छिंगताओ में पहला एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन शुरू, 20 देशों के 1,000 से अधिक विशेषज्ञ जुटे
सारांश
मुख्य बातें
चीन के शानतोंग प्रांत के छिंगताओ शहर में 12 अक्टूबर 2026 को पहले एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन हुआ। तीन दिवसीय इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय 'सतत स्वच्छ पृथ्वी विकास के लिए सुदूर संवेदन अनुप्रयोग' है। 20 देशों और क्षेत्रों के 230 से अधिक विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उद्यमों के कुल 1,000 से अधिक विशेषज्ञ एवं विद्वान इसमें भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य एवं विषय-क्षेत्र
यह सम्मेलन भू-विज्ञान और सुदूर संवेदन के क्षेत्र में अत्याधुनिक विकास पर केंद्रित है। इसमें बहु-स्रोत सुदूर संवेदन अवलोकन, उन्नत संवेदन प्रौद्योगिकी, डेटा विश्लेषण विधियों तथा सतत विकास अनुप्रयोगों पर गहन चर्चा होगी। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र तथा विश्व के सुदूर संवेदन वैज्ञानिकों के लिए एक स्थायी और सक्रिय आदान-प्रदान मंच स्थापित करना है।
संसाधन एवं पर्यावरण निगरानी, समुद्री एवं वायुमंडलीय अवलोकन, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियाँ और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति — ये सभी इस सम्मेलन की प्राथमिकता में हैं।
प्रमुख विशेषज्ञों के संबोधन
चीनी विज्ञान अकादमी के अकादमीशियन कुओ हुआतोंग सहित कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने डिजिटल पृथ्वी, शहरी एवं पर्यावरणीय सुदूर संवेदन, माइक्रोवेव सुदूर संवेदन, पृथ्वी अवलोकन प्रणाली और स्थानिक सूचना अनुप्रयोग जैसे अग्रणी क्षेत्रों में नवीनतम शोध-प्रगति और विकास की दिशाओं को साझा किया।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जलवायु संकट और प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति बढ़ रही है, जिससे सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
16 समानांतर सत्रों में विशिष्ट विमर्श
सम्मेलन में 16 समानांतर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनके विषयों में सुदूर संवेदन बड़े मॉडल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), समुद्री सुदूर संवेदन, वायुमंडलीय और जल विज्ञान सुदूर संवेदन, भूमि सतह और पारिस्थितिक पर्यावरण, आपदा निगरानी, क्रायोस्फीयर और ध्रुवीय सुदूर संवेदन, शहरी सुदूर संवेदन, सुदूर संवेदन बिग डेटा और क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म तथा सतत विकास लक्ष्य अनुप्रयोग शामिल हैं।
गौरतलब है कि AI और बिग डेटा के समावेश से सुदूर संवेदन अनुसंधान की क्षमता और गति में तेज़ी से वृद्धि हो रही है, जो इस क्षेत्र को वैश्विक पर्यावरण प्रबंधन में एक निर्णायक उपकरण बना रहा है।
वार्षिक आयोजन का दीर्घकालिक लक्ष्य
एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन अब प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाएगा। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य एशिया-प्रशांत और वैश्विक स्तर पर शोध-शक्तियों को एकजुट कर पृथ्वी अवलोकन, सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी और उसके विभिन्न अनुप्रयोगों में समन्वित नवाचार को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन भविष्य में विभिन्न देशों के बीच तकनीकी सहयोग और ज्ञान-साझाकरण की नींव रखेगा।