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किम जोंग-उन का वैचारिक प्रचार तंत्र में बदलाव का आह्वान, बाहरी विचारों को रोकने पर जोर

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किम जोंग-उन का वैचारिक प्रचार तंत्र में बदलाव का आह्वान, बाहरी विचारों को रोकने पर जोर

सारांश

किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया के प्रचार तंत्र को डिजिटल युग के अनुरूप ढालने का निर्देश दिया है — लेकिन असली मकसद नवाचार नहीं, नियंत्रण है। बाहरी वैचारिक प्रभावों को 'आधुनिक तकनीकी साधनों' से रोकने का यह आह्वान दरअसल जनता की सोच पर और कसी जाने वाली पकड़ का संकेत है।

मुख्य बातें

किम जोंग-उन ने 22 सितंबर 2026 को संपन्न चार दिवसीय कार्यशाला के समापन भाषण में पार्टी के वैचारिक प्रचार तंत्र को आधुनिक बनाने का आह्वान किया।
यह 2022 से शुरू हुई कार्यशाला श्रृंखला की तीसरी कड़ी थी; किम ने उद्घाटन और समापन दोनों में भाषण दिए।
'प्रतिक्रियावादी वैचारिक संस्कृति' के प्रसार को रोकने के लिए आधुनिक सूचना एवं तकनीकी साधनों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
प्रतिभागियों को वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के नौवें कांग्रेस के फैसलों के प्रचार-प्रसार हेतु अभियान तेज करने का निर्देश मिला।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम दक्षिण कोरियाई मीडिया सहित बाहरी सांस्कृतिक प्रभावों को और प्रभावी ढंग से अवरुद्ध करने की रणनीति का हिस्सा है।

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने पार्टी के सूचना और प्रचार तंत्र को 'समय की माँग' के अनुरूप नए सिरे से तैयार करने का निर्देश दिया है। सोमवार, 22 सितंबर 2026 को संपन्न हुई सूचना क्षेत्र के अधिकारियों की तीसरी पार्टी कार्यशाला के समापन भाषण में किम ने वैचारिक कार्यपद्धति को आधुनिक बनाने पर विशेष बल दिया। कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (KCNA) की रिपोर्टों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।

मुख्य घटनाक्रम

किम ने कार्यशाला के समापन भाषण में 'वैचारिक कामकाज की सामग्री, स्वरूप, तरीकों और साधनों' को आधुनिक बनाने के लिए सैद्धांतिक निर्देश दिए। उन्होंने 'सूचना और प्रेरणा के कार्य में नवाचार तथा संस्कृति के निर्माण' का आह्वान करते हुए कहा कि ये प्रयास 'समय, क्रांति और लोगों की अपेक्षाओं' के अनुरूप होने चाहिए।

चार दिन तक चली यह कार्यशाला किम के 'क्रांतिकारी विचारों' और 'पार्टी की क्रांतिकारी विरासत' पर आधारित वैचारिक शिक्षा पर केंद्रित थी। किम ने उद्घाटन और समापन, दोनों सत्रों में स्वयं भाषण दिया।

बाहरी विचारों पर नकेल कसने की रणनीति

विशेष रूप से किम ने 'प्रतिक्रियावादी वैचारिक संस्कृति के प्रसार को पूरी तरह रोकने' के लिए 'आधुनिक सूचना और तकनीकी साधनों' के इस्तेमाल पर जोर दिया। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम उत्तर कोरिया में बाहरी सांस्कृतिक और वैचारिक प्रभावों — विशेषकर दक्षिण कोरियाई मीडिया और इंटरनेट सामग्री — के प्रवाह को अधिक प्रभावी ढंग से अवरुद्ध करने की दिशा में उठाया गया है।

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया पहले से ही विदेशी मीडिया सामग्री के प्रसार पर कठोर कानून लागू करता है। 2020 में पारित 'एंटी-रिएक्शनरी आइडियोलॉजी एंड कल्चर लॉ' के तहत दक्षिण कोरियाई फिल्में या संगीत देखने-सुनने पर गंभीर दंड का प्रावधान है।

कार्यशाला में क्या हुई चर्चा

प्रतिभागियों से आग्रह किया गया कि वे 'वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के नौवें कांग्रेस के फैसलों को लागू करने के लिए जनता को प्रेरित करने हेतु सूचना और प्रचार अभियान को तेज करें'। साथ ही हर क्षेत्र और इकाई की आवश्यकता के अनुसार वैचारिक कार्य को अनुकूलित करने पर बल दिया गया।

कार्यशाला में 'वैचारिक कामकाज के नए स्वरूपों और तरीकों', 'यथार्थवादी और आकर्षक ढंग से सूचना कार्य' करने, तथा नीति के प्रचार में दृश्य साधनों (विजुअल एड्स) के प्रभावी उपयोग पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

श्रृंखला में तीसरी कार्यशाला

KCNA के अनुसार, यह आयोजन 2022 में आरंभ हुई ऐसी कार्यशालाओं की श्रृंखला में तीसरा था। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया अपने राज्य-संचालित प्रचार तंत्र को डिजिटल युग की चुनौतियों के अनुरूप ढालने की लगातार कोशिश कर रहा है।

क्या होगा आगे

कथित तौर पर इन निर्देशों को पार्टी के सभी स्तरों पर लागू किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उत्तर कोरिया की आंतरिक सूचना नियंत्रण प्रणाली और भी सख्त होगी, और तकनीकी माध्यमों से वैचारिक निगरानी को नई धार मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे रोकना परंपरागत तरीकों से मुश्किल होता जा रहा है। 'आधुनिक तकनीकी साधनों' की बात करते हुए किम दरअसल डिजिटल निगरानी के नए औज़ारों की नींव रख रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि यह महज वैचारिक अभियान नहीं — यह उत्तर कोरिया की सूचना-सीमा को डिजिटल युग में भी बंद रखने की दीर्घकालिक परियोजना का अगला चरण है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किम जोंग-उन ने वैचारिक कार्यशाला में क्या निर्देश दिए?
किम ने पार्टी के सूचना और प्रचार तंत्र की 'सामग्री, स्वरूप, तरीकों और साधनों' को आधुनिक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने 'प्रतिक्रियावादी वैचारिक संस्कृति' के प्रसार को रोकने के लिए आधुनिक तकनीकी साधनों के उपयोग पर विशेष जोर दिया।
यह कार्यशाला क्यों आयोजित की गई और यह कब तक चली?
यह सूचना क्षेत्र के पार्टी अधिकारियों के लिए आयोजित चार दिवसीय कार्यशाला थी, जो 22 सितंबर 2026 को समाप्त हुई। यह 2022 से चली आ रही ऐसी कार्यशालाओं की श्रृंखला में तीसरी थी।
'प्रतिक्रियावादी वैचारिक संस्कृति' से किम का क्या आशय है?
विश्लेषकों के अनुसार, यह शब्दावली मुख्यतः दक्षिण कोरियाई फिल्मों, संगीत और विदेशी इंटरनेट सामग्री के लिए प्रयुक्त होती है। उत्तर कोरिया पहले से ही 2020 के कानून के तहत ऐसी सामग्री देखने पर कठोर दंड का प्रावधान रखता है।
वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के नौवें कांग्रेस का इससे क्या संबंध है?
कार्यशाला में प्रतिभागियों को वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के नौवें कांग्रेस के फैसलों को जन-स्तर तक पहुँचाने के लिए प्रचार अभियान तेज करने का निर्देश दिया गया। यह कांग्रेस उत्तर कोरिया की नीति-दिशा तय करने वाला सर्वोच्च पार्टी मंच है।
इन निर्देशों का उत्तर कोरिया की जनता पर क्या असर पड़ेगा?
कथित तौर पर इन निर्देशों से उत्तर कोरिया की आंतरिक सूचना नियंत्रण प्रणाली और सख्त होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी माध्यमों से वैचारिक निगरानी बढ़ेगी, जिससे बाहरी सामग्री तक आम नागरिकों की पहुँच और भी कठिन हो जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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