प्रीह विहियर मंदिर में कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध से 562 स्थानों को नुकसान, भारत कर रहा था संरक्षण सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
कंबोडिया स्थित 11वीं सदी के प्रीह विहियर मंदिर — जो यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है — को 2025 में कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हुए सशस्त्र संघर्ष के दौरान भारी क्षति पहुँची है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को सलाहकार पैनल के मूल्यांकन के अनुसार, मंदिर परिसर के 562 से अधिक स्थानों पर गोलाबारी और बमबारी के स्पष्ट निशान दर्ज किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और पुनर्निर्माण में भारत लंबे समय से सहयोग करता रहा है, और संघर्ष के दौरान भारत ने इस यूनेस्को धरोहर स्थल को पहुँच रहे नुकसान पर चिंता भी जताई थी।
संघर्ष के दौरान हुई तबाही का ब्यौरा
कंबोडियाई अधिकारियों के अनुसार, 2025 में दो प्रमुख अवधियों में भीषण लड़ाई हुई। पहली लड़ाई 24 से 28 जुलाई के बीच हुई, जिसमें मंदिर परिसर के 142 स्थान भारी गोलाबारी से प्रभावित हुए। इसके बाद 7 से 27 दिसंबर के बीच हुई दूसरी और अधिक व्यापक लड़ाई में 420 अन्य स्थानों को नुकसान पहुँचा।
प्रीह विहियर के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के महानिदेशक कोंग पुथिकार ने पत्रकारों को बताया कि माइनिंग और तकनीकी टीमों द्वारा जुटाए गए आँकड़ों से पता चला है कि 81 मिलीमीटर से 155 मिलीमीटर तक के तोप के गोले और हवाई बम मंदिर के प्रमुख मंडपों तथा मार्गों पर गिरे।
क्षति की प्रकृति और संरक्षण का संकट
विस्फोटों से प्राचीन बलुआ पत्थर की दीवारें टूट गईं, ऐतिहासिक शिलालेखों के हिस्से अपनी जगह से हट गए और मंदिर की आधार-उत्कीर्ण कलाकृतियों तथा पत्थर की संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुँचा। पुथिकार के अनुसार, जिन दो हिस्सों में अमेरिका और भारत की मदद से बहाली का काम चल रहा था, वे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
मंदिर परिसर में अभी भी बिना फटे विस्फोटक और आयुध मौजूद हैं, जो संरक्षण कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। इसी कारण मंदिर अभी पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद है।
पुनर्निर्माण के प्रयास और दस्तावेज़ीकरण
हेरिटेज इमरजेंसी फंड और एएलआईपीएच फंड की सहायता से विशेषज्ञों ने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त 23 स्थानों को स्थिर किया है। टूटे हुए पत्थरों और कलात्मक अवशेषों के 65,738 टुकड़ों का दस्तावेज़ीकरण और सूचीकरण किया गया है। प्राचीन जल निकासी व्यवस्था को भी बहाल किया गया है।
अधिकारियों ने मंदिर परिसर का व्यापक त्रिआयामी डिजिटल दस्तावेज़ीकरण भी पूरा किया है, जो भविष्य में संरक्षण और पुनर्निर्माण कार्यों में सहायक होगा। 10 सितंबर 2025 को कंबोडिया और अन्य देशों के 40 से अधिक पत्रकारों को — दिसंबर में दूसरी लड़ाई के बाद पहली बार — मंदिर परिसर का दौरा करने की अनुमति दी गई।
थाईलैंड का पलटवार और राजनयिक विवाद
12 सितंबर को थाईलैंड के ज्वाइंट इन्फॉर्मेशन सेंटर (JIC) के निदेशक प्रापास सोर्नचाईदी ने आरोप लगाया कि कंबोडियाई बलों ने प्रीह विहियर मंदिर के आसपास के इलाकों का सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया और इसे एक सैन्य गढ़ के रूप में उपयोग किया। कंबोडिया ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।
गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया के बुसान में जुलाई के अंत में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित सांस्कृतिक विरासत स्थलों की संवेदनशीलता पर गहरी चिंता जताई गई और विरासत स्थलों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विवाद की ऐतिहासिक जड़ें
प्रीह विहियर को लेकर कंबोडिया और थाईलैंड (तत्कालीन सियाम) के बीच विवाद 20वीं सदी की शुरुआत में सीमा निर्धारण से जुड़ा है। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला दिया कि यह मंदिर कंबोडिया की संप्रभुता वाले क्षेत्र में स्थित है और थाईलैंड को अपने बलों को वहाँ से हटाने का आदेश दिया। 2008 में मंदिर को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद तनाव फिर से बढ़ गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध-क्षेत्रों में सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ी हुई है। मंदिर के पूर्ण पुनर्स्थापन में वर्षों का समय लग सकता है, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस प्रक्रिया की आधारशिला बनेगा।