ट्रंप की ईरान से युद्ध खत्म करने की शर्त: परमाणु हथियार न बनाने की पक्की गारंटी दो
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 अक्टूबर 2026 को कहा कि वॉशिंगटन ईरान में अपनी सैन्य भागीदारी तत्काल समाप्त करने को तैयार है — बशर्ते तेहरान यह पक्की गारंटी दे कि वह भविष्य में कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। जॉइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने यह बयान दिया, जो ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिकी रणनीति की दिशा पर एक अहम संकेत माना जा रहा है।
ट्रंप ने क्या कहा
ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम अभी वहां से निकल सकते हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में उनके पास परमाणु हथियार न हों — और हम यह सुनिश्चित करेंगे।' जब उनसे पूछा गया कि सैन्य अभियान के बावजूद वह जीत की घोषणा क्यों नहीं कर रहे, तो उन्होंने कहा कि खतरे को दोबारा पनपने से रोकना ज़रूरी है।
उन्होंने कहा, 'मुझे स्थिति को इसी तरह बनाए रखना है। मैं नहीं चाहता कि दो साल बाद फिर यही करना पड़े। हमें ऐसी गारंटी चाहिए कि भविष्य में उनके पास यह क्षमता न हो।'
सात महीने का सैन्य अभियान और नुकसान
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका सात महीनों से ईरान में इस संघर्ष में शामिल है। उन्होंने इसकी तुलना वियतनाम और अफगानिस्तान जैसे पुराने अमेरिकी युद्धों से की। उनके अनुसार इस अभियान में 18 अमेरिकी जवान मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।
ट्रंप ने कहा, 'हमारे कई लोग घायल हुए हैं, लेकिन हमने उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया है।' उन्होंने डोवर एयर फोर्स बेस पर शहीद सैनिकों के परिवारों से हुई मुलाकात का भी ज़िक्र किया और कहा कि ऐसे पल राष्ट्रपति पद की सबसे कठिन जिम्मेदारियों में से एक होते हैं।
ईरान की सैन्य क्षमता को नुकसान का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ने ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को 'काफी हद तक' नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक, ईरान की नौसेना, वायुसेना, रडार सिस्टम और कई निर्माण सुविधाओं को नष्ट कर दिया गया है। यह बयान उन्होंने टेनेसी के क्लार्क्सविल में दिए गए भाषण के बाद दिया, जहाँ उन्होंने इस सैन्य अभियान को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया था।
वैश्विक तेल बाजार पर असर की उम्मीद
ट्रंप ने संकेत दिया कि यह संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके खत्म होने से वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिलेगी। गौरतलब है कि ईरान, जो एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है, के साथ सैन्य तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान परमाणु संकट के कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कर रहा है। ट्रंप की शर्त — परमाणु क्षमता न रखने की सत्यापन-योग्य गारंटी — को व्यावहारिक रूप से लागू करने का तरीका अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो सकती हैं।