पिया दांडिया ने फ्लोरिडा की 22वीं सीट जीती, अमेरिकी संसद पहुँचने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला बनीं
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर मूल के अप्रवासी भारतीय परिवार की बेटी पिया दांडिया ने 4 नवंबर 2026 को हुए मध्यावधि चुनावों में फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज कर अमेरिकी इतिहास रचा। डेमोक्रेटिक पार्टी की इस उम्मीदवार ने रिपब्लिकन पार्टी के कारोबारी उम्मीदवार केसी असकर को पराजित करते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित होने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला का गौरव हासिल किया। उनसे पहले प्रमिला जयपाल यह उपलब्धि अपने नाम कर चुकी हैं।
चुनावी नतीजे और मतगणना
करीब 99 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने के बाद दांडिया लगभग 52 प्रतिशत वोट के साथ आगे रहीं, जबकि असकर को करीब 48 प्रतिशत मत मिले। डिसीजन डेस्क मुख्यालय, CBS न्यूज़ और NBC न्यूज़ सहित प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने उन्हें विजेता घोषित किया। उल्लेखनीय है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में इस सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में करीब 14 प्रतिशत का रुझान परिवर्तन दर्ज किया गया — जो एक रिपब्लिकन-झुकाव वाले क्षेत्र में उल्लेखनीय उलटफेर है।
जयपुर की जड़ें, अमेरिकी सपना
पाम बीच काउंटी में जन्मीं और जुपिटर, फ्लोरिडा में पली-बढ़ीं दांडिया के माता-पिता 1980 के दशक में राजस्थान के जयपुर से अमेरिका आए थे। उनके पिता डॉ. रोहित दांडिया ने यहाँ बतौर चिकित्सक सेवाएँ जारी रखीं, जबकि उनकी माँ ने 40 वर्ष की आयु में जुपिटर में एक मोंटेसरी स्कूल की स्थापना की — मुख्यतः पिया की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए।
बचपन में उनके माता-पिता उन्हें नियमित रूप से भारत भेजते थे, ताकि वह अपने चचेरे-ममेरे भाई-बहनों के साथ समय बिता सकें। अगस्त 2025 में एक साक्षात्कार में दांडिया ने कहा था, 'मेरे माता-पिता बहुत छोटी उम्र से ही मुझे अकेले भारत भेजते थे, ताकि मैं अपने भाई-बहनों के साथ समय बिता सकूँ। ये यात्राएँ मेरे जीवन को बदलने वाली साबित हुईं और मेरी पहचान को आकार देने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।'
शिक्षा और सामाजिक कार्य
दांडिया ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से 'गवर्नमेंट' विषय में स्नातक और बोस्टन विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। हार्वर्ड में पहले वर्ष के बाद उन्होंने गर्मी की छुट्टी नई दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में आशा कोऑपरेटिव सोसायटी के साथ 7 से 17 वर्ष के बच्चों को अंग्रेज़ी पढ़ाने में बिताई।
महज 28 वर्ष की आयु में उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल के रूप में कार्यभार संभाला, जहाँ के करीब 86 प्रतिशत विद्यार्थी कम आय वाले परिवारों से थे — फिर भी 100 प्रतिशत स्नातक विद्यार्थियों को कॉलेज में प्रवेश मिला।
वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित व्हाइट हाउस फेलोशिप से नवाज़ा गया, जिसके दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस की घरेलू नीति परिषद और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया। बाद में उन्होंने एप्पल में सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी पहलों का नेतृत्व किया।
चुनावी वित्त और समर्थन
14 अक्टूबर तक दांडिया के अभियान को करीब 46 लाख डॉलर का चंदा मिला था, जबकि असकर ने लगभग 74 लाख डॉलर जुटाए — जिसमें से करीब 68 लाख डॉलर उन्होंने स्वयं अपने अभियान में लगाए थे। संघीय चुनाव आयोग के अभिलेखों के अनुसार, MAGA Inc. से वित्तपोषित सुपर पीएसी 'नो गोइंग बैक पीएसी' ने 24 अक्टूबर तक दांडिया के विरुद्ध करीब 65 लाख डॉलर खर्च किए, जबकि 'हाउस मेजॉरिटी पीएसी' ने असकर के खिलाफ करीब 79 लाख डॉलर व्यय किए।
दांडिया को इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड, सर्व अमेरिका पीएसी के साथ-साथ वेलिंगटन के रिपब्लिकन मेयर माइकल नेपोलियोन का भी समर्थन मिला। पूर्व अमेरिकी परिवहन मंत्री पीट बटिगिएग ने 26 अक्टूबर को उनके समर्थन में सक्रिय प्रचार किया।
ऐतिहासिक महत्व और आगे की राह
भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने एक्स पर लिखते हुए बधाई दी — 'कांग्रेस का चुनाव जीतने के लिए पिया दांडिया को बधाई! मैं सदन में तीसरी दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला का स्वागत करने को लेकर बेहद उत्साहित हूँ।' डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी ने भी एक्स पर उनकी जीत की सराहना की।
दांडिया की इस जीत से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय-अमेरिकी सांसदों के अनौपचारिक समूह 'समोसा कॉकस' की उपस्थिति बरकरार रहेगी। वह पाम बीच गार्डन्स में अपने पति नवनीत अलग और बेटे साहिब के साथ निवास करती हैं। यह जीत भारतीय डायस्पोरा के लिए एक नई प्रेरणा है और आने वाले वर्षों में अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल की उपस्थिति को और मज़बूत करने का संकेत देती है।