22 अक्टूबर 2026
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विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नाउरू संसद अध्यक्ष मार्कस स्टीफन से की मुलाकात, संसदीय सहयोग पर बनी सहमति

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विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नाउरू संसद अध्यक्ष मार्कस स्टीफन से की मुलाकात, संसदीय सहयोग पर बनी सहमति

सारांश

विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा की नाउरू यात्रा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं — यह प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती कूटनीतिक पहुँच का प्रतीक है। 1960 के दशक में संयुक्त राष्ट्र में नाउरू की आज़ादी का समर्थन करने वाले भारत और उस देश के बीच संसदीय सहयोग की नई पहल, दोनों लोकतंत्रों की साझेदारी को नई ऊँचाई देती है।

मुख्य बातें

विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने 22 अक्टूबर 2026 को नाउरू के संसद अध्यक्ष मार्कस स्टीफन से यारेन स्थित ऐतिहासिक संसद भवन में मुलाकात की।
दोनों पक्षों ने संसदीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की।
मार्गेरिटा ने ITEC और ICCR के पूर्व छात्रों तथा नाउरू में बसे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात की।
1960 के दशक में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाउरू की स्वतंत्रता का प्रस्ताव सर्वप्रथम रखा था — जो दोनों देशों के संबंधों की ऐतिहासिक बुनियाद है।
यह यात्रा समोआ के दौरे के बाद हुई; अगला पड़ाव कुक आइलैंड्स है।

विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने 22 अक्टूबर 2026 को नाउरू की राजधानी यारेन स्थित ऐतिहासिक संसद भवन में वहाँ के संसद अध्यक्ष मार्कस स्टीफन से भेंट की। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच संसदीय आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

मुलाकात की मुख्य बातें

भेंट के दौरान मार्गेरिटा ने देखा कि संसद अध्यक्ष मार्कस स्टीफन के कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तस्वीरें लगी हुई हैं। मार्गेरिटा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा कि यह दृश्य दोनों जीवंत लोकतंत्रों के बीच गहरी मित्रता को प्रतिबिंबित करता है। बातचीत में साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

भारतीय समुदाय और पूर्व छात्रों से संवाद

विदेश राज्य मंत्री ने नाउरू में बसे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की और दोनों देशों के संबंधों को मज़बूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। इससे पूर्व उन्होंने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के पूर्व छात्रों से भी संवाद किया। पूर्व छात्रों के अनुभव, मार्गेरिटा के अनुसार, यह दर्शाते हैं कि भारत की क्षमता निर्माण पहलें कौशल विकास और द्विपक्षीय साझेदारी को मज़बूती देने में सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं।

भारत-नाउरू संबंधों की पृष्ठभूमि

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और नाउरू के बीच मैत्रीपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। भारत नाउरू का एक महत्वपूर्ण विकास साझेदार है। गौरतलब है कि 1960 के दशक की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र में नाउरू की स्वतंत्रता का प्रस्ताव सर्वप्रथम भारत ने रखा था — एक ऐसा ऐतिहासिक संबंध जो आज भी दोनों देशों की कूटनीति की नींव बनाता है।

यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम

मार्गेरिटा समोआ में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद नाउरू पहुँचे। उनकी इस बहु-देशीय यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण में कुक आइलैंड्स का दौरा निर्धारित है। यह यात्रा प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और 'पड़ोस से परे' नीति का हिस्सा है।

आगे की दिशा

संसदीय सहयोग और क्षमता निर्माण पर हुई चर्चा से यह संकेत मिलता है कि दोनों देश आगामी समय में विधायी विनिमय कार्यक्रमों को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ITEC और ICCR के मंच पहले ही इस संबंध को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत कर रहे हैं, और इस यात्रा से उन प्रयासों को राजनयिक समर्थन मिला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये संसदीय सहयोग के वादे ठोस संस्थागत ढाँचे में बदलेंगे या बस कूटनीतिक बयानों तक सीमित रहेंगे।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा की नाउरू यात्रा का उद्देश्य क्या था?
मार्गेरिटा की यात्रा का मुख्य उद्देश्य नाउरू के संसद अध्यक्ष मार्कस स्टीफन के साथ संसदीय आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करना था। साथ ही उन्होंने भारतीय समुदाय और ITEC-ICCR के पूर्व छात्रों से भी संवाद किया।
भारत और नाउरू के बीच संबंध कितने पुराने हैं?
भारत और नाउरू के संबंध 1960 के दशक से हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र में नाउरू की स्वतंत्रता का प्रस्ताव सर्वप्रथम भारत ने रखा था, जो इस ऐतिहासिक मित्रता की नींव है।
ITEC और ICCR नाउरू में क्या भूमिका निभा रहे हैं?
भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के माध्यम से नाउरू के नागरिकों को भारत में प्रशिक्षण और शिक्षा के अवसर मिले हैं। इन कार्यक्रमों के पूर्व छात्रों ने मार्गेरिटा को बताया कि इन पहलों से कौशल विकास और द्विपक्षीय साझेदारी मज़बूत हुई है।
मार्गेरिटा की इस बहु-देशीय यात्रा में और कौन-से देश शामिल हैं?
विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने पहले समोआ का दौरा किया, उसके बाद नाउरू पहुँचे। उनकी यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण में कुक आइलैंड्स जाने का कार्यक्रम है।
नाउरू संसद अध्यक्ष के कार्यालय में PM मोदी और लोकसभा अध्यक्ष की तस्वीर का क्या महत्व है?
मार्गेरिटा ने अपनी एक्स पोस्ट में बताया कि नाउरू संसद अध्यक्ष मार्कस स्टीफन के कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तस्वीरें लगी हैं। उन्होंने इसे दोनों जीवंत लोकतंत्रों के बीच गहरी मित्रता का प्रतीक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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