नारायणी नदी खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर, नेपाल में बाढ़ अलर्ट; भारत में गंडक पर भी नज़र
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के दक्षिणी चितवन और नवलपरासी जिलों में नारायणी नदी का जलस्तर 27 सितंबर 2026 की सुबह 11 मीटर तक पहुँच गया — जो 9 मीटर के निर्धारित खतरे के निशान से करीब 2 मीटर अधिक है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार सुबह बाढ़ की औपचारिक चेतावनी जारी करते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों से तत्काल ऊँचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
जलस्तर कितना बढ़ा और क्या है पूर्वानुमान
सेंटर ऑफ हाइड्रोलॉजी एंड वॉटर रिसोर्सेज रिसर्च (CHWRR) द्वारा 27 सितंबर की सुबह 7:45 बजे IST जारी बाढ़ पूर्वानुमान बुलेटिन के अनुसार, चितवन जिले के देवघाट बाढ़ निगरानी स्टेशन पर जलस्तर रविवार दोपहर तक बढ़ते हुए लगभग 13 मीटर के उच्चतम स्तर को छू सकता है।
CHWRR ने अपनी एडवाइजरी में कहा, 'इस बात की आशंका है कि शाम तक जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना रहेगा।' संस्था के अनुसार दोपहर तक नारायणी की सहायक नदियों में भी तेज़ बहाव जारी रहने की संभावना है।
सहायक नदियाँ भी चेतावनी स्तर पर
नारायणी की प्रमुख सहायक नदी काली गंडकी में बहाव खतरे के निशान से काफ़ी ऊपर दर्ज किया गया है। इसके अलावा सेती, माडी, मर्स्यांगडी, डारौंडी और चेपे नदियाँ अपने चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही हैं और उनका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बूढ़ी गंडकी और त्रिशूली नदियाँ भी चेतावनी स्तर के करीब पहुँच गई हैं।
CHWRR के अनुसार, चितवन, नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम जिलों के निचले और बाढ़-संवेदनशील इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। ये तीनों जिले भारत की सीमा से सटे हुए हैं।
भूस्खलन और बाढ़ से नुकसान
पश्चिमी नेपाल के पाल्पा जिले की माथागढ़ी ग्रामीण नगर पालिका के भास्कट्टा में रविवार तड़के बारिश से हुए भूस्खलन में एक घर दब गया, जिससे तीन लोग लापता हो गए हैं। नेपाल पुलिस ने बताया कि बचाव अभियान के लिए एक पुलिस टीम तैनात कर दी गई है।
वहीं पर्वत जिले की जलजला ग्रामीण नगर पालिका-8 के फार्से इलाके में काली गंडकी नदी की बाढ़ ने लगभग 80 घरों की बस्ती में से 25 घर बहा दिए, जबकि शेष घर खतरे में बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, 'किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और बस्ती के सभी निवासियों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया गया है।'
भारत पर संभावित असर
नारायणी को भारत में गंडक नदी के नाम से जाना जाता है। यह सीमा-पार नदी बिहार के मैदानी इलाकों से होकर गुज़रती है, इसलिए नेपाल में जलस्तर बढ़ने का सीधा असर भारतीय क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल 24 सितंबर 2026 से लगातार भारी बारिश का सामना कर रहा है और हाल ही में भोटेकोशी तथा त्रिशूली नदियों में विनाशकारी बाढ़ झेल चुका है।
प्रशासन की अपील और सावधानियाँ
NDRRMA ने लोगों को काली गंडकी, सेती, माडी, मर्स्यांगडी, दरौंदी, चेपे, बूढ़ी गंडकी और त्रिशूली नदियों के किनारे रहने वाले सभी निवासियों को शाम तक हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने नदी किनारों, पुलों, तटबंधों और अन्य संवेदनशील स्थानों के पास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की हिदायत दी है। आगामी घंटों में मौसम और जलस्तर की बारीक निगरानी जारी रहने की उम्मीद है।