ताइवान-जापान रक्षा साझेदारी: चीनी खतरे के बीच मजबूत गठबंधन की दरकार
सारांश
मुख्य बातें
ताइपे में 3 अगस्त को सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की सुरक्षा और संप्रभुता का भविष्य अब केवल उसकी अपनी सैन्य क्षमता पर नहीं, बल्कि उसके निकटतम सहयोगियों — विशेषकर जापान — की ताकत पर भी टिका है। चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के बीच यह रिपोर्ट तर्क देती है कि ताइवान को दूरस्थ सहयोगियों के भरोसे रहने की बजाय जापान के साथ ठोस और रणनीतिक रक्षा सहयोग स्थापित करना होगा।
रिपोर्ट का मुख्य तर्क
यूरोपियन टाइम्स में प्रकाशित इस विश्लेषण के लेखक खेदरूब थोंडुप — जो तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के भतीजे हैं — ने लिखा, "ताइवान के लिए उसका अस्तित्व केवल उसकी मजबूती पर ही नहीं, बल्कि उसके साथियों की ताकत पर भी निर्भर करता है। संभावित साझेदारों में, जापान सबसे करीबी, काबिल और राजनीतिक रूप से जुड़ा पक्ष है, इसलिए सिर्फ सांकेतिक नहीं बल्कि एक स्ट्रेटेजिक जरूरत के तौर पर भी ताइवान को जापान के साथ अपने रक्षा संबंधों को और समृद्ध करना चाहिए।"
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि जापान भौगोलिक निकटता, सैन्य सामर्थ्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की साझेदारी — तीनों आधारों पर ताइवान का सबसे उपयुक्त रक्षा भागीदार है।
भौगोलिक और सामरिक महत्व
रिपोर्ट के अनुसार, जापान के क्यूशू द्वीप से लेकर ताइवान तक फैले रयूक्यू द्वीप समूह किसी भी संभावित चीनी सैन्य अभियान के सीधे रास्ते में पड़ते हैं। यदि चीन ताइवान पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो जापान के दक्षिणी क्षेत्र और उसकी समुद्री आपूर्ति लाइनें गंभीर खतरे में पड़ सकती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब चीन नियमित रूप से ताइवान जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। गौरतलब है कि दोनों देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़ी है — यदि जापान कमजोर पड़ता है, तो ताइवान रणनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ जाएगा।
प्रस्तावित सहयोग के बिंदु
खेदरूब थोंडुप ने ठोस सुझाव दिए हैं, जिनमें शामिल हैं: नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास, चीन की सैन्य गतिविधियों पर खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान, युद्ध की स्थिति में संयुक्त रसद व्यवस्था, दीर्घकालिक आकस्मिक योजनाएं और ऐसे कानूनी ढाँचे जो आवश्यकता पड़ने पर जापानी बलों को ताइवान की रक्षा में सहयोग करने की अनुमति दें।
थोंडुप के शब्दों में, "ताइवान अब केवल दूरस्थ सहयोगियों पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठा सकता। उसकी सुरक्षा जापान के साथ व्यावहारिक रक्षा साझेदारी पर टिकी है। वहीं जापान के लिए भी ताइवान की रक्षा करना अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा करने के समान है।"
चीन की तटरक्षक गश्त और ताइवान की प्रतिक्रिया
इस बीच, पिछले महीने ताइवान ने चीन के तटरक्षक बल द्वारा द्वीप के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में गश्त शुरू किए जाने की कड़ी आलोचना की। ताइवान के मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल (MAC) ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा करार दिया।
MAC ने स्पष्ट किया कि ताइवान के पूर्वी समुद्री क्षेत्र पर चीन का कोई संप्रभु, न्यायिक या कानून-प्रवर्तन अधिकार नहीं है। परिषद ने कहा, "किसी अवैध कार्रवाई को बार-बार दोहराने से वह वैध नहीं हो जाती और न ही उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलती है।"
ताइवान की कोस्ट गार्ड एडमिनिस्ट्रेशन (CGA) और अन्य सरकारी एजेंसियों को देश की संप्रभुता तथा समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। MAC ने यह भी कहा कि ताइवान अपने लोकतांत्रिक साझेदार देशों के साथ मिलकर समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखेगा और बल या दबाव से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बदलने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से विरोध करेगा।
आगे की राह
रिपोर्ट के अनुसार अस्पष्टता का दौर अब समाप्त हो चुका है — दोनों देशों को रक्षा सहयोग को एक नए और ठोस स्तर पर ले जाना होगा। जापान-ताइवान के बीच मजबूत रक्षा समझौते चीन के लिए किसी भी सैन्य कार्रवाई की कीमत और जोखिम को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा देंगे, जिससे उसकी आक्रामक रणनीति पर अंकुश लग सकता है।