ईरान में अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए चलाया गया उच्च जोखिम वाला अभियान
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिकी बलों ने एक जटिल सैन्य ऑपरेशन के माध्यम से पायलट को बचाया।
- धोखे की रणनीति का उपयोग किया गया ताकि ईरानी बलों को भ्रमित किया जा सके।
- पायलट को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में बचाया गया।
- इस अभियान में कई एलीट यूनिट्स शामिल थीं।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मिशन की सराहना की।
वॉशिंगटन, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी बलों ने ईरान में एक अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए एक उच्च जोखिम वाला अभियान शुरू किया। इस मिशन में एक जटिल सैन्य ऑपरेशन का सहारा लिया गया, ताकि उसे शत्रुतापूर्ण क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
यह कार्यवाही उस समय प्रारंभ हुई जब एक अमेरिकी एफ-15ई फाइटर जेट को गिरा दिया गया, जिसमें एक क्रू सदस्य लगभग दो दिनों तक फंसा रहा जबकि ईरानी सुरक्षा बल उसकी तलाश कर रहे थे।
पोलिटिको के अनुसार, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने धोखे की रणनीति अपनाते हुए झूठी जानकारी फैलाई कि पायलट को पहले ही खोज लिया गया है और उसे देश से बाहर ले जाया जा रहा है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, “सीआईए ने ईरान में यह जानकारी फैलाई कि अमेरिकी बलों ने पायलट को ढूंढ लिया है और उसे जमीन के रास्ते निकाला जा रहा है।” इस रणनीति का उद्देश्य ईरानी खोज टीमों को भ्रमित करना और अमेरिकी बलों को लापता पायलट की सही स्थिति जानने का समय देना था।
पोलिटिको ने आगे बताया, “इस चाल ने सीआईए को गिराए गए विमान के पायलट का पता लगाने और उसकी स्थिति को चुपचाप व्हाइट हाउस और पेंटागन तक पहुँचाने का समय दिया।”
पायलट ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में खुद को बचाने की कोशिश की। सीएनएन के अनुसार, वह पहाड़ी क्षेत्रों में अकेला छिपा रहा और ईरानी गश्ती दलों से बचने के लिए एक दरार में शरण ली।
उसके पास सीमित उपकरण थे, जिनमें पिस्तौल, संचार उपकरण और एक ट्रैकिंग बीकन शामिल था। वह अमेरिकी बलों की पहुँच से एक दिन से अधिक समय तक बाहर रहा जबकि वे उसे खोजने में लगे थे।
अमेरिकी सेना ने एक बड़े स्तर का सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन प्रारंभ किया, जिसमें स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक, निगरानी विमान और हवाई समर्थन शामिल थे। सीएनएन के अनुसार, इस मिशन में आर्मी डेल्टा फोर्स और नेवी सील टीम सिक्स जैसी एलीट यूनिट्स भी शामिल थीं।
पायलट को पहले ही बचा लिया गया था लेकिन दूसरा क्रू सदस्य लापता रहा, जिससे खोज अभियान और तेज हो गया।
द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, यह बचाव अभियान अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के लिए जल्दी ही प्राथमिकता बन गया। रिपोर्ट में कहा गया, “अमेरिकी सेना और सीआईए ने ईरान में गिराए गए फाइटर जेट के एक क्रू सदस्य को बचाने के लिए एक उच्च जोखिम वाला मिशन समन्वित किया।”
जब पायलट की स्थिति की पुष्टि हो गई, तो अमेरिकी कमांडो अंधेरे में आगे बढ़े। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, युद्धक विमानों ने पास के क्षेत्रों में हमले किए ताकि ईरानी बलों को पास न आने दिया जा सके।
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया, “कमांडो ने अपने हथियारों से जोरदार फायरिंग की ताकि आसपास मौजूद ईरानी बल उनके करीब न आ सकें।”
बचाव अभियान के दौरान कुछ जटिलताएं भी आईं। ऑपरेशन में शामिल विमानों को जमीन पर तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिससे कमांडरों को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा और अतिरिक्त सहायता बुलाने की आवश्यकता पड़ी।
इन बाधाओं के बावजूद, अमेरिकी बलों ने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया और पायलट को सुरक्षित निकाला।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान की सराहना की और इसे “अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसिक सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक” बताया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “हमने गंभीर रूप से घायल और बहुत बहादुर एफ-15 क्रू सदस्य को ईरान के पहाड़ों से बचा लिया है… सभी का अद्भुत साहस और कौशल!”
उन्होंने यह भी कहा कि बचाव से पहले ईरानी बल “बड़ी संख्या में उसकी तलाश कर रहे थे और उसे पकड़ने के करीब थे।”
इस ऑपरेशन में सैन्य और खुफिया संसाधनों का व्यापक इस्तेमाल हुआ। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, इसमें स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेस, कई विमान और अंतिम समय में सीआईए की धोखे की रणनीति शामिल थी।
यह स्थिति अत्यंत संवेदनशील थी। यदि पायलट को पकड़ लिया जाता, तो ईरान को संघर्ष में बड़ा लाभ मिल सकता था, जिससे उसे वार्ता या प्रचार में बढ़त मिलती।
इस घटना ने अमेरिकी वायुसेना के क्रू के लिए सर्वाइवल ट्रेनिंग के महत्व को भी उजागर किया। पूर्व सैन्य अधिकारियों ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ऐसी परिस्थितियां “उच्च स्तर की ट्रेनिंग” को दर्शाती हैं, जो पायलटों को कठिन हालात में मजबूत बनने और दुश्मन से बचने के लिए तैयार करती हैं।