निशान विश्व सभ्यता मंच 2026 का छ्यूफू में उद्घाटन, 'सभ्यता, व्यवस्था और न्याय' रहा केंद्रीय विषय
सारांश
मुख्य बातें
निशान विश्व सभ्यता मंच 2026 का औपचारिक उद्घाटन 28 सितंबर 2026 को चीन के शानतुंग प्रांत के जिनिंग शहर स्थित छ्यूफू में हुआ। इस वर्ष मंच का केंद्रीय विषय 'सभ्यता, व्यवस्था और न्याय' रखा गया है, जिसके अंतर्गत वैश्विक शासन, सांस्कृतिक संवाद और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे समसामयिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
मंच के प्रमुख उप-विषय
इस वर्ष के मंच में चार प्रमुख उप-विषयों पर चर्चा निर्धारित है — 'कन्फ्यूशियसवाद का समकालीन मूल्य और वैश्विक महत्व', 'सभ्यतागत लचीलापन और वैश्विक शासन', 'वैचारिक संवाद और सभ्यतागत एकीकरण', तथा 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक सद्भाव'। ये विषय आधुनिक तकनीकी चुनौतियों को प्राचीन दार्शनिक परंपराओं के साथ जोड़ने का प्रयास करते हैं।
उद्घाटन समारोह में प्रमुख वक्ता
उद्घाटन समारोह में समकालीन चीन अध्ययन संस्थान के निदेशक जिन मिनछिंग ने अपने संबोधन में कहा कि सभ्यतागत श्रेष्ठता और सभ्यताओं के टकराव के सिद्धांतों को त्याग देना आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न सभ्यताओं की ऐतिहासिक परंपराओं, मूल्यों और विकास पथों के सम्मान पर बल दिया।
मिनछिंग ने आगे कहा कि परामर्श, संयुक्त योगदान और साझा लाभ की वैश्विक शासन अवधारणा को कायम रखा जाना चाहिए, और पारस्परिक सम्मान के माध्यम से विभिन्न सभ्यताओं के बीच नियमों पर आम सहमति बनाने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने मानव जाति के लिए साझा भविष्य समुदाय के निर्माण और समस्त मानवता के सामान्य विकास एवं स्थायी शांति तथा समृद्धि को निरंतर प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
थॉमस बाख का वीडियो संबोधन
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के मानद आजीवन अध्यक्ष थॉमस बाख ने एक वीडियो संबोधन के माध्यम से मंच में भागीदारी की। बाख ने कहा कि कन्फ्यूशियसवाद और ओलंपिक आदर्शों में कई समानताएँ हैं, और उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह मंच कन्फ्यूशियस के ज्ञान को ओलंपिक भावना के साथ संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगा।
आगे की राह
गौरतलब है कि निशान विश्व सभ्यता मंच प्रतिवर्ष छ्यूफू में आयोजित होता है — वही नगर जो कन्फ्यूशियस की जन्मस्थली के रूप में विश्वभर में जाना जाता है। यह मंच वैश्विक सभ्यतागत संवाद को एक संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जाता है। इस वर्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता को उप-विषय के रूप में शामिल किया जाना दर्शाता है कि मंच तकनीकी परिवर्तनों के नैतिक और सभ्यतागत आयामों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।