ईरान के हमलों का दायरा हिंद महासागर तक बढ़ा

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ईरान के हमलों का दायरा हिंद महासागर तक बढ़ा

सारांश

ईरान के मिसाइल कार्यक्रम की बढ़ती क्षमताएं अमेरिका और भारत के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। क्या यह क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेगा?

मुख्य बातें

ईरान के मिसाइल कार्यक्रम की बढ़ती क्षमताएं चिंता का विषय हैं।
डिएगो गार्सिया एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है।
ईरान की मारक क्षमता तेजी से बढ़ रही है।
साइबर खतरे भी एक महत्वपूर्ण विषय हैं।
भारत की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

वाशिंगटन, २७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिंद महासागर में एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की ईरान की कथित कोशिश ने अमेरिका को चिंतित कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम अब भारत के निकट के समुद्री क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बढ़ा रहा है।

अमेरिकी विधायकों ने बताया कि डिएगो गार्सिया की ओर एक मिसाइल लॉन्च किए जाने की सूचना है। यह ठिकाना हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य बेस है। उनका कहना है कि इस घटना से स्पष्ट होता है कि ईरान अब अपने क्षेत्र से बहुत दूर तक ताकत दिखाने में सक्षम हो रहा है।

अमेरिकी स्पेस कमांड के प्रमुख जनरल स्टीफन व्हाइटिंग ने कहा कि ईरान के मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम आपस में जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “बैलिस्टिक मिसाइल वास्तव में अंतरिक्ष रॉकेट होते हैं।”

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान लंबी दूरी तक हमला करने के लिए आवश्यक कई तकनीक पहले ही विकसित कर चुका है। सीनेटर टॉम कॉटन ने कहा कि ईरान लॉन्च सिस्टम और री-एंट्री व्हीकल तकनीक को मिलाकर अपनी मारक क्षमता बढ़ा सकता है। इस पर एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने सहमति जताते हुए कहा कि ईरान यह क्षमता जल्द ही हासिल कर सकता है।

अमेरिकी स्ट्रैटेजिक कमांड के प्रमुख एडमिरल रिचर्ड कैरोल ने कहा कि ईरान ने इस दिशा में आवश्यक तकनीक का प्रदर्शन कर दिया है।

विधायकों का कहना है कि ईरान का अंतरिक्ष कार्यक्रम मिसाइल विकास में मदद कर सकता है, क्योंकि सैटेलाइट लॉन्च करने वाली तकनीक और लंबी दूरी की मिसाइलों की तकनीक काफी हद तक समान होती है।

इस चर्चा में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सेनाओं और उनके सहयोगी देशों के लिए उत्पन्न होने वाले खतरों पर प्रकाश डाला गया। हिंद महासागर दुनिया भर के व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है। पारंपरिक रूप से इसे ईरान की मारक सीमा के भीतर नहीं माना जाता था। लेकिन अब यह सोच बदल रही है।

अधिकारियों ने साइबर खतरों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। व्हाइटिंग ने कहा कि साइबर स्पेस सिस्टम की “सबसे कमजोर कड़ी” है। उन्होंने चेतावनी दी कि विरोधी देश साइबर हमलों को अधिक प्राथमिकता दे सकते हैं, क्योंकि ये हमले सस्ते होते हैं और इनका पता लगाना भी मुश्किल होता है।

विधायकों ने कहा कि ईरान की बढ़ती ताकत से सुरक्षा योजनाएं और जटिल हो गई हैं। उन्होंने बेहतर मिसाइल चेतावनी सिस्टम और अंतरिक्ष आधारित निगरानी को मजबूती देने की आवश्यकता बताई।

अमेरिका लंबे समय से ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम पर नज़र रखता आ रहा है और उसे क्षेत्र में अस्थिरता का एक बड़ा कारण मानता है। हाल के वर्षों में ईरान का मिसाइल कार्यक्रम लगातार विकसित हुआ है और उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम ने भी इसमें सहायता की है।

भारत के लिए यह स्थिति विशेष महत्व रखती है, क्योंकि हिंद महासागर में ईरान की बढ़ती पहुंच उस क्षेत्र की सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकती है, जो व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान का मिसाइल कार्यक्रम क्या है?
ईरान का मिसाइल कार्यक्रम एक सैन्य परियोजना है जो लंबी दूरी की मिसाइलों और अंतरिक्ष रॉकेटों के विकास पर केंद्रित है।
डिएगो गार्सिया का क्या महत्व है?
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है।
साइबर खतरे क्या हैं?
साइबर खतरे ऐसे हमले हैं जो कंप्यूटर सिस्टम और नेटवर्क पर किए जाते हैं, जिससे डेटा चोरी या सिस्टम को नुकसान पहुँचाया जा सकता है।
भारत को इस स्थिति से क्या खतरा है?
ईरान की बढ़ती सैन्य ताकत से भारत की समुद्री सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है, खासकर व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए।
अमेरिका ईरान के बारे में क्या सोचता है?
अमेरिका ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को क्षेत्र में अस्थिरता का एक बड़ा कारण मानता है।
राष्ट्र प्रेस