26 जून 2026
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जमात गठबंधन का बीएनपी सरकार को सख्त अल्टीमेटम: जुलाई चार्टर लागू नहीं हुआ तो होगा विरोध

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जमात गठबंधन का बीएनपी सरकार को सख्त अल्टीमेटम: जुलाई चार्टर लागू नहीं हुआ तो होगा विरोध

सारांश

बांग्लादेश के जमात-ए-इस्लामी गठबंधन ने बीएनपी सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जुलाई चार्टर लागू नहीं होता है, तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। जानें इस राजनीतिक तनाव की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

जमात-ए-इस्लामी गठबंधन ने बीएनपी सरकार को अल्टीमेटम दिया है।
यदि जुलाई चार्टर लागू नहीं हुआ, तो होगा विरोध प्रदर्शन ।
संवैधानिक सुधार आयोग की बैठक की मांग की गई है।
बीएनपी सरकार इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं ले रही है।
राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।

ढाका, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश की 13वीं संसद का दूसरा सत्र रविवार से आरंभ हो चुका है। इस संदर्भ में जमात-ए-इस्लामी समेत 11 दलों के गठबंधन ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार से तुरंत संवैधानिक सुधार आयोग की बैठक आयोजित करने की मांग की है।

स्थानीय समाचार पत्रों के अनुसार, गठबंधन ने चेतावनी दी है कि यदि जुलाई नेशनल चार्टर को लागू करने के लिए त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो वे सड़कों पर विरोध प्रदर्शन प्रारंभ कर देंगे।

ढाका में शनिवार को जमात के गठबंधन ने एक बैठक की, जिसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमात के नेता हमीदुर रहमान आजाद ने कहा कि गठबंधन के वरिष्ठ नेता जल्द ही आंदोलन से संबंधित कार्यक्रमों की घोषणा करने के लिए बैठक करेंगे।

बांग्लादेशी मीडिया द डेली स्टार के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि जुलाई चार्टर के अनुसार सुधार आयोग का सत्र न बुलाने पर देश माफ नहीं करेगा और सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराएगा। आजाद ने आगे कहा कि हाल के चुनावों ने सही अर्थ में लोगों के मतदान के अधिकार का प्रतिनिधित्व नहीं किया।

बांग्लादेशी मीडिया का दावा है कि बीएनपी सरकार जमात की सड़क पर विरोध प्रदर्शन की धमकी को गंभीरता से नहीं ले रही है, क्योंकि संवैधानिक सुधार आयोग का गठन उसकी प्राथमिकताओं में नहीं है।

इस मामले पर बीएनपी के कई नेताओं के हवाले से द डेली स्टार ने बताया कि जुलाई चार्टर के कार्यान्वयन के आदेश के अनुसार, पार्लियामेंट्री ढांचे के बाहर काउंसिल बनाने से कानूनी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

द डेली स्टार ने एक बीएनपी सांसद के हवाले से कहा, "मैत्रीपूर्ण पार्टियों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है, लेकिन वे संवैधानिक आधार पर तर्क नहीं दे रही हैं।"

बीएनपी नेताओं के अनुसार, संवैधानिक सुधारों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और इन्हें पारित किया जाना चाहिए ताकि चुने हुए सांसद ऐसे मामलों में भाग ले सकें और निर्णय ले सकें।

एक स्टैंडिंग कमेटी सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "हम संवैधानिक प्रक्रियाओं का अनुसरण करते हुए आगे बढ़ेंगे।" 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में नए चुने गए सांसदों ने 17 फरवरी को शपथ ली।

वहीं जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन के सांसदों ने भी प्रस्तावित संवैधानिक सुधार आयोग के सदस्य के रूप में शपथ ली, जबकि बीएनपी सांसदों ने काउंसिल के सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली। उनका कहना है कि काउंसिल का कोई संवैधानिक आधार नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमात गठबंधन ने बीएनपी सरकार से क्या मांग की है?
जमात गठबंधन ने बीएनपी सरकार से तुरंत संवैधानिक सुधार आयोग की बैठक बुलाने की मांग की है।
क्या होगा यदि जुलाई चार्टर लागू नहीं हुआ?
यदि जुलाई चार्टर लागू नहीं हुआ, तो जमात गठबंधन ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
बीएनपी सरकार इस स्थिति पर क्या प्रतिक्रिया दे रही है?
बीएनपी सरकार जमात की धमकी को गंभीरता से नहीं ले रही है, क्योंकि संवैधानिक सुधार आयोग का गठन उनकी प्राथमिकताओं में नहीं है।
जमात के नेता ने क्या कहा है?
जमात के नेता हमीदुर रहमान आजाद ने कहा है कि वरिष्ठ नेता जल्द ही आंदोलन की योजना बनाएंगे।
संवैधानिक सुधारों पर संसद में चर्चा क्यों जरूरी है?
संवैधानिक सुधारों पर संसद में चर्चा इसलिए जरूरी है ताकि चुने हुए सांसदों को निर्णय लेने का अवसर मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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