जेलेंस्की का आरोप: रूस ने 320 से अधिक मिसाइल-ड्रोन से यूक्रेन के ऊर्जा ढाँचे पर सबसे बड़ा हमला किया
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने 17 अक्टूबर 2026 को बताया कि रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। शुक्रवार शाम 7 बजे से शनिवार सुबह 7 बजे के बीच महज 12 घंटों में रूस ने 320 से अधिक ड्रोन, क्रूज मिसाइलें और बैलिस्टिक मिसाइलें यूक्रेन के ऊर्जा ढाँचे, शहरों और आम बस्तियों पर दागीं। जेलेंस्की ने इस हमले की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कीं और अमेरिका से 'लिंडसे ग्राहम एक्ट' को प्रभावी रूप से लागू करने की अपील की।
हमले का विस्तार और प्रभावित क्षेत्र
जेलेंस्की के अनुसार, इस हमले में यूक्रेन के अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन से जुड़ी 15 से अधिक महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया गया। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में लुत्स्क, रिव्ने, जाइटॉमिर, विन्नित्सिया, शेपेतिव्का, स्लावुता और नेतिशिन शामिल रहे। इसके अलावा खार्किव, कीव और निप्रो की ऊर्जा सुविधाएँ भी इन हमलों की चपेट में आईं।
जेलेंस्की ने स्वीकार किया कि यूक्रेनी सैनिक बड़ी संख्या में हमलों को नाकाम कर रहे हैं, लेकिन हमलों के व्यापक पैमाने और उनकी निरंतरता के कारण गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त ढाँचे को बहाल करने का काम बिना रुके जारी है और इसके लिए सभी सरकारी सेवाएँ व ऊर्जा कंपनियों के संसाधन लगाए गए हैं।
रूस की रणनीति: सर्दियों से पहले ऊर्जा संकट
जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस जानबूझकर सर्दियाँ शुरू होने से पहले यूक्रेन में बड़े पैमाने पर बिजली संकट पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि रूस का लक्ष्य लाखों नागरिकों को बिजली और हीटिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित करना है। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप में ठंड का मौसम दस्तक दे रहा है और ऊर्जा आपूर्ति युद्ध की सबसे संवेदनशील कड़ी बन चुकी है।
गौरतलब है कि रूस ने पिछले कई महीनों में यूक्रेनी ऊर्जा ढाँचे पर हमलों की संख्या और तीव्रता में लगातार वृद्धि की है। यह हमला उसी अभियान की सबसे बड़ी कड़ी बताया जा रहा है।
'लिंडसे ग्राहम एक्ट' और अमेरिका से अपील
जेलेंस्की ने अपनी पोस्ट में अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब रूस यूक्रेन पर इतना बड़ा ऊर्जा हमला कर रहा है, ठीक उसी समय अमेरिका में एक ऐसा फैसला लिया गया जिसमें 'लिंडसे ग्राहम एक्ट' को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया। उनके अनुसार इस कानून का मूल उद्देश्य रूस पर ऐसा दबाव बनाना था जिससे युद्ध समाप्ति में मदद मिल सके।
जेलेंस्की ने कहा, 'मेरा मानना है कि यह कानून बहुत मददगार साबित हो सकता था और अब भी हो सकता है। इसके लिए जरूरी है कि इसे वास्तव में लागू किया जाए। इसके समर्थन में उठने वाली हर आवाज मायने रखती है।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि प्रतिबंधों का दबाव कम करने से रूस को हमले जारी रखने का हौसला मिलेगा।
यूरोपीय साझेदारों की भूमिका और आगे की राह
जेलेंस्की ने यूरोपीय साझेदारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही यूक्रेन के लिए नए सहायता पैकेज तैयार कर लिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध का लक्ष्य समाप्ति होना चाहिए, न कि ऐसे हालात बनाना जो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को संघर्ष अनिश्चित काल तक खींचने का कारण दें। यह संकट अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बार फिर यूक्रेन की ऊर्जा सुरक्षा और रूस पर प्रभावी प्रतिबंधों की अनिवार्यता का सवाल खड़ा करता है।