भारत के लिए संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल का नजरिया

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भारत के लिए संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल का नजरिया

सारांश

क्या भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से सबसे अधिक प्रभावित होगा? रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल के अनुसार, यह स्थिति भारत के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। जानिए इस संकट के पीछे की वजह और इसके व्यापक प्रभाव।

Key Takeaways

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना भारत के लिए गंभीर संकट है।
  • भारत की आर्थिक निर्भरता ईरान पर है।
  • फ्रेट और इंश्योरेंस चार्ज बढ़ेंगे।
  • भारत को नए व्यापारिक रास्ते तलाशने होंगे।
  • यह स्थिति वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डालेगी।

नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद मध्य पूर्व के हालात एक बार फिर से चिंताजनक हो गए हैं। विशेषकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। इस विषय पर रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल से बातचीत की गई, जिन्होंने इसे भारत के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर करार दिया।

रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना या न खुलना, आने वाला समय पूरी दुनिया के लिए बेहद भयावह होने वाला है। भारत ने अभी के लिए कुछ इंतजाम कर लिए हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से सबसे अधिक नुकसान भारत को ही होने वाला है। ईरान में बुनियादी ढांचा पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा है। पाइपलाइन और पोर्ट भी बर्बाद हो चुके हैं। इन सबको दोबारा तैयार करने में बहुत लंबा समय लगेगा, संभवतः कई साल। इस स्थिति का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, खासकर भारत पर।

उन्होंने आगे बताया कि अगर भारत की बात करें तो वहां से 88 प्रतिशत एलपीजी और 20 प्रतिशत एलएनजी आता है। 59 प्रतिशत तेल भी वहीं से आता है। इसके अलावा, भारत को वहां से 65 से 70 बिलियन डॉलर रेमिटेंस के रूप में मिलते थे, जो अब बंद हो चुके हैं। भारतीय किसानों के लिए यूरिया और फर्टिलाइजर का 40 प्रतिशत कच्चा माल भी वहीं से आता था। साथ ही, भारत की जेनेरिक दवाओं का बड़ा हब बनने के लिए 35 से 40 प्रतिशत कच्चा माल ईरान से आता था। भारत की प्लास्टिक उद्योग के लिए भी 35 से 40 प्रतिशत कच्चा माल वहीं से मिलता था। इसके अलावा, भारत के लिए सबसे जरूरी हीलियम, जो सेमीकंडक्टर हब के लिए आवश्यक है, वह भी 45 प्रतिशत वहीं से आता था।

सहगल ने आगे कहा कि इस संघर्ष का असर भारत के दृष्टिकोण से देखा जाए तो फ्रेट चार्ज और इंश्योरेंस चार्ज बढ़ जाएंगे। इसके साथ ही, इंडिया मिडिल ईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईमैक) लगभग समाप्त हो गया है। यूएई-यूएसए-इंडिया-इजरायल (यूटूआईटू) भी समाप्त हो गया है। चाबहार बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान के साथ हमारी सीधी कनेक्टिविटी भी अब खत्म हो गई है। इसके अलावा, नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, जो रूस और मध्य एशिया में व्यापार का सुगम मार्ग था, वह भी ठप हो गया है। इस प्रकार, यह स्थिति पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत के लिए भी गंभीर नुकसान का कारण बनेगी।

Point of View

यह स्पष्ट होता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है, जिससे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को नुकसान होगा।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का क्या महत्व है?
यह जलमार्ग वैश्विक तेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसके जरिए भारत समेत कई देशों को ऊर्जा सप्लाई होती है।
भारत को ईरान से क्या-क्या सामान मिलता है?
भारत को ईरान से एलपीजी, LNG, तेल, यूरिया, फर्टिलाइजर, और हीलियम जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल मिलते हैं।
क्या भारत को इस स्थिति से आर्थिक नुकसान होगा?
जी हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को इस स्थिति से भारी आर्थिक नुकसान होगा, खासकर रेमिटेंस और कच्चे माल की कमी के कारण।
क्या भारत के लिए कोई विकल्प है?
भारत को अन्य देशों से कच्चे माल के लिए नए रास्ते और विकल्प तलाशने की आवश्यकता होगी।
क्या यह स्थिति वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डालेगी?
बिल्कुल, यह स्थिति केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डालेगी।
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