पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में वृद्धि से उत्पन्न संकट, विपक्ष ने शरीफ सरकार से इस्तीफे की मांग की
सारांश
Key Takeaways
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि ने आम जनता को परेशान कर दिया है।
- विपक्ष ने शरीफ सरकार से इस्तीफे की मांग की है।
- पाकिस्तान में सिविल सोसाइटी समूह सक्रिय हो रहे हैं।
- विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया जा रहा है।
- राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना बनी हुई है।
इस्लामाबाद, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के आंतरिक हालात, जो कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच मध्यस्थता का दावा कर रहे हैं, अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से आम जनता काफी परेशान है। इस स्थिति में विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी समूहों ने आवाज उठाते हुए शरीफ सरकार से इस्तीफे की मांग की है।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को हटाने की मांग जोर-शोर से उठाई है।
विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के महासचिव, सलमान अकरम राजा ने शुक्रवार को सरकार को हटाने के लिए 'मास रेवोल्यूशन' (जन क्रांति) का आह्वान किया। उन्होंने रिकॉर्ड कीमतों में बढ़ोतरी को 'गलत और अमीरों के हक में' बताया। कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी, 'जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान' ने देश भर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
लाहौर प्रेस क्लब में मीडिया को संबोधित करते हुए, राजा ने चिंता जताई कि देश 'बहुत बुरे दौर' में पहुंच गया है और 'आवाम को सत्ताधारी गठबंधन हटाने के लिए सड़कों पर उतरना होगा।'
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने उनके हवाले से कहा, 'हमें क्रांति की जरूरत है और मौजूदा सरकार को गिराना भी है जिसने फॉर्म-47 के जरिए जनमत संग्रह छीनकर सत्ता हथिया ली है।' उन्होंने उन आधिकारिक निर्वाचन परिणाम फॉर्म का जिक्र किया जिनके बारे में उनकी पार्टी का दावा है कि 2024 के आम चुनावों के दौरान उनमें बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया था।
सरकार के इस दावे को खारिज करते हुए कि पेट्रोलियम की 'कीमतों में हालिया उछाल ग्लोबल तनाव के कारण आया है', राजा ने कहा, 'पेट्रोलियम की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को यूएस-ईरान संघर्ष से जोड़ना बकवास है।'
उन्होंने पाकिस्तानी सरकार पर आरोप लगाया कि वह नागरिकों का शोषण कर रही है। वहीं, प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों के लिए लग्जरी गाड़ियों और दूसरे फायदों पर फिजूलखर्ची कर रही है।
राजा ने कहा, 'किसी देश में लोकतंत्र सीधे तौर पर गरीबों, कमजोरों और बेजुबानों की मदद करती है, लेकिन यहां इसे जानबूझकर हड़प लिया गया, जनता का अधिकार छीन लिया गया और ट्रेड यूनियनों को चुप करा दिया गया। जहां किसी देश में सियासत जिंदा नहीं रहती, वहां कमजोर और गरीब अपनी आवाज नहीं उठा पाते।'
इस बीच, एक अन्य भाषण में, जमात-ए-इस्लामी के नेता हाफिज नईमुर रहमान ने फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया और धमकी दी कि अगर सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो बेमियादी हड़ताल होगी और लोग धरने पर बैठेंगे।
डॉन ने लाहौर में एक सम्मेलन के दौरान रहमान के हवाले से कहा, 'सरकार को तुरंत इस बेरहम और अतार्किक बढ़ोतरी को वापस लेना चाहिए या पूरे देश में आंदोलन होगा जिसे वो झेलने को तैयार रहे।'
उन्होंने नागरिकों से पूरे पाकिस्तान में हड़ताल के लिए तैयार रहने की अपील की और चेतावनी दी कि अगर मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो चारों प्रांतों में मुख्यमंत्रियों के घरों का घेराव किया जाएगा।
शुक्रवार को, पाकिस्तान की ह्यूमन राइट्स काउंसिल (एचआरसी) ने फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ कराची प्रेस क्लब में विरोध प्रदर्शन किया। काउंसिल ने इसे 'गलत' बताया और चेतावनी दी कि इससे जनता पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
ह्यूमन राइट्स बॉडी के मुताबिक, बड़ी संख्या में नागरिकों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और एक्टिविस्ट ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और फ्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और महंगाई और रहने के खर्च पर इसके सीधे असर पर गंभीर चिंता जताई।
पाकिस्तान की एचआरसी ने कहा, 'वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार महंगाई नियंत्रित करने और जनता को राहत देने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जनता विरोधी कदम ऐसे ही जारी रहे, तो सरकार के खिलाफ लोग और मुखर होंगे।'