CJI न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने ताशकंद में उज्बेकिस्तान सुप्रीम कोर्ट प्रमुख से की मुलाकात, न्यायिक सहयोग और AI पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को ताशकंद में उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रोबाखोन मखमुदोवा के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में क्या हुई चर्चा
ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बैठक की जानकारी साझा की। दूतावास के अनुसार, बैठक में भारत और उज्बेकिस्तान की न्यायिक प्रणालियों के बीच सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर गहन विमर्श हुआ। विशेष रूप से न्यायपालिका में एआई और डिजिटल तकनीक के कुशल एवं जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर दोनों पक्षों ने अपने-अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा किए।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दुनिया भर की न्यायिक प्रणालियाँ तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने की कोशिश कर रही हैं। भारत का सर्वोच्च न्यायालय विगत कुछ वर्षों में कोर्ट प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण में उल्लेखनीय कदम उठा चुका है।
एएसीसी कांग्रेस में भागीदारी
इससे पहले गुरुवार को सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में आयोजित एशियाई संवैधानिक न्यायालयों के संघ (एएसीसी) की 7वीं कांग्रेस में सक्रिय रूप से भाग लिया। भारतीय दूतावास के अनुसार, उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 'डिजिटाइजिंग जस्टिस: चार्टिंग द सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया' विषय पर संबोधन दिया। यह संबोधन भारत की न्यायिक डिजिटल यात्रा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर था।
रूस यात्रा से जुड़ा संदर्भ
गौरतलब है कि इसी वर्ष जून में सीजेआई सूर्यकांत ने रूस की यात्रा की थी, जहाँ उन्होंने मॉस्को में रूस के सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष इगोर क्रास्नोव से मुलाकात की थी। उस बैठक में उन्होंने कहा था कि भारत और रूस के सर्वोच्च न्यायालय अलग-अलग कानूनी परंपराओं के तहत विकसित हुए हैं, लेकिन दोनों के सामने तेजी से बदलती दुनिया के अनुरूप ढलने के साथ-साथ न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने की समान चुनौती है।
उन्होंने यह भी कहा था कि भारत और रूस के सर्वोच्च न्यायालय विशाल और विविधतापूर्ण समाजों की सेवा करते हैं — एक ऐसी समानता जो दोनों के बीच संवाद को स्वाभाविक रूप से प्रासंगिक बनाती है।
तकनीक और न्याय: सीजेआई का नजरिया
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पहले भी न्यायिक प्रणाली में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए कहा है कि आधुनिक न्यायपालिका को इसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था पर बना रहे। उनके अनुसार, तकनीक अदालतों तक पहुँच बढ़ाने और कार्यक्षमता में सुधार करने में सहायक हो सकती है, किंतु न्याय का संचालन मूलतः मानवीय प्रयास ही रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा था कि न्याय के भविष्य की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीकी नवाचार को स्थायी मानवीय मूल्यों के साथ किस प्रकार जोड़ा जाता है।
आगे की राह
सीजेआई की यह उज्बेकिस्तान यात्रा भारत की न्यायिक कूटनीति को एशियाई देशों के साथ और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एआई और डिजिटल तकनीक के न्यायिक उपयोग पर हुई चर्चाएँ भविष्य में दोनों देशों के बीच ज्ञान-साझेदारी और संयुक्त क्षमता-निर्माण की नींव रख सकती हैं।