क्या किम जोंग 3 सितंबर को चीन की सैन्य परेड का हिस्सा बनेंगे?

सारांश
Key Takeaways
- किम जोंग-उन 3 सितंबर को चीन की सैन्य परेड में शामिल होंगे।
- यह यात्रा द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर है।
- किम ने विशेष ऑपरेशन यूनिट्स की तैयारी का निरीक्षण किया।
- यह यात्रा उत्तर कोरिया और चीन के बीच संबंधों को दर्शाती है।
- किम ने स्नाइपर्स की क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया।
सियोल, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन जल्द ही चीन की यात्रा पर जाएंगे। वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ मनाने के लिए चीन जाएंगे, जैसा कि सरकारी मीडिया ने गुरुवार को बताया।
चीन हर साल 3 सितंबर को 1945 में जापान के खिलाफ मिली जीत की वर्षगांठ मनाता है। इस जीत को चीन राष्ट्रीय विजय दिवस के रूप में मनाता है।
योनहाप ने कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया है कि शी जिनपिंग के आमंत्रण पर किम किम जोंग-उन चीन की विजय की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड में भाग लेंगे।
इससे पहले, किम ने एक ट्रेनिंग बेस पर स्नाइपर और विशेष ऑपरेशन यूनिट्स का निरीक्षण किया था। उन्होंने इस दौरान जोर दिया कि विशेष ऑपरेशन यूनिट्स को मजबूत करना सेना की युद्ध तैयारी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।
किम ने सेना के जनरल स्टाफ के अधीन विशेष अभियान प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया और इकाइयों के प्रशिक्षण का निरीक्षण किया।
उन्होंने स्नाइपर्स को महत्वपूर्ण मिशनों के लिए प्रशिक्षित बल बताया और कहा कि विशेष ऑपरेशन और स्नाइपर क्षमताओं को मजबूत करना देश के सैन्य निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य है।
किम ने यह भी कहा कि पार्टी का सैन्य आयोग जनरल स्टाफ के भीतर एक केंद्रीय स्नाइपर प्रशिक्षण केंद्र के आयोजन की समीक्षा करेगा।
किम ने नई स्वदेशी स्नाइपर राइफल का भी निरीक्षण किया, जो लंबी दूरी पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है। उन्होंने हथियारों के आधुनिकीकरण और नई युद्ध रणनीतियों के विकास का आह्वान किया।
उन्होंने स्नाइपर्स यूनिट के लाइव फायर ड्रिल और विशेष ऑपरेशन यूनिट्स के प्रशिक्षण सत्र को देखने से पहले स्नाइपर्स के लिए कॉम्बैट सूट की गुणवत्ता में सुधार करने का भी आदेश दिया।
केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के 18 अगस्त से शुरू हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' के अंतिम दिन प्रकाशित की गई। उत्तर कोरिया ने इन सैन्य अभ्यासों की लगातार आलोचना की है और इसे देश पर आक्रमण करने की मंशा के रूप में देखा है।