नालंदा ताम्रपत्र प्रतिकृति जकार्ता संस्थान को सौंपी, भारत-इंडोनेशिया की साझा विरासत का उत्सव
सारांश
मुख्य बातें
भारत के राजदूत संदीप चक्रवर्ती ने 15 अक्टूबर 2026 को जकार्ता स्थित नालंदा इंस्टीट्यूट को 9वीं सदी की नालंदा ताम्र-पट्टिका की एक आधिकारिक प्रतिकृति सौंपी। यह ऐतिहासिक ताम्रपत्र भारत और श्रीविजय साम्राज्य के बीच प्राचीन समुद्री कूटनीति एवं सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रमाण माना जाता है।
सौंपाई की पृष्ठभूमि
इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास ने बताया कि यह अवसर केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक रिश्तों की पुनः पुष्टि था। प्रतिकृति सौंपे जाने के साथ-साथ संस्थान के परिसर में बोधि का एक पौधा भी रोपा गया, जो दोनों देशों के बीच स्थायी द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है।
दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, 'इतिहास के पन्ने पलटे गए! राजदूत संदीप चक्रवर्ती ने जकार्ता स्थित नालंदा संस्थान को 9वीं सदी की नालंदा ताम्रपत्र की एक प्रतिकृति सौंपी।'
ताम्रपत्र का ऐतिहासिक महत्व
यह शिलालेख उस दौर का है जब श्रीविजय साम्राज्य दक्षिण-पूर्व एशिया में बौद्ध शिक्षा और व्यापार का प्रमुख केंद्र था तथा नालंदा विश्वविद्यालय के साथ उसके घनिष्ठ संबंध थे। दूतावास के अनुसार यह ताम्रपत्र 'कालातीत प्रमाण' है — एक ऐसा दस्तावेज़ जो सदियों पुराने समुद्री मार्गों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और साझा बौद्ध धरोहर को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि इस तरह की सांस्कृतिक कूटनीति भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति का हिस्सा रही है।
टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक वर्ष का संदर्भ
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा की शताब्दी मना रहे हैं। दोनों देशों ने इस वर्ष को 'टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष' घोषित किया है, जो जुलाई 2026 से सितंबर 2027 तक, यानी 15 महीनों तक चलेगा।
इंडोनेशिया के पहले शिक्षा मंत्री देवान्तारा के शैक्षिक दर्शन पर टैगोर के विचारों की गहरी छाप थी — यही सांझा बौद्धिक विरासत इस कूटनीतिक पहल की नींव है।
कार्यक्रमों का दायरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इस वर्ष की घोषणा की गई थी। 15 महीनों के इस आयोजन के तहत दोनों देशों के बीच उत्सव, फिल्में, फैशन, वस्त्र, साहित्य, शिक्षा और छात्रवृत्ति से जुड़े आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भारतीय दूतावास ने जुलाई 2026 में इसकी औपचारिक घोषणा की थी।
आगे की दिशा
नालंदा ताम्रपत्र प्रतिकृति की सौंपाई और बोधि वृक्षारोपण इस 15-महीने के सांस्कृतिक कैलेंडर की शुरुआती कड़ियाँ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रतीकात्मक कदम दोनों देशों के बीच पर्यटन, शिक्षा-आदान-प्रदान और सॉफ्ट पावर को मज़बूत करने में सहायक भूमिका निभाते हैं।