19 अक्टूबर 2026
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पाकिस्तान में किसानों का देशव्यापी प्रदर्शन, गेहूं पर ₹5,000 PKR प्रति मन समर्थन मूल्य की मांग

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पाकिस्तान में किसानों का देशव्यापी प्रदर्शन, गेहूं पर ₹5,000 PKR प्रति मन समर्थन मूल्य की मांग

सारांश

पाकिस्तान के छोटे किसान सड़कों पर उतर आए हैं — गेहूं के लिए 5,000 PKR प्रति मन समर्थन मूल्य की माँग के साथ। बढ़ती लागत, सिकुड़ता मुनाफा और आईएमएफ-समर्थित नीतियों का विरोध इस आंदोलन की धुरी है। रबी सीजन की शुरुआत पर यह संकट पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान किसान राब्ता कमेटी (पीकेआरसी) के नेतृत्व में 19 अक्टूबर 2026 को देशभर में किसानों का प्रदर्शन हुआ।
किसानों ने गेहूं के लिए 5,000 PKR प्रति मन का गारंटीड समर्थन मूल्य तय करने की माँग की।
गेहूं उत्पादन लागत बढ़कर 3,761 PKR प्रति मन तक पहुँची; सरकार ने अभी तक 'संकेतात्मक मूल्य' घोषित नहीं किया।
किसानों ने आईएमएफ और विश्व बैंक की नीतियों का विरोध किया, जिन्हें वे कृषि संस्थाओं को कमज़ोर करने वाला बता रहे हैं।
पीएएसएससीओ की तत्काल बहाली और सशक्त सरकारी खरीद तंत्र की भी माँग उठाई गई।
रबी सीजन में पानी की कमी और सरकारी गेहूं भंडार की अनिश्चित स्थिति से खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं।

पाकिस्तान में छोटे किसानों ने 19 अक्टूबर 2026 को देशभर में सड़कों पर उतरकर सरकार से गेहूं और अन्य फसलों के लिए गारंटीड समर्थन मूल्य तय करने की माँग की। 'पाकिस्तान किसान राब्ता कमेटी' (पीकेआरसी) के नेतृत्व में आयोजित इन प्रदर्शनों में किसानों ने गेहूं के लिए 5,000 पाकिस्तानी रुपये (PKR) प्रति मन की न्यूनतम समर्थन कीमत की माँग रखी।

प्रदर्शन की प्रमुख माँगें

प्रदर्शनकारी किसानों ने बताया कि उर्वरक, डीजल, बिजली और बीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि फसलों से मिलने वाला मुनाफा उत्पादन लागत के मुकाबले बेहद कम है। रिपोर्टों के अनुसार, गेहूं उत्पादन की लागत बढ़कर 3,761 PKR प्रति मन तक पहुँच चुकी है।

किसानों की प्रमुख माँगों में एक सशक्त सरकारी खरीद तंत्र की स्थापना भी शामिल है, ताकि उन्हें बिचौलियों और बाजार पर एकाधिकार रखने वाले बड़े व्यापारिक समूहों के शोषण से मुक्ति मिल सके। इसके साथ ही किसानों ने 'पाकिस्तान एग्रीकल्चरल स्टोरेज एंड सर्विसेज कॉरपोरेशन' (पीएएसएससीओ) को तत्काल बहाल करने की माँग की, जिससे सरकारी माध्यम से उपज बेचने का विकल्प फिर से खुल सके।

आईएमएफ और विश्व बैंक नीतियों का विरोध

'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान किसानों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की उन आर्थिक नीतियों का भी विरोध किया, जिनके बारे में उनका कहना है कि ये बाजार को अत्यधिक खुला बनाने और सरकारी कृषि संस्थाओं को कमज़ोर करने का काम करती हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान आईएमएफ के साथ एक बेलआउट कार्यक्रम के तहत बड़े पैमाने पर आर्थिक सुधार लागू कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि इन सुधारों की कीमत सबसे पहले हाशिये पर खड़े ग्रामीण समुदायों को चुकानी पड़ रही है।

नेताओं की बात: किसान आर्थिक टूटन की कगार पर

पीकेआरसी के अध्यक्ष तारिक महमूद और महासचिव रिफत मकसूद ने कहा कि छोटे किसान आर्थिक रूप से बिखरने की कगार पर पहुँच गए हैं। 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के संघीय समिति सदस्य फारूक तारिक ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा का सही रास्ता वास्तविक कृषि सुधारों से होकर गुजरता है। उन्होंने भूमिहीन किसानों को ज़मीन देने, पानी के न्यायसंगत वितरण और स्थानीय बीजों को बढ़ावा देने की बात कही।

'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) किसान विंग के केंद्रीय सूचना सचिव खालिद नवाज सधराइच ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो कृषि संकट और गहरा हो सकता है।

रबी सीजन पर संकट के बादल

पाकिस्तान में रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही गेहूं की खेती कई चुनौतियों से घिर गई है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की ओर से अभी तक 'संकेतात्मक मूल्य' तय न किए जाने और सरकारी गेहूं भंडार की अनिश्चित स्थिति ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।

गौरतलब है कि पानी की कमी के कारण सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन में और गिरावट की आशंका जताई जा रही है। यह स्थिति पाकिस्तान की समग्र खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

आगे क्या होगा

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो खेती और खाद्य उत्पादन दोनों पर दीर्घकालिक नकारात्मक असर पड़ सकता है। पाकिस्तानी सरकार की ओर से अभी तक इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उत्पादन में गिरावट पाकिस्तान के पहले से दबाव में चल रहे खाद्यान्न भंडार पर और बोझ डालेगी — जो एक ऐसी देश के लिए बड़ा जोखिम है जो पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में किसान किस बात को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं?
पाकिस्तानी किसान 19 अक्टूबर 2026 को देशभर में सड़कों पर उतरे हैं और सरकार से गेहूं के लिए 5,000 PKR प्रति मन का गारंटीड समर्थन मूल्य तय करने की माँग कर रहे हैं। इसके अलावा वे सशक्त सरकारी खरीद तंत्र, पीएएसएससीओ की बहाली और आईएमएफ समर्थित नीतियों की समीक्षा चाहते हैं।
पाकिस्तान में गेहूं उत्पादन की लागत कितनी हो गई है?
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान में गेहूं उत्पादन की लागत बढ़कर 3,761 PKR प्रति मन तक पहुँच गई है। किसानों का कहना है कि उर्वरक, डीजल, बिजली और बीजों की बढ़ती कीमतों के कारण खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
पाकिस्तान किसान राब्ता कमेटी (पीकेआरसी) क्या है?
पाकिस्तान किसान राब्ता कमेटी (पीकेआरसी) एक किसान संगठन है जिसने इन देशव्यापी प्रदर्शनों का नेतृत्व किया। इसके अध्यक्ष तारिक महमूद और महासचिव रिफत मकसूद हैं, जिन्होंने कहा कि छोटे किसान आर्थिक रूप से टूटने की कगार पर पहुँच गए हैं।
पाकिस्तान में रबी सीजन के दौरान कृषि संकट कितना गंभीर है?
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अभी तक गेहूं का 'संकेतात्मक मूल्य' घोषित नहीं किया है और सरकारी भंडार की स्थिति भी अनिश्चित है। इसके साथ ही पानी की कमी से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उठ रही हैं।
किसानों ने आईएमएफ और विश्व बैंक की नीतियों का विरोध क्यों किया?
'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, किसानों का कहना है कि आईएमएफ और विश्व बैंक की नीतियाँ बाजार को अत्यधिक खुला बनाने और सरकारी कृषि संस्थाओं को कमज़ोर करने का काम करती हैं। इससे छोटे किसान बड़े व्यापारिक समूहों और बिचौलियों के सामने असुरक्षित हो जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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