क्या पीओजेके में स्वास्थ्य व्यवस्था है चरमरा गई? डॉक्टरों ने 26 जनवरी से हड़ताल की चेतावनी दी
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति गंभीर है।
- डॉक्टरों ने 26 जनवरी से हड़ताल की चेतावनी दी है।
- सरकार को उनकी लंबित मांगों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- प्रमोशन प्रक्रिया ठप हो गई है।
- हड़ताल का असर ओपीडी सेवाओं पर पड़ेगा।
इस्लामाबाद, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अत्यंत खस्ताहाल हो गई है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फोरम (यूडीएफ) ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी लंबे समय से लंबित और उचित मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 26 जनवरी से विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
यूडीएफ, पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) और यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन (वाईडीए) का एक संगठन है।
यूडीएफ के चेयरमैन डॉ. वाजिद खान और जनरल सेक्रेटरी डॉ. अरशद राजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी। उनके साथ डॉ. वकार बट, डॉ. बशारत हयात, डॉ. आमिर इकराम, डॉ. राजा इम्तियाज और डॉ. बिलाल अहमद जैसे अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये डॉक्टर पाकिस्तानी सरकार के रवैये से नाखुश हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में सुधार की मांग की और वर्षों से लंबित मामलों की आलोचना की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने सब्र
डॉ. वाजिद खान ने कहा, "दुर्भाग्य से, हमारे मुद्दे हल होने के बजाय और जटिल हो रहे हैं, और निर्णय बार-बार टाले जा रहे हैं। इस तरह की देरी ने स्वास्थ्य प्रणाली को अनिश्चितता में डाल दिया है।"
यूडीएफ के नेताओं ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में प्रमोशन प्रक्रिया ठप हो गई है। 2019 से प्रमोशन के मामले लम्बित हैं, जिसके कारण कई डॉक्टर बिना प्रमोशन के रिटायर हो गए हैं। उन्होंने परमानेंट डायरेक्टर जनरल की गैरमौजूदगी को एक गंभीर समस्या बताया।
डॉन के अनुसार, यूडीएफ के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद जून 2022 से डॉक्टरों को वित्तीय लाभ और भत्ते न मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं और आधुनिक उपकरणों की भारी कमी है। पूरे क्षेत्र में सिर्फ एक एमआरआई मशीन है, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने महिला डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को मिल रही सुरक्षा खतरों, अस्पतालों में हिंसक घटनाओं, एकतरफा जांच और पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता जताई।
यूडीएफ नेताओं ने घोषणा की है कि पीओजेके में 26 जनवरी से दो घंटे की हड़ताल शुरू होगी, जो दो सप्ताह तक चलेगी। पूरे क्षेत्र से 1,200 से अधिक डॉक्टरों के हड़ताल में शामिल होने की उम्मीद है। हड़ताल के दौरान, ओपीडी बंद रहेंगी, जबकि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी। यदि 2 फरवरी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो अस्पताल पूरी तरह से बंद कर दिए जाएंगे।