क्या अमेरिकी विदेश नीति नए साम्राज्यवादी युग के उदय का संकेत दे रही है?

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क्या अमेरिकी विदेश नीति नए साम्राज्यवादी युग के उदय का संकेत दे रही है?

सारांश

क्या अमेरिका की नई विदेश नीति वैश्विक दक्षिण के लिए खतरा बन रही है? 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता के साथ, यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे अमेरिकी कदम अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। जानिए इस पर विस्तार से।

Key Takeaways

  • 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
  • अमेरिका की नई विदेश नीति वैश्विक दक्षिण के लिए चुनौती बन रही है।
  • वेनेजुएला में हस्तक्षेप एक साम्राज्यवादी दृष्टिकोण का उदाहरण है।
  • अमेरिका की आर्थिक धमकियाँ अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।

केप टाउन, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत द्वारा 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करने के साथ ही यह समूह एक बार फिर विशेष महत्व प्राप्त करता दिखाई दे रहा है। जब बहुपक्षीय कूटनीति गंभीर दबाव में है, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की हालिया विदेश नीति वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के लिए महत्वपूर्ण सवाल उत्पन्न कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने विदेश नीति के क्षेत्र में कई आक्रामक और चौंकाने वाले कदम उठाए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख मीडिया आउटलेट इंडिपेंडेंट ऑनलाइन (आईओएल) की रिपोर्ट में कहा गया, “3 जनवरी को अमेरिकी विशेष बलों ने कराकस में एक साहसिक अभियान चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को कथित नार्को-आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किया। इसके बाद वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर लंबे समय तक अमेरिकी निगरानी की घोषणा की गई।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “इससे कुछ दिन पहले, 25 दिसंबर 2025 को क्रिसमस के दिन, अमेरिका ने नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी सोकोटो राज्य में कथित आईएसआईएस ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों को नाइजीरियाई ईसाइयों को आतंकवाद से बचाने के नाम पर सही ठहराया गया।”

अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को हासिल करने की फिर से धमकियों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा, दुर्लभ खनिजों और आर्कटिक मार्गों का हवाला देते हुए ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी दावे डेनमार्क जैसे नाटो सहयोगी देश के साथ तनाव बढ़ा रहे हैं। व्हाइट हाउस ने सैन्य विकल्पों को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया है। ऐसे में वैश्विक दक्षिण के कई देश ऐसे मंचों की तलाश में हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और बहुपक्षीय व्यवस्था की रक्षा कर सकें।

दक्षिण अफ्रीका के थिंक टैंक द सेंटर फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक थॉट के अध्यक्ष फापानो फाशा ने भारतीय स्तंभकार टी.के. अरुण के सबस्टैक लेख ‘2026: इनटू द वर्ल्ड अकॉर्डिंग टू ट्रंप’ और द कोर में प्रकाशित विश्लेषण ‘ट्रंप्स इम्पीरियल टर्न लीव्स इंडिया विद नो ईज़ी चॉइसेज़’ का हवाला दिया।

फाशा ने अरुण के हवाले से कहा, “ट्रंप की विदेश नीति 19वीं सदी के साम्राज्यवाद के जानबूझकर पुनरुत्थान जैसी है। यह नीति सीधे तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को कमजोर करती है, जो संधियों, संप्रभुता और बहुपक्षवाद पर आधारित थी।”

उन्होंने कहा, “वेनेजुएला में हस्तक्षेप, जिसे ट्रंप ने कानून-व्यवस्था की कार्रवाई के रूप में पेश किया, अंततः उस देश के तेल निर्यात पर अमेरिकी नियंत्रण में बदल गया। यह नए साम्राज्यवादी तर्क का स्पष्ट उदाहरण है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि अरुण ने अमेरिका की आलोचना को और व्यापक बनाते हुए जबरदस्ती वाले आर्थिक कदमों की ओर भी इशारा किया है। इनमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी शामिल है, जिससे देशों को या तो अमेरिकी लाइन में आना पड़े या सजा झेलनी पड़े।

Point of View

जिसमें वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। यह एक गंभीर विषय है, जिससे न केवल राजनीतिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन भी।
NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव हुआ है?
हाँ, हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका की विदेश नीति में कई आक्रामक बदलाव हुए हैं, जो वैश्विक दक्षिण के लिए चिंताएँ उत्पन्न कर रहे हैं।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का क्या महत्व है?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के साथ, यह समूह वैश्विक कूटनीति में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर जब अमेरिका की नीति में बदलाव आ रहा है।
वेनेजुएला में अमेरिका का हस्तक्षेप क्यों हुआ?
अमेरिका ने वेनेजुएला में हस्तक्षेप को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पेश किया, लेकिन यह अंततः अमेरिकी नियंत्रण का एक उदाहरण बन गया।
ट्रंप की विदेश नीति का क्या प्रभाव है?
ट्रंप की विदेश नीति को 19वीं सदी के साम्राज्यवाद की पुनरावृत्ति के रूप में देखा जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमजोर कर रही है।
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