पाकिस्तान में टैक्स कलेक्शन का संकट: एफबीआर अपने लक्ष्यों से 610 अरब रुपए पीछे
सारांश
Key Takeaways
- टैक्स कलेक्शन लक्ष्य से 610 अरब रुपए की कमी
- वैश्विक व्यापार में रुकावट का असर
- आईएमएफ का दबाव और शर्तें
- अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों का असर
- अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए खतरा
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियाँ लगातार गहराती जा रही हैं। देश अपने टैक्स कलेक्शन के लक्ष्यों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना कर रहा है, और इस वित्तीय वर्ष में फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) की स्थिति काफी कमजोर हो गई है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह कमी पाकिस्तान की धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था का संकेत है, जो मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों के कारण व्यापार में आने वाली रुकावटों से और भी प्रभावित हुई है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान का टैक्स कलेक्शन गैप तेजी से बढ़ रहा है, और एफबीआर वित्तीय वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों के लिए अपने लक्ष्य से 610 अरब रुपए पीछे है।
मार्च में स्थिति और बिगड़ गई, क्योंकि वैश्विक व्यापार में रुकावट और धीमी आर्थिक गतिविधियों के कारण सरकारी आय में कमी आई।
अधिकारियों को चिंता है कि यह अंतर आगे और बढ़ सकता है, जिससे पूरे वर्ष का टैक्स लक्ष्य प्राप्त करना और भी कठिन हो जाएगा।
हालांकि, हाल ही में सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अंतरराष्ट्रीय तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। इससे फ्यूल सब्सिडी बढ़ाने से बचा गया और सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ा।
फिर भी, टैक्स कलेक्शन पर दबाव बना हुआ है, खासकर ऊर्जा और गैस क्षेत्र में आयात में कमी के कारण इंपोर्ट पर लगने वाला सेल्स टैक्स कम हो गया है, जो सरकार की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा होता है।
इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। आईएमएफ ने अगले वित्त वर्ष के लिए 15.6 ट्रिलियन रुपए का बड़ा टैक्स लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके अतिरिक्त, करीब 400 अरब रुपए के अतिरिक्त राजस्व उपायों की भी उम्मीद जताई गई है। मौजूदा वर्ष का संशोधित लक्ष्य 13.98 ट्रिलियन रुपए है, जो पहले ही काफी पीछे होता दिख रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगले वर्ष का लक्ष्य प्राप्त करना अत्यंत कठिन हो सकता है।
मामला और पेचीदा इसलिए हो जाता है क्योंकि आईएमएफ ने अपनी अगली फंडिंग को कुछ शर्तों से जोड़ दिया है। इसमें एफबीआर के पक्ष में तय हो चुके टैक्स मामलों से 322 अरब रुपए की वसूली भी शामिल है।
साथ ही, आईएमएफ की ओर से 1.2 बिलियन डॉलर की अगली किस्त जारी करने का निर्णय भी इन्हीं शर्तों पर निर्भर करेगा।