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क्या किम मिन-सोक को दक्षिण कोरिया का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया?

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क्या किम मिन-सोक को दक्षिण कोरिया का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया?

सारांश

दक्षिण कोरिया में किम मिन-सोक को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस पद के लिए किम का चयन किया था, जो सत्तारूढ़ पार्टी के चार बार के सांसद हैं। नेशनल असेंबली ने उनके समर्थन में मतदान किया। इस प्रक्रिया में हुई राजनीति और आरोपों को जानें।

मुख्य बातें

किम मिन-सोक को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
नेशनल असेंबली ने उनके समर्थन में मतदान किया।
मुख्य विपक्ष ने बहिष्कार किया।
आर्थिक संकट पर ध्यान केंद्रित करने का संकल्प लिया।
मार्शल लॉ अधिनियम में भी संशोधन किया गया।

सोल, 3 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। किम मिन-सोक को गुरुवार को आधिकारिक तौर पर दक्षिण कोरिया का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने देश की नई सरकार के तहत इस पद के लिए सत्तारूढ़ पार्टी के चार बार के सांसद के नाम का चयन किया था, जिसके समर्थन में नेशनल असेंबली ने मतदान किया।

इससे पहले दिन में, नेशनल असेंबली ने पूर्ण सत्र के दौरान तीन अमान्य मतपत्रों के साथ 173-3 मतों से किम के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया।

मुख्य विपक्षी दल पीपुल्स पावर पार्टी (पीपीपी) ने उनकी संपत्ति और परिवार से जुड़े आरोपों के विरोध में इस प्रस्ताव का बहिष्कार किया।

किम ने पत्रकारों से बात करते हुए "लोगों की इच्छा को बनाए रखने" का संकल्प लिया और इस बात पर जोर दिया कि "अत्याचारी ताकतों" के कारण उत्पन्न "आर्थिक संकट पर काबू पाना" उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

राष्ट्रपति के प्रवक्ता कांग यू-जंग के अनुसार, ली ने संसदीय मतदान के बाद आधिकारिक तौर पर किम को प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

किम की रिपोर्ट की गई संपत्ति और खर्च के बीच बड़े अंतर के साथ-साथ उनके बेटे के कॉलेज प्रवेश और चीन के त्सिंगुआ विश्वविद्यालय में उनकी खुद की पढ़ाई के बारे में आरोपों को मुद्दा बनाते हुए पीपीपी ने किम को अयोग्य उम्मीदवार कहा है।

डेमोक्रेटिक पार्टी ने पहले कहा था कि वह पुष्टिकरण को एकतरफा आगे बढ़ाएगी, भले ही पीपीपी असहमत हो। दक्षिण कोरिया में प्रधानमंत्री ही एकमात्र कैबिनेट पद है जिसके लिए संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होती है।

सत्र के दौरान, नेशनल असेंबली ने वाणिज्यिक अधिनियम में संशोधन भी पारित किया, जो कॉर्पोरेट बोर्ड के सदस्यों के प्रत्ययी कर्तव्य को सभी शेयरधारकों तक विस्तारित करेगा।

प्रतिद्वंद्वी दलों में उस नियम को लेकर टकराव हुआ था, जो ऑडिटर का चयन करते समय किसी कंपनी में सबसे बड़े शेयरधारक के मतदान अधिकार को तीन प्रतिशत तक सीमित कर देगा। लेकिन बुधवार को नियम में संशोधन करने के बाद विधेयक को मतदान के लिए रखने पर सहमति हुई।

उपस्थित 272 सांसदों में से 220 ने संशोधन को मंजूरी दी। 29 सदस्यों ने इसके विरोध में मत डाला, जबकि 23 ने मतदान में भाग नहीं लिया।

समाचार एजेंसी योनहाप ने बताया कि असेंबली ने मार्च में भी इसी तरह का विधेयक पारित किया था, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति यूं सुक योल ने इसे वीटो के जरिए रद्द कर दिया था।

मार्शल लॉ अधिनियम में संशोधन भी गुरुवार के सत्र में पारित किया गया, जो मार्शल लॉ घोषित होने पर नेशनल असेंबली में सेना और पुलिस के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर वर्तमान आर्थिक चुनौतियों के संदर्भ में।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किम मिन-सोक की नियुक्ति का क्या महत्व है?
किम मिन-सोक की नियुक्ति दक्षिण कोरिया की नई सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राजनीतिक स्थिरता और विकास के लिए आवश्यक है।
क्या विपक्ष ने किम की नियुक्ति का विरोध किया?
हाँ, मुख्य विपक्षी दल पीपुल्स पावर पार्टी ने किम की नियुक्ति का विरोध किया और इस प्रक्रिया का बहिष्कार किया।
किम मिन-सोक के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
किम को आर्थिक संकट और राजनीतिक विवादों को सुलझाने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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