है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नौसेना प्रमुख ने किस विषय पर जोर दिया?
नौसेना प्रमुख ने युद्धक तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा रणनीति कब जारी की गई?
भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा रणनीति 2026 को नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस के दौरान जारी किया गया।
क्या नौसेना प्रमुख ने किसी कार्यक्रम का आयोजन किया?
जी हां, उन्होंने 'सागर मंथन' कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास पर चर्चा हुई।
राष्ट्र प्रेस
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