भारत में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की यात्रा: जानें कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की यात्रा 19-22 अप्रैल को है।
- यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है।
- द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए शिष्टाचार भेंट का आयोजन होगा।
- राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
- समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग 19 से 22 अप्रैल तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, व्यापार और निवेश को नई दिशा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत स्थित कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (केआईईपी) में भारत और दक्षिण एशिया टीम के अध्यक्ष क्यूंगहून किम ने राष्ट्रपति के दौरे की पूरी जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, यह दौरा दोनों देशों की आर्थिक सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यात्रा की शुरुआत में राष्ट्रपति ली, विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक शिष्टाचार भेंट करेंगे, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद, वे भारत में रह रहे कोरियाई समुदाय के साथ रात्रिभोज में शामिल होंगे, जो लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने का संकेत है।
अगले दिन राष्ट्रपति ली का औपचारिक स्वागत समारोह होगा। इसके बाद, वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। तत्पश्चात, उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता होगी।
इस शिखर बैठक में रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, हरित ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। वार्ता के बाद, दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया जाएगा।
आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रपति ली भारत-कोरिया बिजनेस डायलॉग और बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगे, जिसमें दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह मंच निवेश, तकनीकी सहयोग और नई साझेदारियों के अवसर तलाशने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
उम्मीद है कि यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों को नई ऊँचाई पर पहुँचाएगी, विशेषकर जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग को लेकर नई चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।