लेबनान में बमबारी ने क्या किया है? यूनिसेफ की चेतावनी

Click to start listening
लेबनान में बमबारी ने क्या किया है? यूनिसेफ की चेतावनी

सारांश

लेबनान में बमबारी ने रिहायशी इलाकों को तबाह कर दिया है। यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि अब देश में कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। जानें इस संकट की गंभीरता और बच्चों पर इसके प्रभाव।

Key Takeaways

  • लेबनान में बमबारी से रिहायशी इलाके तबाह हो गए हैं।
  • यूनीसेफ ने चेतावनी दी है कि अब कोई सुरक्षित स्थान नहीं है।
  • बमबारी में ३३ बच्चों की मृत्यु हुई है।
  • बच्चों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव गहरा है।
  • संघर्ष विराम और मानवीय सहायता की आवश्यकता है।

बेरूत, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लेबनान में आसमान से गिरते बमों ने भीषण तबाही मचाई है। रिहायशी क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है। यूनिसेफ ने इस दुखद सच्चाई को सामने लाया है। यूनिसेफ के मुताबिक, अब देश में "कोई भी सुरक्षित स्थान नहीं बचा है।"

संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टोफ बूलियेराक ने बेरूत से जानकारी साझा करते हुए बताया कि ८ अप्रैल २०२६ को हुई बमबारी ने कुछ ही मिनटों में बच्चों और परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। बेरूत के कुछ हिस्सों में जहां पहले कभी बम नहीं गिरे थे, वहां अचानक ही हमला किया गया। १० मिनट के अंदर दर्जनों हमले हुए।

बूलियेराक ने एक वीडियो अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा करते हुए कहा कि उस दिन की बमबारी ने रिहायशी इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। हमलों में कथित तौर पर ३३ बच्चों की मौत हो गई, जबकि १५३ अन्य घायल हुए। कई बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। इन हमलों ने न केवल परिवारों को तोड़ा है, बल्कि पूरे समुदायों में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा कर दिया है।

उन्होंने बताया कि बमबारी इतनी अचानक और तीव्र थी कि लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का समय भी नहीं मिला। कई परिवार अपने घरों में ही फंस गए, जबकि कुछ को भागने के दौरान चोटें आईं।

यूनीसेफ के एक कर्मी ने एक परिवार से मिलवाया। मां और दो बच्चे। हमले में छोटे बेटे के सिर पर चोट आई है जबकि बड़ा बेटा सुरक्षित बच गया। लेकिन वो धमाकों और बमबारी से सिहर जाता है। इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी गहरा है, क्योंकि वे लगातार भय, तनाव और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। मां भी बच्चों के साथ घर लौटने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह सुरक्षित महसूस नहीं करती। यहां तक कि यूनीसेफ के लेबनान में काम कर रहे कर्मचारी भी सुरक्षित नहीं हैं। जब हम अपना सामान लेकर निकलते हैं तो बख्तरबंद गाड़ियों में, लेकिन हाल ही में एक ड्रोन ने हमारे वाहन से महज १०० मीटर की दूरी पर बम गिराया। लोग बाल-बाल बचे। हमारे कई सहकर्मियों को अपने परिजनों की मौत की खबर मिली है। ऐसी परिस्थिति में हम काम कर रहे हैं।

यूनिसेफ ने कहा है कि मौजूदा हालात में बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संगठन ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और नागरिकों, विशेषकर बच्चों, को निशाना न बनाने की अपील की है। इसके साथ ही, संघर्ष विराम को सख्ती से लागू करने और मानवीय सहायता को बिना किसी बाधा के प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

यूनिसेफ लगातार शांति की मांग करता रहा है। हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल ने अभियान छेड़ रखा है। जिसमें से एक आश्चर्यजनक हमला ८ अप्रैल को किया गया, जिसमें एक ही दिन में २५४ लोगों के मारे जाने की जानकारी स्टेट एजेंसी ने दी थी।

Point of View

जो सभी के लिए चिंता का विषय है। यह जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस दिशा में कदम उठाए।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

लेबनान में बमबारी क्यों हो रही है?
यह बमबारी इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण हो रही है।
इस बमबारी में कितने बच्चे प्रभावित हुए हैं?
कथित तौर पर, ३३ बच्चों की मौत हो चुकी है और १५३ अन्य घायल हुए हैं।
यूनीसेफ इस स्थिति में क्या कर रहा है?
यूनीसेफ नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील कर रहा है।
क्या स्थानीय लोग सुरक्षित हैं?
नहीं, स्थानीय लोग भी बमबारी के कारण सुरक्षित नहीं हैं।
इस बमबारी का मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या है?
बच्चे और परिवार लगातार भय, तनाव और अनिश्चितता में जी रहे हैं।
Nation Press