16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

प्रीह विहियर मंदिर में कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध से 562 स्थानों को नुकसान, भारत कर रहा था संरक्षण सहयोग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
प्रीह विहियर मंदिर में कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध से 562 स्थानों को नुकसान, भारत कर रहा था संरक्षण सहयोग

सारांश

11वीं सदी का प्रीह विहियर मंदिर सिर्फ युद्ध की चपेट में नहीं आया — यह उस विरासत का नुकसान है जिसे भारत और अमेरिका मिलकर बचाने की कोशिश कर रहे थे। 562 स्थानों पर तोपखाने के निशान, 65,738 से अधिक पत्थर के टुकड़े और अभी भी मौजूद विस्फोटक बताते हैं कि पुनर्निर्माण वर्षों का काम है।

मुख्य बातें

प्रीह विहियर मंदिर के परिसर में 2025 के संघर्ष में कुल 562 स्थानों को नुकसान पहुँचा — पहली लड़ाई ( 24-28 जुलाई ) में 142 और दूसरी ( 7-27 दिसंबर ) में 420 स्थान।
81 मिमी से 155 मिमी के तोप के गोले और हवाई बम मंदिर के मुख्य मंडपों व मार्गों पर गिरे।
भारत और अमेरिका की मदद से जिन दो हिस्सों में बहाली का काम चल रहा था, वे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए।
विशेषज्ञों ने टूटे पत्थरों और अवशेषों के 65,738 टुकड़ों का दस्तावेज़ीकरण किया; गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त 23 स्थानों को स्थिर किया गया।
मंदिर परिसर में अभी भी बिना फटे विस्फोटक मौजूद हैं; पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद है।
थाईलैंड के JIC ने 12 सितंबर को आरोप लगाया कि कंबोडियाई बलों ने मंदिर क्षेत्र का सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया; कंबोडिया ने आरोप खारिज किया।

कंबोडिया स्थित 11वीं सदी के प्रीह विहियर मंदिर — जो यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है — को 2025 में कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हुए सशस्त्र संघर्ष के दौरान भारी क्षति पहुँची है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को सलाहकार पैनल के मूल्यांकन के अनुसार, मंदिर परिसर के 562 से अधिक स्थानों पर गोलाबारी और बमबारी के स्पष्ट निशान दर्ज किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और पुनर्निर्माण में भारत लंबे समय से सहयोग करता रहा है, और संघर्ष के दौरान भारत ने इस यूनेस्को धरोहर स्थल को पहुँच रहे नुकसान पर चिंता भी जताई थी।

संघर्ष के दौरान हुई तबाही का ब्यौरा

कंबोडियाई अधिकारियों के अनुसार, 2025 में दो प्रमुख अवधियों में भीषण लड़ाई हुई। पहली लड़ाई 24 से 28 जुलाई के बीच हुई, जिसमें मंदिर परिसर के 142 स्थान भारी गोलाबारी से प्रभावित हुए। इसके बाद 7 से 27 दिसंबर के बीच हुई दूसरी और अधिक व्यापक लड़ाई में 420 अन्य स्थानों को नुकसान पहुँचा।

प्रीह विहियर के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के महानिदेशक कोंग पुथिकार ने पत्रकारों को बताया कि माइनिंग और तकनीकी टीमों द्वारा जुटाए गए आँकड़ों से पता चला है कि 81 मिलीमीटर से 155 मिलीमीटर तक के तोप के गोले और हवाई बम मंदिर के प्रमुख मंडपों तथा मार्गों पर गिरे।

क्षति की प्रकृति और संरक्षण का संकट

विस्फोटों से प्राचीन बलुआ पत्थर की दीवारें टूट गईं, ऐतिहासिक शिलालेखों के हिस्से अपनी जगह से हट गए और मंदिर की आधार-उत्कीर्ण कलाकृतियों तथा पत्थर की संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुँचा। पुथिकार के अनुसार, जिन दो हिस्सों में अमेरिका और भारत की मदद से बहाली का काम चल रहा था, वे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।

मंदिर परिसर में अभी भी बिना फटे विस्फोटक और आयुध मौजूद हैं, जो संरक्षण कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। इसी कारण मंदिर अभी पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद है।

पुनर्निर्माण के प्रयास और दस्तावेज़ीकरण

हेरिटेज इमरजेंसी फंड और एएलआईपीएच फंड की सहायता से विशेषज्ञों ने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त 23 स्थानों को स्थिर किया है। टूटे हुए पत्थरों और कलात्मक अवशेषों के 65,738 टुकड़ों का दस्तावेज़ीकरण और सूचीकरण किया गया है। प्राचीन जल निकासी व्यवस्था को भी बहाल किया गया है।

अधिकारियों ने मंदिर परिसर का व्यापक त्रिआयामी डिजिटल दस्तावेज़ीकरण भी पूरा किया है, जो भविष्य में संरक्षण और पुनर्निर्माण कार्यों में सहायक होगा। 10 सितंबर 2025 को कंबोडिया और अन्य देशों के 40 से अधिक पत्रकारों को — दिसंबर में दूसरी लड़ाई के बाद पहली बार — मंदिर परिसर का दौरा करने की अनुमति दी गई।

थाईलैंड का पलटवार और राजनयिक विवाद

12 सितंबर को थाईलैंड के ज्वाइंट इन्फॉर्मेशन सेंटर (JIC) के निदेशक प्रापास सोर्नचाईदी ने आरोप लगाया कि कंबोडियाई बलों ने प्रीह विहियर मंदिर के आसपास के इलाकों का सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया और इसे एक सैन्य गढ़ के रूप में उपयोग किया। कंबोडिया ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।

गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया के बुसान में जुलाई के अंत में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित सांस्कृतिक विरासत स्थलों की संवेदनशीलता पर गहरी चिंता जताई गई और विरासत स्थलों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

विवाद की ऐतिहासिक जड़ें

प्रीह विहियर को लेकर कंबोडिया और थाईलैंड (तत्कालीन सियाम) के बीच विवाद 20वीं सदी की शुरुआत में सीमा निर्धारण से जुड़ा है। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला दिया कि यह मंदिर कंबोडिया की संप्रभुता वाले क्षेत्र में स्थित है और थाईलैंड को अपने बलों को वहाँ से हटाने का आदेश दिया। 2008 में मंदिर को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद तनाव फिर से बढ़ गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध-क्षेत्रों में सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ी हुई है। मंदिर के पूर्ण पुनर्स्थापन में वर्षों का समय लग सकता है, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस प्रक्रिया की आधारशिला बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाएँ उजागर हो जाती हैं। 1962 के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले के बावजूद यह तीसरी बड़ी सशस्त्र झड़प है — जो दर्शाती है कि न्यायिक निर्णय बिना राजनीतिक इच्छाशक्ति के खोखले रह जाते हैं। भारत की भूमिका यहाँ विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है: एक ओर वह संरक्षण में सक्रिय भागीदार था, दूसरी ओर वह इस संघर्ष के दौरान सार्वजनिक चिंता जताने तक सीमित रहा। यह वह प्रश्न उठाता है कि क्या सांस्कृतिक कूटनीति को अधिक मुखर भूमिका निभानी चाहिए — विशेषकर तब जब भारत के सहयोग से बने संरक्षण कार्य युद्ध की भेंट चढ़ जाते हैं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष में कितना नुकसान हुआ?
कंबोडियाई अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 में हुए दो चरणों के संघर्ष में मंदिर परिसर के कुल 562 स्थानों को नुकसान पहुँचा — जुलाई में 142 और दिसंबर में 420 स्थान। 81 मिमी से 155 मिमी तक के तोपखाने के गोले और हवाई बम मुख्य मंडपों पर गिरे।
प्रीह विहियर मंदिर के संरक्षण में भारत की क्या भूमिका रही है?
भारत लंबे समय से प्रीह विहियर मंदिर के संरक्षण और पुनर्निर्माण में सहयोग करता रहा है। राष्ट्रीय प्राधिकरण के महानिदेशक कोंग पुथिकार के अनुसार, भारत और अमेरिका की मदद से जिन दो हिस्सों में बहाली का काम चल रहा था, वे भी संघर्ष में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। संघर्ष के दौरान भारत ने इस यूनेस्को धरोहर को हो रहे नुकसान पर चिंता भी जताई थी।
क्या प्रीह विहियर मंदिर अभी पर्यटकों के लिए खुला है?
नहीं, मंदिर अभी पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद है। अधिकारियों के अनुसार, परिसर में अभी भी बिना फटे विस्फोटक और आयुध मौजूद हैं जो गंभीर खतरा बने हुए हैं। 10 सितंबर को 40 से अधिक पत्रकारों को सीमित पहुँच दी गई, जो दिसंबर 2025 की लड़ाई के बाद पहला मीडिया दौरा था।
थाईलैंड ने प्रीह विहियर मंदिर को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
थाईलैंड के ज्वाइंट इन्फॉर्मेशन सेंटर के निदेशक प्रापास सोर्नचाईदी ने 12 सितंबर को आरोप लगाया कि कंबोडियाई बलों ने प्रीह विहियर मंदिर के आसपास के इलाकों का सैन्य गढ़ के रूप में उपयोग किया। कंबोडिया ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
प्रीह विहियर मंदिर का ऐतिहासिक और कानूनी विवाद क्या है?
यह विवाद 20वीं सदी की शुरुआत में सीमा निर्धारण से उपजा है। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला दिया कि मंदिर कंबोडिया की संप्रभुता में है। 2008 में यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद तनाव फिर बढ़ा और सशस्त्र झड़पें हुईं, जिनमें 2025 का संघर्ष सबसे विनाशकारी रहा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले