युद्धविराम के बाद रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्रों पर 76 हमले किए, 2 की मौत: जेलेंस्की
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शनिवार रात एक्स पर पोस्ट कर खुलासा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम की घोषणा के एक सप्ताह बाद से रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा, तेल और गैस ढाँचे पर 76 बार जानबूझकर हमले किए हैं। शनिवार रात के हमलों में 2 लोगों की मौत हो गई और 12 लोग घायल हुए, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जेलेंस्की ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से एक हफ्ते पहले ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम की घोषणा किए जाने के बाद से, रूस ने जानबूझकर यूक्रेन के ऊर्जा, तेल और गैस क्षेत्रों पर 76 बार हमले किए हैं।' उन्होंने बताया कि बीती रात विन्नित्सिया, जाइटॉमिर, खमेलनित्सकी और ओडेसा क्षेत्रों में बिजली सबस्टेशनों को निशाना बनाया गया।
इसके अलावा, रविवार सुबह वोलिन क्षेत्र में एक कृषि उद्यम पर भी हमला किया गया। जेलेंस्की के अनुसार, रूस ने पिछले एक सप्ताह में यूक्रेन पर लगभग 2,700 हमलावर ड्रोन, 1,700 हवाई बम और 66 मिसाइलें दागी हैं, जिनमें से अधिकांश बैलिस्टिक मिसाइलें थीं।
आम जनता पर असर
जेलेंस्की ने बताया कि इन हमलों के चलते हज़ारों परिवार बिजली के बिना हैं। बिजली कर्मचारियों और मरम्मत दलों की टीमें लगभग चौबीसों घंटे काम कर आपूर्ति बहाल करने में जुटी हैं। रिहायशी इमारतों पर भी हमलों की पुष्टि की गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन में सर्दी का मौसम करीब आ रहा है और ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की क्षति लाखों नागरिकों के लिए गंभीर मानवीय संकट खड़ा कर सकती है।
जेलेंस्की का अमेरिका को संदेश
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका को यह देखना चाहिए कि प्रतिबंधों में राहत या हुए समझौतों के जवाब में रूस ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा, 'इसके उलट, रूस हर ऐसे संकेत को, जिससे उसे आर्थिक फायदा हो सकता है, इस बात के सबूत के रूप में देखता है कि युद्ध जारी रखने की उसकी रणनीति सफल हो रही है।'
जेलेंस्की ने यह भी जोड़ा, 'युद्ध इसलिए नहीं चल रहा क्योंकि यूक्रेन अपने बचाव का अधिकार इस्तेमाल कर रहा है। युद्ध जारी रहने की असली वजह रूस का रवैया है।'
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि यूक्रेन संघर्ष में ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर हमले बार-बार हथियार के रूप में इस्तेमाल किए गए हैं। आलोचकों का कहना है कि घोषित युद्धविराम के बावजूद ज़मीन पर हमलों का जारी रहना किसी भी शांति प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
क्या होगा आगे
जेलेंस्की के अनुसार, शांति का मौका तभी बन सकता है जब रूस पर वास्तविक दबाव डाला जाए। मरम्मत दल युद्धग्रस्त क्षेत्रों में बिजली बहाली में लगे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।