रबी लामिछाने का 1-2 जून को भारत दौरा, PM मोदी और जयशंकर से मुलाकात संभव
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने 1-2 जून को दो दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली आएंगे। यह यात्रा ऐसे नाज़ुक दौर में हो रही है जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हो पाई है और दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।
दौरे का उद्देश्य और कार्यक्रम
आरएसपी के प्रवक्ता मनीष झा के अनुसार, लामिछाने को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने नई दिल्ली आने का निमंत्रण दिया है। इस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की भी संभावना है, हालांकि दोनों पक्षों ने अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। प्रवक्ता ने कहा कि यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम सोमवार को जारी किया जाएगा।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में BJP ने अन्य देशों की सरकारों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के स्तर पर भी संबंध प्रगाढ़ करने को प्राथमिकता दी है। इससे पहले भी नेपाल के कई नेता BJP के निमंत्रण पर भारत का दौरा कर चुके हैं।
भारत-नेपाल संबंधों में मौजूदा तनाव
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब काठमांडू और नई दिल्ली के बीच कई मसलों पर मतभेद सतह पर आए हैं। नेपाल ने मई 2025 की शुरुआत में भारत और चीन दोनों को कड़ा विरोध जताते हुए असहमति पत्र भेजा था, जब दोनों देशों ने घोषणा की थी कि भारतीय तीर्थयात्री नेपाल की अनुमति के बिना विवादित लिपुलेख क्षेत्र के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा करेंगे।
लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों पर नेपाल और भारत दोनों संप्रभुता का दावा करते हैं, जबकि ये वर्तमान में भारत के प्रभावी नियंत्रण में हैं। यह सीमा विवाद दशकों से दोनों देशों के संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
व्यापारिक मोर्चे पर भी तनाव रहा है। नेपाल ने भारत से लाए जाने वाले ₹100 से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी को सख्ती से लागू किया, जिससे सीमा पार व्यापार प्रभावित हुआ। हालांकि, नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल इस नियम को रोक दिया गया है। दूसरी ओर, भारत ने नेपाल से आने वाली प्रत्येक चाय खेप के लिए अनिवार्य लैब परीक्षण की शर्त लगाई थी, जिसे बाद में संशोधित कर केवल पुनः निर्यात होने वाली चाय तक सीमित कर दिया गया।
विदेश सचिव की रद्द यात्रा और PM शाह का रुख
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की 11 मई को प्रस्तावित नेपाल यात्रा का अचानक रद्द होना भी संबंधों की दिशा को लेकर चिंता का विषय बना। रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री शाह ने मिस्री से मिलने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यात्रा निरस्त हो गई।
प्रधानमंत्री शाह का कूटनीतिक रुख अपेक्षाकृत सतर्क रहा है। अप्रैल में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर और भारत में अमेरिकी राजदूत से मुलाकात नहीं की। इसके एक सप्ताह पूर्व दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर भी प्रधानमंत्री से नहीं मिल पाए थे।
आरएसपी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, प्रधानमंत्री शाह तब तक किसी विदेशी दौरे पर नहीं जाना चाहते जब तक वे अपने कार्यकाल के कम से कम 100 दिन पूरे नहीं कर लेते। उन्हें 27 मार्च 2025 को नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि शाह की दिल्ली यात्रा तभी होगी जब लंबित द्विपक्षीय मुद्दों पर नौकरशाही स्तर पर पर्याप्त सहमति बन जाए।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत और त्रिभुवन विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर लोक राज बराल ने कहा कि भारत का यह चाहना स्वाभाविक है कि वह उस पार्टी के साथ अच्छे संबंध रखे जिसने नेपाल में महत्वपूर्ण जनादेश हासिल किया है। उनके शब्दों में, 'आरएसपी अध्यक्ष की यात्रा दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक समझ बनाने का अवसर हो सकती है, हालांकि कुछ कठिन द्विपक्षीय मुद्दे अभी भी अनसुलझे रह सकते हैं।'
बराल ने यह भी कहा कि विदेशी प्रतिनिधियों से मुलाकात का निर्णय राष्ट्रीय हित के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल प्रोटोकॉल पर। उनके अनुसार, 'समान दूरी की नीति सिद्धांत रूप में आकर्षक लग सकती है, लेकिन व्यवहार में यह कठिन है, क्योंकि नेपाल के भारत के साथ संबंधों का दायरा और जटिलता अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक है।'
आगे क्या होगा
आरएसपी की स्थापना 2022 में हुई थी और यह अपेक्षाकृत नई पार्टी है, जिसने नेपाल की प्रतिनिधि सभा में उल्लेखनीय जनादेश हासिल किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सत्तारूढ़ दल प्रमुख की पड़ोसी देश की यात्रा को सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। लामिछाने की इस यात्रा के परिणाम यह संकेत दे सकते हैं कि आने वाले महीनों में प्रधानमंत्री शाह की दिल्ली यात्रा की संभावना कितनी प्रबल है और दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा क्या होगी।