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ओबामा का ट्रंप की ईरान नीति पर हमला: 'युद्ध लड़े, अरबों खर्च किए, वापस वहीं आ गए'

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ओबामा का ट्रंप की ईरान नीति पर हमला: 'युद्ध लड़े, अरबों खर्च किए, वापस वहीं आ गए'

सारांश

ओबामा ने NBC पर ट्रंप की ईरान नीति को सीधे चुनौती दी — कहा कि अरबों डॉलर और अनगिनत जानें गँवाने के बाद अमेरिका वहीं खड़ा है जहाँ से शुरू हुआ था, बल्कि हालात और बिगड़े हैं। यह जेसीपीओए बनाम ट्रंप के 'अधिकतम दबाव' की बहस को फिर केंद्र में ले आता है।

मुख्य बातें

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 20 जून 2025 को एनबीसी साक्षात्कार में ट्रंप की ईरान नीति की कड़ी आलोचना की।
ओबामा ने कहा कि युद्ध में अरबों-खरबों डॉलर खर्च और जानें जाने के बाद भी अमेरिका उसी स्थिति में है, 'बल्कि शायद थोड़ी खराब।' 2015 के जेसीपीओए समझौते में ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति दी थी; ट्रंप ने 2018 में इसे रद्द किया।
ओबामा के अनुसार, समझौते से बाहर निकलने के बाद ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता और बढ़ाई।
ओबामा ने हालिया संघर्ष विराम का स्वागत किया, लेकिन उसकी दीर्घकालिक स्थिरता पर संदेह जताया।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 20 जून 2025 को एनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति की कड़ी आलोचना की और कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में शांति समझौता हुआ है और ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहे हैं।

ओबामा ने क्या कहा

शुक्रवार को प्रसारित एनबीसी साक्षात्कार में ओबामा ने कहा, 'हमने अब एक युद्ध लड़ा है, अरबों-खरबों डॉलर खर्च किए हैं, अपनी सेना पर भारी दबाव डाला है। बहुत से लोगों की जान गई है। और ऐसा लगता है कि हम वहीं वापस आ गए हैं जहाँ युद्ध शुरू करने से पहले थे, बल्कि शायद स्थिति उससे भी थोड़ी खराब हो गई है।'

हालाँकि ओबामा ने यह भी कहा कि वह संघर्ष विराम से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा, 'मैं युद्धविराम देखकर बहुत खुश हूँ और आशा करता हूँ कि यह बना रहेगा।'

जेसीपीओए और ट्रंप का फैसला

2015 में ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) नामक परमाणु समझौता किया था। 160 से अधिक पन्नों के इस दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु गतिविधियों पर अंकुश लगाना था। ओबामा के अनुसार, ईरान ने इस समझौते के तहत परमाणु हथियार विकसित न करने पर सहमति दी थी।

ओबामा ने कहा, 'ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने पर सहमति दी थी। इस प्रशासन ने उस समझौते से खुद को अलग कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को और बढ़ाया।' गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में इस समझौते को 'बेहद खराब' करार देते हुए अमेरिका को इससे अलग कर लिया था।

ट्रंप का रुख और आपसी टकराव

ट्रंप लगातार जेसीपीओए को 'ईरान को रिश्वत देने की कोशिश' बताते रहे हैं — जी7 समिट से लेकर अपने सोशल मीडिया मंच तक। वे अपने हालिया शांति समझौते को जेसीपीओए से बेहतर बताते हैं। यह ऐसे समय में है जब आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के जेसीपीओए से बाहर निकलने के बाद ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की।

ईरान नीति का व्यापक संदर्भ

यह विवाद केवल दो नेताओं के बीच का नहीं है — यह अमेरिकी विदेश नीति के दो परस्पर विरोधी दृष्टिकोणों का टकराव है। एक ओर बहुपक्षीय कूटनीति और औपचारिक समझौतों पर भरोसा, दूसरी ओर अधिकतम दबाव और द्विपक्षीय सौदे की रणनीति। ओबामा की आलोचना इस बात पर केंद्रित है कि जेसीपीओए से बाहर निकलने के बाद ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएँ बढ़ी हैं, जबकि ट्रंप का तर्क है कि उनका समझौता अधिक व्यापक और प्रभावी है।

आगे की राह

अमेरिका-ईरान के बीच हुए ताज़े शांति समझौते की स्थायित्व अभी अनिश्चित है। ओबामा ने उम्मीद जताई है कि संघर्ष विराम टिकेगा, लेकिन उनकी आलोचना यह संकेत देती है कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए किसी ठोस और सत्यापन-योग्य ढाँचे की ज़रूरत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के आँकड़ों से भी स्पष्ट है। लेकिन मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि ट्रंप का नया समझौता अभी सार्वजनिक रूप से पूरी तरह उजागर नहीं हुआ — इसलिए जेसीपीओए से तुलना अधूरी है। असली सवाल यह है कि क्या नए समझौते में परमाणु कार्यक्रम पर कोई सत्यापन-योग्य प्रतिबंध हैं, या यह केवल एक राजनीतिक घोषणा है। बिना इस जवाब के, दोनों पक्षों के दावे अधूरे हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओबामा ने ट्रंप की ईरान नीति पर क्या कहा?
ओबामा ने कहा कि अमेरिका ने युद्ध लड़ा, अरबों-खरबों डॉलर खर्च किए और कई जानें गँवाईं, लेकिन नतीजा यह है कि हालात युद्ध से पहले जैसे — या उससे भी बदतर — हो गए हैं। यह बयान उन्होंने 20 जून 2025 को एनबीसी को दिए साक्षात्कार में दिया।
जेसीपीओए (JCPOA) क्या था और ट्रंप ने इसे क्यों रद्द किया?
जेसीपीओए 2015 में ओबामा प्रशासन द्वारा ईरान के साथ किया गया 160 से अधिक पन्नों का परमाणु समझौता था, जिसके तहत ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति दी थी। ट्रंप ने 2018 में इसे 'बेहद खराब' बताते हुए अमेरिका को इससे अलग कर लिया।
क्या ओबामा ने अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम का समर्थन किया?
हाँ, ओबामा ने कहा कि वे युद्धविराम देखकर खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि यह बना रहेगा। लेकिन साथ ही उन्होंने ट्रंप नीति के कारण हुई स्थिति पर गहरी चिंता भी जताई।
जेसीपीओए रद्द होने के बाद ईरान की परमाणु क्षमता पर क्या असर पड़ा?
ओबामा के अनुसार, समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता और बढ़ाई। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी यह दर्ज है कि ईरान ने उस दौरान यूरेनियम संवर्धन की गति तेज़ की।
ट्रंप और ओबामा के बीच ईरान नीति पर यह विवाद क्यों अहम है?
यह विवाद अमेरिकी विदेश नीति के दो परस्पर विरोधी दृष्टिकोणों को उजागर करता है — बहुपक्षीय कूटनीति बनाम अधिकतम दबाव की रणनीति। इसका असर न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों पर, बल्कि पश्चिम एशिया की व्यापक स्थिरता पर भी पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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