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बीजिंग में टैगोर जयंती पर भारतीय दूतावास की सांस्कृतिक संध्या, भारत-चीन मैत्री का संदेश

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बीजिंग में टैगोर जयंती पर भारतीय दूतावास की सांस्कृतिक संध्या, भारत-चीन मैत्री का संदेश

सारांश

बीजिंग में भारतीय दूतावास की टैगोर जयंती संध्या महज एक स्मरण-समारोह नहीं थी — यह भारत-चीन सांस्कृतिक संवाद का एक सजीव मंच बनी। रवींद्र संगीत, कविता-पाठ और नृत्य-नाटिका के ज़रिये दोनों देशों के कलाकारों ने मिलकर उस विरासत को सलाम किया जो सीमाओं से परे है।

मुख्य बातें

भारतीय दूतावास, बीजिंग में 22 मई 2025 को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई।
राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने टैगोर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
लियू जियान ने टैगोर की साहित्यिक एवं दार्शनिक विरासत पर विचार साझा किए।
हपेई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के छात्रों ने डांस-ड्रामा और फायरफ्लाई पोएटिक थिएटर ट्रूप ने संगीत प्रस्तुति दी।
आयोजन भारत-चीन सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है।

पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास में 22 मई 2025 को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें कविता, संगीत और नृत्य-नाटिका के माध्यम से उनकी अमर विरासत को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। इस आयोजन में चीनी, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय समुदायों के विद्वान, कलाकार, छात्र और साहित्य-प्रेमी एकत्रित हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ

संध्या की शुरुआत भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी द्वारा गुरुदेव की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। उपस्थित अतिथियों ने भी श्रद्धा और सम्मान के साथ टैगोर को नमन किया। यह आयोजन न केवल एक स्मरण-समारोह था, बल्कि भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक संवाद को और प्रगाढ़ करने का एक सार्थक प्रयास भी था।

विद्वानों के विचार

संध्या के दौरान प्रो. डोंग यूचेन और प्रो. लियू जियान ने टैगोर की साहित्यिक, दार्शनिक और सभ्यतागत विरासत पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि टैगोर केवल एक महान कवि नहीं थे, बल्कि मानवता, शिक्षा, शांति और सभ्यताओं के बीच संवाद के वैश्विक प्रतीक भी थे। उनके अनुसार, टैगोर के विचार आज भी विभिन्न संस्कृतियों को एक-दूसरे के करीब लाने की प्रेरणा देते हैं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

कार्यक्रम का सांस्कृतिक भाग विशेष रूप से प्रभावशाली रहा। बंगाली समुदाय के देबपर्णा और सब्यसाची ने भावपूर्ण रवींद्र संगीत प्रस्तुत किया, जिसने समूचे वातावरण को भावनाओं से भर दिया। मिस्टर वांग छिंगंग ने टैगोर की कविताओं का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

हपेई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा प्रस्तुत डांस-ड्रामा ने टैगोर की रचनात्मक दुनिया को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके अतिरिक्त, फायरफ्लाई पोएटिक थिएटर ट्रूप की संगीत प्रस्तुति ने कार्यक्रम में कलात्मक सौंदर्य का नया आयाम जोड़ा।

आयोजन का महत्त्व

गौरतलब है कि टैगोर का चीन से गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है — वे 1924 में चीन यात्रा पर गए थे और वहाँ उनकी विचारधारा का व्यापक प्रभाव पड़ा था। इस दृष्टि से यह आयोजन उस सौ वर्ष पुरानी सांस्कृतिक कड़ी को आज के संदर्भ में पुनर्जीवित करने का प्रयास था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन के बीच राजनयिक और सांस्कृतिक संपर्क पुनः सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

समापन

कार्यक्रम का समापन पारंपरिक बंगाली जलपान के साथ आत्मीय और गर्मजोशी भरे माहौल में हुआ, जहाँ अतिथियों ने संवाद, संगीत और साझा सांस्कृतिक अनुभवों का आनंद लिया। पूरी शाम इस बात की जीवंत मिसाल बनी कि कला और साहित्य किस तरह विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों को एक सूत्र में पिरो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि साझा सांस्कृतिक स्मृति भी होती है। यह ऐसे समय में विशेष महत्त्व रखता है जब भारत-चीन संबंध हाल के वर्षों के तनाव के बाद पुनर्निर्माण के दौर में हैं। हालाँकि एक सांस्कृतिक संध्या से राजनयिक गतिरोध नहीं टूटते, फिर भी यह संकेत देती है कि दोनों पक्ष लोक-से-लोक संपर्क के रास्ते खुले रखना चाहते हैं — और टैगोर, जो 1924 में स्वयं चीन गए थे, इसके लिए सबसे उपयुक्त प्रतीक हैं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीजिंग में टैगोर जयंती सांस्कृतिक संध्या कब और कहाँ आयोजित हुई?
यह कार्यक्रम 22 मई 2025 को पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास में आयोजित किया गया। इसमें टैगोर की साहित्यिक और मानवीय विरासत को कविता, संगीत और नृत्य-नाटिका के माध्यम से याद किया गया।
कार्यक्रम में कौन-कौन से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए?
बंगाली समुदाय के देबपर्णा और सब्यसाची ने रवींद्र संगीत प्रस्तुत किया, मिस्टर वांग छिंगंग ने कविता-पाठ किया, हपेई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के छात्रों ने डांस-ड्रामा और फायरफ्लाई पोएटिक थिएटर ट्रूप ने संगीत प्रस्तुति दी।
इस आयोजन का भारत-चीन संबंधों के लिए क्या महत्त्व है?
यह आयोजन भारत-चीन सांस्कृतिक कूटनीति को मज़बूत करने का प्रयास है। टैगोर का चीन से ऐतिहासिक संबंध रहा है — वे 1924 में चीन यात्रा पर गए थे — इसलिए उनकी जयंती पर यह संध्या दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक स्मृति को पुनर्जीवित करती है।
कार्यक्रम में किन विद्वानों ने टैगोर की विरासत पर विचार रखे?
प्रो. डोंग यूचेन और प्रो. लियू जियान ने टैगोर की साहित्यिक, दार्शनिक और सभ्यतागत विरासत पर विचार साझा किए। उन्होंने टैगोर को मानवता, शिक्षा और सभ्यताओं के बीच संवाद का वैश्विक प्रतीक बताया।
कार्यक्रम का समापन किस प्रकार हुआ?
संध्या का समापन पारंपरिक बंगाली जलपान के साथ हुआ, जहाँ भारतीय, चीनी और अंतरराष्ट्रीय अतिथियों ने आपस में संवाद और साझा सांस्कृतिक अनुभवों का आनंद लिया।
राष्ट्र प्रेस
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