ईरान में 87 दिनों बाद इंटरनेट बहाली की मंजूरी, जनवरी से बंद डिजिटल सेवा होगी बहाल
सारांश
मुख्य बातें
ईरान में 87 दिनों के लंबे डिजिटल ब्लैकआउट के बाद अधिकारियों ने इंटरनेट सेवा को जनवरी 2026 से पहले वाली स्थिति में बहाल करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला सोमवार, 25 मई 2026 को लिया गया, जब अमेरिका-इजरायल संघर्ष और देश में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद से ईरान की आम जनता ग्लोबल इंटरनेट से पूरी तरह कटी हुई थी।
फैसला कहाँ और कैसे हुआ
जानकार सूत्रों के हवाले से ईरानी मीडिया ने बताया कि यह निर्णय उपराष्ट्रपति मोहम्मदरेजा आरिफ की अध्यक्षता में हुई सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबरस्पेस की बैठक में लिया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि इंटरनेट एक्सेस को जनवरी 2026 से पहले की स्थिति में वापस लाया जाएगा। हालाँकि बहाली की सटीक समयसीमा अभी तक आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है।
इंटरनेट बंद होने की पृष्ठभूमि
ईरान में इंटरनेट पर पाबंदी दो चरणों में लगाई गई थी। पहले चरण में 8 और 9 जनवरी 2026 के आसपास देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक्सेस बाधित की गई। इसके बाद अमेरिका और इजरायल के साथ सशस्त्र संघर्ष शुरू होने पर संचार एवं इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान पहले से ही कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा था।
आर्थिक और डिजिटल नुकसान
शारघ अखबार की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से ईरान के युवा उद्यमियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के ज़रिए कम लागत में व्यवसाय खड़े करने का एक दुर्लभ अवसर बंद हो गया। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये पाबंदियाँ डिजिटल श्रम की एक पूरी पीढ़ी को कमज़ोर कर रही हैं।
मोबाइल फोन आयात के आँकड़े भी इस संकट की गहराई दर्शाते हैं। रिपोर्ट में दिए गए आँकड़ों के अनुसार, 2025 में ईरान का व्यावसायिक मोबाइल आयात घटकर लगभग 84 लाख डिवाइस (करीब 1.6 अरब डॉलर) रह गया, जबकि एक साल पहले यह 1.14 करोड़ फोन (करीब 2.5 अरब डॉलर) था।
केशम द्वीप पर एयर डिफेंस गतिविधि
इस बीच, ईरानी मीडिया ने सोमवार को केशम आइलैंड पर एयर डिफेंस गतिविधि की आवाज़ें सुने जाने की खबर दी। हालाँकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये आवाज़ें किस कारण से आईं, और किसी भी आधिकारिक संस्था ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
आगे क्या होगा
इंटरनेट बहाली की मंजूरी से ईरान की आम जनता और व्यापार जगत को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि पाबंदियों से हुए डिजिटल और आर्थिक नुकसान की भरपाई में लंबा समय लगेगा। यह देखना अहम होगा कि सरकार बहाली की प्रक्रिया में किस हद तक खुलेपन की अनुमति देती है।