भारत और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन प्रस्ताव पर अलगाव दिखाया

Click to start listening
भारत और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन प्रस्ताव पर अलगाव दिखाया

सारांश

भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर यूक्रेन युद्धविराम प्रस्ताव पर मतदान से दूरी बनाई। यह कदम वैश्विक कूटनीति में महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत है। जानिए इस मतदान में क्या हुआ और इसके पीछे की रणनीतियाँ क्या हैं।

Key Takeaways

  • भारत और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान से दूरी बनाई।
  • यूक्रेन युद्धविराम प्रस्ताव में क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया गया।
  • मतदान ने पश्चिमी देशों के बीच मतभेदों को उजागर किया।
  • अमेरिका ने प्रस्ताव में कुछ अनुच्छेदों को हटाने की मांग की थी।
  • रूस ने अमेरिका के साथ मिलकर मतदान किया, जो असामान्य था।

संयुक्त राष्ट्र, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। रूस-यूक्रेन युद्ध की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत किए गए युद्धविराम प्रस्ताव पर भारत ने अमेरिका के साथ मतदान में दूरी बनाते हुए अनुपस्थित रहने का निर्णय लिया। इस प्रस्ताव में यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन और तत्काल युद्धविराम की अपील की गई थी।

मंगलवार को हुए मतदान में १०७ देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जिसमें कई अमेरिकी सहयोगी देश भी शामिल थे। वहीं, १२ देशों ने इसका विरोध किया और ५१ देशों ने मतदान से दूरी बनाई। इस मतदान ने युद्ध समाप्ति के मुद्दे पर पश्चिमी देशों के बीच मतभेदों को भी उजागर किया।

अमेरिका के इस कदम को असामान्य माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, वाशिंगटन को आशा है कि शांति समझौता निकट है और प्रस्ताव के दो अनुच्छेद उसके कूटनीतिक प्रयासों में बाधा डाल सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते के तहत यूक्रेन से कुछ क्षेत्रों को छोड़ने का सुझाव दिया है, जिसे कीव ने अस्वीकार कर दिया है।

अमेरिका ने प्रस्ताव के मसौदे से उन अनुच्छेदों को हटाने की मांग की थी, जिनमें महासभा द्वारा यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति 'मजबूत प्रतिबद्धता' को दोहराने और अंतरराष्ट्रीय कानून एवं संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप 'व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति' की बात की गई थी।

जब इन अनुच्छेदों को हटाने का अमेरिकी प्रस्ताव ११ के मुकाबले ६९ मतों से खारिज कर दिया गया (जिसमें भारत उन ६२ देशों में शामिल था जिन्होंने मतदान से दूरी बनाई), तब अमेरिका ने अंतिम प्रस्ताव पर भी 'अनुपस्थित' रहने का निर्णय लिया। इस दौरान एक असामान्य स्थिति देखने को मिली जब रूस ने अमेरिका के साथ मिलकर अनुच्छेद हटाने के पक्ष में मतदान किया, जबकि वाशिंगटन के सहयोगी देशों ने इसका विरोध किया।

अमेरिका की उप-स्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने कहा कि प्रस्ताव के ये संदर्भ चल रही वार्ताओं को भटका सकते हैं और व्यापक कूटनीतिक विकल्पों पर चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि हम इस युद्ध की शुरुआत के बाद किसी भी समय से अधिक समझौते के करीब हैं।"

रूस की उप-स्थायी प्रतिनिधि अन्ना एवस्तिग्नेयेवा ने भी इसी भावना से सहमति जताते हुए कहा कि अब राजनीतिक समाधान का अवसर खुला है और प्राथमिकता कूटनीति को दी जानी चाहिए। हालांकि, ब्रूस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका तत्काल युद्धविराम की मांग का समर्थन करता है।

फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने कहा कि अमेरिकी मांग का समर्थन करना संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

प्रस्ताव में यूरोपीय संघ के साथ अमेरिका के युद्ध समाप्ति प्रयासों का स्वागत भी किया गया है। साथ ही इसमें कहा गया कि रूस का पूर्ण पैमाने पर आक्रमण चार वर्षों से जारी है और इससे यूक्रेन के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पद संभालने के २४ घंटे के भीतर युद्ध समाप्त करने का दावा किया था, लेकिन अब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं हो सका है। फिर भी, अमेरिका मॉस्को और कीव को वार्ता की मेज पर लाने की कोशिश जारी रखे हुए है और पिछले सप्ताह जिनेवा में अमेरिका प्रायोजित वार्ता भी आयोजित की गई थी।

अमेरिका ने कहा है कि उसके वार्ताकार जमीनी हालात को ध्यान में रखते हुए लंबित मुद्दों पर तेजी से समझौता कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।

Point of View

जहां उसने अमेरिका से दूरी बनाते हुए एक स्वतंत्र रुख अपनाया है। यह कदम वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, जो भविष्य में अधिक संवाद और समझौते की संभावनाओं को जन्म दे सकता है।
NationPress
25/02/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने मतदान में अनुपस्थित रहने का निर्णय क्यों लिया?
भारत ने अमेरिका के साथ मतदान में दूरी बनाते हुए युद्धविराम प्रस्ताव पर अनुपस्थित रहने का निर्णय लिया, जिससे उसकी स्वतंत्र कूटनीतिक स्थिति स्पष्ट होती है।
यूक्रेन का युद्धविराम प्रस्ताव क्या था?
प्रस्ताव में यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन और तत्काल युद्धविराम की मांग की गई थी।
इस मतदान का वैश्विक कूटनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस मतदान ने पश्चिमी देशों के बीच मतभेदों को उजागर किया है, जिससे भविष्य में कूटनीतिक वार्ताओं में नई चुनौतियाँ आ सकती हैं।
क्या अमेरिका और रूस ने साथ में मतदान किया?
जी हाँ, अमेरिका और रूस ने अनुच्छेद हटाने के पक्ष में मतदान किया, जो एक असामान्य स्थिति थी।
डोनाल्ड ट्रंप का इस प्रस्ताव पर क्या कहना था?
डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन से कुछ क्षेत्र छोड़ने का सुझाव दिया था, जिसे कीव ने अस्वीकार कर दिया।
Nation Press