खामेनेई की हत्या 'रणनीतिक गलती' थी: इजरायली विपक्षी नेता यायर गोलान का नेतन्याहू पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल की प्रमुख विपक्षी पार्टी 'द डेमोक्रेट्स' के नेता यायर गोलान ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या को एक 'गंभीर रणनीतिक गलती' करार दिया है। गोलान के अनुसार इस कदम से इजरायल के राष्ट्रीय हितों की पूर्ति नहीं हुई, बल्कि ईरान में और अधिक कट्टरपंथी ताकतों को मज़बूती मिली। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को इस स्थिति के लिए सीधे जवाबदेह ठहराया।
गोलान का बयान: क्या कहा एक्स पर
एक्स पर अपनी पोस्ट में गोलान ने लिखा, 'मेरा स्पष्ट मानना है कि खामेनेई की हत्या एक गलती थी। ऐसा इसलिए नहीं कि वह मौत के हकदार नहीं थे, बल्कि इसलिए कि इससे इजरायल के हितों की पूर्ति नहीं होती।' उन्होंने आगे कहा कि 'खामेनेई को खत्म करना एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता था, लेकिन हमने एक बेहतरीन रणनीतिक मौका गंवा दिया।'
नेतन्याहू पर गंभीर आरोप
गोलान ने मौजूदा सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली क्षेत्रीय कूटनीतिक पहल का नेतृत्व करने के बजाय स्थिति संभालने की कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई। उनके अनुसार, 'इस तरह एक ऐतिहासिक सैन्य कामयाबी एक गंभीर रणनीतिक विफलता में बदल जाती है। नेतन्याहू को उनके फैसलों और उनके बाद बनी स्थिति के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।'
गोलान ने ईरान की सरकार को सत्ता से हटाने के नेतन्याहू के उद्देश्य को भी 'अवास्तविक' करार दिया और संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई के ज़रिए ईरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था को बदलने का प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकता।
खामेनेई की मौत: पृष्ठभूमि
ज्ञात हो कि अली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को संघर्ष के पहले दिन अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में हुई थी। इन हमलों में कई अन्य वरिष्ठ ईरानी अधिकारी भी मारे गए थे। खामेनेई का स्थान उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई ने लिया। गौरतलब है कि अली खामेनेई ने 2003 में परमाणु हथियारों के विरुद्ध फतवा जारी किया था, यह तर्क देते हुए कि परमाणु हथियार इस्लाम की शिक्षाओं के विरुद्ध हैं।
रणनीतिक असर: ईरान में बदला समीकरण
गोलान के अनुसार, अनुभवी नेतृत्व के हटने से ईरान के सुरक्षा ढाँचे में शीर्ष पर बैठे और भी अधिक कट्टरपंथी व हिंसक गुटों की ताकत बढ़ गई है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में पहले से ही तनाव चरम पर है और किसी भी रणनीतिक शून्य को भरने के लिए क्षेत्रीय शक्तियाँ होड़ में हैं। गोलान की यह टिप्पणी इजरायल के भीतर ही उस विमर्श को उजागर करती है जो नेतन्याहू की दीर्घकालिक नीति की दिशा पर गहरे सवाल उठा रहा है।
आगे क्या
गोलान के इस बयान से इजरायली राजनीति में विपक्षी दबाव और तेज़ होने की संभावना है। नेतन्याहू सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। क्षेत्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भी यह देखना अहम होगा कि मोजतबा खामेनेई की अगुआई में ईरान की नीति किस दिशा में जाती है।