किम जोंग उन का किम इल सुंग विश्वविद्यालय को आह्वान: उत्तर कोरिया को 'शक्तिशाली राष्ट्र' बनाने में निभाएं अग्रणी भूमिका
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने बुधवार, 1 अक्टूबर 2026 को देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थान किम इल सुंग विश्वविद्यालय का दौरा किया और वहाँ आयोजित 80वीं स्थापना वर्षगाँठ समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय से उत्तर कोरिया को एक 'शक्तिशाली और समृद्ध' राष्ट्र बनाने के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। सरकारी मीडिया के हवाले से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, किम ने शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) के अनुसार, किम जोंग उन ने समारोह में संबोधित करते हुए कहा, 'उसे देश के विकास के लिए चल रहे प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।' उन्होंने विश्वविद्यालय को देश का प्रमुख शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक केंद्र बताते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को और उच्च स्तर तक ले जाने का आग्रह किया।
किम इल सुंग विश्वविद्यालय की स्थापना 1 अक्टूबर 1946 को हुई थी। यह उत्तर कोरिया का पहला उच्च शिक्षण संस्थान है और इसका नाम देश के संस्थापक तथा किम जोंग उन के दादा किम इल सुंग के नाम पर रखा गया है। इस संस्थान की 80वीं वर्षगाँठ पर नेता का स्वयं उपस्थित होना इसके राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करता है।
किम का शिक्षा और विज्ञान पर जोर
किम जोंग उन ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि 'शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और प्रतिभाओं की शक्ति को मजबूत करना उत्तर कोरिया के लिए मौजूदा समय की तीन आवश्यक जरूरतें हैं।' उनके अनुसार ये तीनों क्षेत्र उत्तर कोरियाई शैली के समाजवाद के विकास की बुनियादी गारंटी हैं।
उन्होंने शिक्षा के विकास और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को देश के वर्तमान और भविष्य के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण एवं निर्णायक कारकों में गिना। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया लंबे समय से पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच आत्मनिर्भरता की नीति अपनाता रहा है, और यह बयान उसी रणनीतिक दिशा को और पुख्ता करता है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर नई पहल
इस बार के संबोधन की एक उल्लेखनीय बात यह रही कि किम जोंग उन ने विश्वविद्यालय को अन्य देशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों के साथ आदान-प्रदान एवं सहयोग का विस्तार करने पर विचार करने को कहा। यह एक ऐसे देश के लिए उल्लेखनीय है जो वैश्विक अलगाव में रहता है। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'सहयोग' मुख्यतः रूस, चीन और अन्य मित्र देशों तक सीमित रहने की संभावना है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया अपनी तकनीकी क्षमताओं — विशेषकर रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में — को विस्तार देने के प्रयासों में जुटा है।
समाजवादी शिक्षा के नए दौर का आह्वान
किम जोंग उन ने समाजवादी शिक्षा के एक नए दौर की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने संस्थान से अपेक्षा जताई कि वह शिक्षा की गुणवत्ता और विकास के स्तर को और ऊँचा उठाए तथा देश के सर्वोच्च विश्वविद्यालय के रूप में अपनी जिम्मेदारी को और सशक्त तरीके से निभाए।
यह पहली बार नहीं है जब किम ने शिक्षा क्षेत्र पर इस तरह का जोर दिया हो — पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने कई बार तकनीकी शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को राष्ट्रीय विकास की धुरी बताया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आह्वानों का व्यावहारिक क्रियान्वयन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सूचना पहुँच पर प्रतिबंधों के कारण सीमित रहता है।
आगे की राह
80 वर्ष पुराने इस विश्वविद्यालय को नई भूमिका में देखना उत्तर कोरिया की उस व्यापक राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें घरेलू तकनीकी क्षमता निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। देखना यह होगा कि किम के इस आह्वान के बाद विश्वविद्यालय में किस तरह के नीतिगत और संरचनात्मक बदलाव लाए जाते हैं।