18 अक्टूबर 2026
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ट्रंप का ईरान सैन्य कार्रवाई का बचाव: 'परमाणु हथियारों का खतरा था गंभीर, हस्तक्षेप जरूरी था'

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ट्रंप का ईरान सैन्य कार्रवाई का बचाव: 'परमाणु हथियारों का खतरा था गंभीर, हस्तक्षेप जरूरी था'

सारांश

ट्रंप ने केंटकी रैली में ईरान सैन्य कार्रवाई को अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया — दावा किया कि ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट हो चुकी है और कभी वापस नहीं आएगी। साथ ही वादा किया कि अभियान खत्म होते ही पेट्रोल सस्ता होगा।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अक्टूबर 2026 को नॉर्दर्न केंटकी यूनिवर्सिटी की रैली में ईरान पर सैन्य कार्रवाई का बचाव किया।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी अभियान से ईरान की परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता पूरी तरह नष्ट हो गई है।
कहा — "ईरान के पास न परमाणु हथियार है, न होगा, और कभी नहीं होगा।" ट्रंप ने सैन्य अभियान समाप्त होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में गिरावट का वादा किया।
उनकी सरकार ने सेना के लिए एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग उपलब्ध कराने का दावा किया।
ट्रंप ने पिछली अमेरिकी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास इस समस्या से निपटने की इच्छाशक्ति नहीं थी ।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अक्टूबर 2026 को केंटकी के नॉर्दर्न केंटकी यूनिवर्सिटी के ट्रूइस्ट एरिना में आयोजित एक रिपब्लिकन रैली में ईरान के खिलाफ की गई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जोरदार बचाव किया। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान के जरिए ईरान की परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता पूरी तरह नष्ट कर दी गई है। उन्होंने इसे अपने दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल की सबसे बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा उपलब्धि करार दिया।

ट्रंप का मुख्य तर्क: खतरा इतना गंभीर था कि हस्तक्षेप अनिवार्य था

ट्रंप ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि अगर उनके पास होगा तो वे उसका इस्तेमाल करेंगे।" उनके अनुसार, परमाणु सक्षम ईरान का खतरा इतना गंभीर था कि अमेरिका के पास हस्तक्षेप के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

राष्ट्रपति ने कहा कि सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ईरान का परमाणु ढाँचा पूरी तरह निशाना बनाया जाए। ट्रंप ने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह दोबारा वापस न आए।"

ऐतिहासिक संदर्भ और पिछली सरकारों पर निशाना

ट्रंप ने यह भी कहा कि इस समस्या का समाधान पहले की अमेरिकी सरकारों को बहुत पहले ही कर देना चाहिए था, लेकिन उनके पास इसके लिए जरूरी दृढ़ता और इच्छाशक्ति नहीं थी। गौरतलब है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम दशकों से अमेरिकी विदेश नीति के केंद्र में रहा है — 2015 में ओबामा प्रशासन ने जेसीपीओए (JCPOA) परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में रद्द कर दिया था।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में भू राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचे स्तर पर था और वैश्विक ऊर्जा बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे थे।

आर्थिक असर और ऊर्जा कीमतों का वादा

ट्रंप ने स्वीकार किया कि इस सैन्य अभियान के कारण अमेरिका को मध्य पूर्व पर अतिरिक्त ध्यान और संसाधन लगाने पड़े। हालाँकि, उनका कहना था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना किसी भी अल्पकालिक आर्थिक प्रभाव से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

ट्रंप ने दावा किया, "यह बहुत जल्दी खत्म होने वाला है" और अभियान समाप्त होने के बाद पेट्रोल की कीमतें पहले के मुकाबले और नीचे आ जाएंगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जब सैन्य अभियान की शुरुआत हुई, उस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे।

रक्षा खर्च और सैन्य शक्ति का दावा

ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा खर्च में की गई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस ने सेना के लिए एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग उपलब्ध कराई है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका के पास आज दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है।

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अभियान को अपनी अन्य विदेश नीति पहलों — जैसे वेनेजुएला और ग्रीनलैंड से जुड़े घटनाक्रमों — के साथ भी जोड़ा और इसे एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताया।

आगे क्या होगा

ट्रंप ने भाषण के अंत में दोहराया, "ईरान के पास न परमाणु हथियार है, न होगा, और कभी नहीं होगा। बात बिल्कुल साफ है।" अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पुनर्बहाली को रोकने के लिए किस दीर्घकालिक तंत्र को स्थापित करता है और मध्य पूर्व में स्थिरता लाने की दिशा में अगला कदम क्या होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि नीतिगत जवाबदेही के लिए। दावा कि ईरान की परमाणु क्षमता 'पूरी तरह नष्ट' हो गई है, स्वतंत्र सत्यापन के बिना महज एक राजनीतिक दावा है — अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) जैसी संस्थाओं की पुष्टि के बिना इसे तथ्य नहीं माना जा सकता। पेट्रोल सस्ता होने का वादा भी उतना ही अनिश्चित है, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा बाजार केवल एक देश की सैन्य कार्रवाई के इशारे पर नहीं चलते। असली सवाल यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पुनर्बहाली को रोकने के लिए अमेरिका के पास क्या दीर्घकालिक राजनयिक या सत्यापन तंत्र है — जो अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई का बचाव क्यों किया?
ट्रंप ने कहा कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान का खतरा इतना गंभीर था कि अमेरिका के लिए हस्तक्षेप करना अनिवार्य हो गया था। उनका दावा है कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो वह उनका इस्तेमाल करता।
ट्रंप ने ईरान की परमाणु क्षमता के बारे में क्या दावा किया?
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान के जरिए ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता पूरी तरह नष्ट कर दी गई है। उन्होंने कहा कि तेहरान को दोबारा यह क्षमता विकसित नहीं करने दी जाएगी।
ट्रंप ने ईरान अभियान के बाद पेट्रोल कीमतों के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने वादा किया कि सैन्य अभियान खत्म होने के बाद पेट्रोल की कीमतें पहले के मुकाबले और नीचे आ जाएंगी। हालाँकि, इस दावे का कोई विस्तृत आर्थिक विश्लेषण रैली में प्रस्तुत नहीं किया गया।
अमेरिका ने अपनी सेना के लिए कितनी फंडिंग दी है?
ट्रंप के अनुसार, उनकी सरकार और रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस ने सेना के लिए एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग उपलब्ध कराई है। उन्होंने इसे अमेरिकी सैन्य शक्ति की बहाली का प्रमाण बताया।
ट्रंप ने पिछली अमेरिकी सरकारों पर क्या आरोप लगाए?
ट्रंप ने कहा कि ईरान की परमाणु समस्या का समाधान पहले की अमेरिकी सरकारों को बहुत पहले ही कर देना चाहिए था, लेकिन उनके पास इसके लिए जरूरी दृढ़ता और इच्छाशक्ति नहीं थी। उन्होंने इसे अपनी सरकार की विशिष्ट उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया।
राष्ट्र प्रेस
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