आरएसपी की चुनावी सफलता: लामिछाने ने चितवन से जीती महत्वपूर्ण सीट
सारांश
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काठमांडू, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल के चुनाव के प्रारंभिक रुझान दर्शाते हैं कि देश को जेन-जी की पसंद का प्रधानमंत्री मिल सकता है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के पीएम उम्मीदवार बालेन शाह भारी मतों से आगे हैं। इसी बीच, आरएसपी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने नेपाल के चितवन निर्वाचन क्षेत्र-2 से बड़ी जीत हासिल की है। आरएसपी ने इस वर्ष के संसदीय चुनावों में अधिकांश सीटों पर विजय प्राप्त की है और पूरे देश में इस समय पहले स्थान पर है।
लामिछाने ने 54,402 मतों के साथ जीत दर्ज की, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी, नेपाली कांग्रेस की मीना खरेल को 14,564 मत मिले।
यह तीसरी बार है जब पूर्व मीडिया पर्सनैलिटी से नेता बने लामिछाने ने इसी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है। पिछले तीन वर्षों से चितवन आरएसपी का गढ़ बना हुआ है। लामिछाने ने पहले 2022 के संसदीय चुनावों में इसी क्षेत्र से निचले सदन के लिए चयनित हुए थे। हालांकि, बाद में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नागरिकता प्रमाणपत्र को अमान्य कर दिया, जिससे उन्हें सांसद का दर्जा खोना पड़ा।
27 जनवरी, 2023 को, अदालत ने लामिछाने से उनकी संसदीय सीट छीनने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि आरसीपी अध्यक्ष ने अपनी अमेरिकी नागरिकता त्यागने के बाद नई नागरिकता के लिए पुनः आवेदन किए बिना चुनाव लड़ा था। इस निर्णय के बाद, लामिछाने ने सांसद और गृह मंत्री के रूप में अपनी भूमिकाएं और पार्टी की अध्यक्षता खो दी थी।
इसके बाद, अप्रैल 2023 में हुए उपचुनाव में, वह फिर से चुनावी मैदान में उतरे और पहले से भी अधिक मतों के साथ पुनः चुने गए।
पिछले तीन वर्षों में, 2022 में राजनीति में कदम रखने से पहले, लामिछाने को सहकारी संस्थाओं से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामलों का भी सामना करना पड़ा। कुछ महीने पहले तक, वह हिरासत में थे और 5 मार्च के चुनावों से पहले अदालत के आदेश पर रिहा हुए थे।
रैपर से नेता बने बालेन शाह के साथ उनका गठबंधन एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ है। आरएसपी ने पहले ही 20 सीटों पर विजय प्राप्त की है और फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के तहत लड़ी गई 165 सीटों में से 95 पर आगे चल रही है। वहीं, बालेन शाह पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ रेस में भी आगे हैं।
नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) (सीपीएन-यूएमएल) जैसी पारंपरिक राजनीतिक पार्टियां वर्तमान में चल रही वोटों की गिनती में आरएसपी से काफी पीछे हैं।