जापानी मंत्री कुनिमित्सु अयानो का कोलकाता दौरा: GRSE में रक्षा सहयोग और बंगाल में निवेश पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
जापान की विदेश मामलों की राज्य मंत्री डॉ. कुनिमित्सु अयानो ने अपनी चार दिवसीय यात्रा के दौरान कोलकाता और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया, जहाँ उन्होंने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बैठकें कीं। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत और जापान अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाने की तैयारी में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जापान के विदेश मंत्रालय द्वारा मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. कुनिमित्सु ने इस वर्ष मई में नई सरकार के गठन पर पश्चिम बंगाल सरकार को औपचारिक बधाई भी दी। दोनों पक्षों ने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की।
बयान के अनुसार, डॉ. कुनिमित्सु ने पश्चिम बंगाल में सक्रिय जापानी कंपनियों की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला और राज्य सरकार से इन कंपनियों के निवेश को और प्रोत्साहन देने के लिए सहयोग का अनुरोध किया।
GRSE दौरा और रक्षा सहयोग
दौरे का सर्वाधिक रणनीतिक पहलू रहा गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) की यात्रा। यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कोलकाता स्थित एक प्रमुख शिपयार्ड है। यहाँ डॉ. कुनिमित्सु ने वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर भारत-जापान रक्षा एवं समुद्री (मैरिटाइम) सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।
गौरतलब है कि दोनों देश रक्षा और समुद्री क्षेत्र में सहयोग की दिशा में पहले से काम कर रहे हैं। जापानी पक्ष के अनुसार, बातचीत का मुख्य केंद्र रक्षा साझेदारी को और ठोस आधार देना था।
नेताजी भवन और ऐतिहासिक जुड़ाव
डॉ. कुनिमित्सु ने नेताजी भवन का भी दौरा किया — जो भारतीय स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को समर्पित संग्रहालय है। इस अवसर पर नेताजी के एक रिश्तेदार ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस के जापान के साथ ऐतिहासिक संबंधों की जानकारी दी। यह यात्रा केवल राजनयिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों देशों के साझा इतिहास को स्वीकार करने का भी प्रतीक बनी।
आपसी संपर्क और व्यापार
दोनों पक्षों ने व्यापार, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। जापान का स्पष्ट संकेत है कि वह पश्चिम बंगाल को एक महत्वपूर्ण आर्थिक गंतव्य के रूप में देखता है और जापानी कंपनियों की भागीदारी तथा दोनों देशों के व्यापारियों के बीच नेटवर्किंग को विस्तार देना चाहता है।
क्या होगा आगे
यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत-जापान राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ निकट है। इस मील के पत्थर को दोनों देश आर्थिक, रक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्रों में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। कोलकाता में हुई बैठकें इस बात का संकेत हैं कि द्विपक्षीय सहयोग अब केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी गहरा हो रहा है।