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कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ‘विकसित भारत’ का निर्माण: IIT-BHU समिट में डिजिटल समावेशन पर संवाद

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ‘विकसित भारत’ का निर्माण: IIT-BHU समिट में डिजिटल समावेशन पर संवाद

सारांश

वाराणसी में आयोजित ‘एआई समिट’ में विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव और नैतिकता पर चर्चा की। समिट में डिजिटल असमानता समाप्त करने के उपायों पर विचार किया गया।

मुख्य बातें

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उभरते आयामों पर चर्चा हुई।
डिजिटल असमानता को समाप्त करने के उपायों पर विचार किया गया।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण में एआई की भूमिका के प्रति जागरूक किया गया।
तकनीक और नैतिकता के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता बताई गई।
भारतीय भाषाओं में एआई के विकास पर जोर दिया गया।

वाराणसी, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के बीच, राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) में आयोजित ‘एआई समिट’ में विशेषज्ञों ने प्रौद्योगिकी, नैतिकता और नवाचार के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस समिट में ‘संज्ञानात्मक व्यायामशाला’ जैसी नई अवधारणाओं से लेकर डिजिटल असमानता को समाप्त करने तक पर गहन चर्चा की गई। थिंक इंडिया, मेटा, सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग तथा IIT (बीएचयू) के सहयोग से आयोजित इस एक दिवसीय समिट में देश के विभिन्न हिस्सों से 350 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उभरते पहलुओं पर विचार करना और युवा पीढ़ी को इसे राष्ट्र निर्माण में की जाने वाली भूमिका के बारे में जागरूक करना था। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. मनींद्र अग्रवाल, IIT कानपुर ने कहा कि एआई का विकास क्रमिक रहा है और देश में स्थापित होने वाले उत्कृष्टता केंद्र इसे नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि जैसे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए व्यायामशाला आवश्यक है, वैसे ही मानसिक क्षमता और मौलिक सोच को बनाए रखने के लिए इस समय भी इसकी आवश्यकता होगी।

विशिष्ट अतिथि के रूप में वर्चुअल माध्यम से जुड़े उत्तर प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि भारत तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि एआई के माध्यम से डिजिटल असमानता को समाप्त कर एक समावेशी विकसित भारत का निर्माण किया जा सकता है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को चेतावनी दी कि तकनीक का अंधाधुंध उपयोग समाज को विवेकहीन बना सकता है। उन्होंने सजग कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आवश्यकता पर बल दिया और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करने की बात कही।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व स्थापित करना चाहिए और इसे एक साधन के साथ-साथ दूरदर्शी लक्ष्य के रूप में अपनाना होगा।

समापन सत्र में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि एआई केवल तकनीकी प्रणाली नहीं, बल्कि एक वैचारिक परिवर्तन है, जिसे मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ विकसित किया जाना चाहिए।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को डिजिटल युग के अनुरूप ढालना होगा और भारतीय भाषाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास पर विशेष बल देना होगा।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह ने युवाओं से तकनीक और राष्ट्र पहले के समन्वय के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। समापन अवसर पर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया के पूर्व महानिदेशक ओमकार राय ने कहा कि भारत अब तकनीकी उपभोक्ता नहीं, बल्कि प्रदाता बनने की दिशा में बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इसे वैश्विक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

दिनभर चले तकनीकी सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सामाजिक, शैक्षणिक और राष्ट्रीय महत्व पर गहन चर्चा हुई, जिसमें शिक्षाविदों और छात्र नेताओं ने भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं और चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया। यह एक सकारात्मक संकेत है कि भारत तकनीक के क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास कैसे हो रहा है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास क्रमिक और निरंतर है, जिसमें तकनीकी नवाचारों का महत्वपूर्ण योगदान है।
इस समिट का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस समिट का मुख्य उद्देश्य एआई के उभरते आयामों पर चर्चा करना और युवा पीढ़ी को जागरूक करना था।
डिजिटल असमानता को कैसे समाप्त किया जा सकता है?
डिजिटल असमानता को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से तकनीकी समाधानों के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दीर्घकालिक प्रभाव क्या होंगे?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करते हुए, यह समाज पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रभाव डाल सकती है।
समिट में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों की संख्या कितनी थी?
समिट में 350 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
राष्ट्र प्रेस
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