ट्रंप का दावा: ईरान के खिलाफ ओबामा ने सेना का सही इस्तेमाल नहीं किया, 'अमेरिका वापस लौट आया'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जून को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक के बाद एक पोस्ट कर पूर्व राष्ट्रपतियों बराक ओबामा और जो बाइडेन पर तीखे हमले किए। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ उनकी सरकार ने वह सैन्य सफलता हासिल की, जो पिछले प्रशासनों में संभव नहीं हुई। उन्होंने अपनी पोस्ट का अंत 'अमेरिका वापस लौट आया है' कहकर किया।
ओबामा और बाइडेन पर सीधा निशाना
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'कट्टर वामपंथी और डेमोक्रेट्स अब देख सकते हैं कि ईरान के खिलाफ हमने युद्ध में कितनी बड़ी सफलता हासिल की है। ईरान सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित हो चुका है।' उन्होंने ओबामा पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान को अरबों डॉलर नकद दिए, किंतु अमेरिकी सेना का उचित उपयोग नहीं किया। पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन को उन्होंने 'स्लीपी' कहते हुए कहा, 'ईरान उन्हें एक कमज़ोर नेता मानता था और इस मामले में वो सौ फ़ीसदी सही हैं।'
ओबामा के इंटरव्यू की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब शुक्रवार रात एनबीसी न्यूज़ पर प्रसारित एक इंटरव्यू में ओबामा ने ट्रंप के हालिया शांति समझौते को पिछले जेपीसीओए (JCPOA) समझौते से बदतर करार दिया था। गौरतलब है कि ट्रंप की ये पोस्टें उसी इंटरव्यू के जवाब में आई प्रतीत होती हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान 47 वर्षों तक जवाबदेही से बचता रहा, लेकिन उनके सत्ता में आने के बाद स्थिति बदल गई।
मेलोनी पर हमला और नाटो का संदर्भ
ट्रंप ने एक अलग पोस्ट में इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता घट रही है, जिसकी एक वजह यह है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में साथ नहीं दिया। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका हर वर्ष नाटो सहयोगियों की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, फिर भी मेलोनी ने अमेरिका को इटली के हवाई अड्डों और रनवे के उपयोग की अनुमति नहीं दी।
ट्रंप का व्यंग्य: जीत के बाद करीबी दिखाने की कोशिश
ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका ने ईरान को परास्त कर दिया है, तो अब मेलोनी मशहूर होने के लिए अमेरिका के साथ निकटता दिखाना चाहती हैं। उन्होंने जी7 में मेलोनी के उस आग्रह का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने ट्रंप से एक तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई थी।
आगे क्या
ट्रंप की इन पोस्टों ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। डेमोक्रेट्स और विदेश नीति विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया अपेक्षित है, जबकि ईरान के साथ तथाकथित शांति समझौते की शर्तों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र बनी हुई है।