ट्रंप की वित्तीय रिपोर्ट में कूपांग के 18 शेयर ट्रेड का खुलासा, दक्षिण कोरिया विवाद के बीच सवाल
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मनी मैनेजर्स ने अक्टूबर 2024 से मई 2025 के बीच न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध दक्षिण कोरियाई ई-कॉमर्स कंपनी कूपांग (Coupang) के शेयरों में 18 बार खरीद-बिक्री की। यह खुलासा अमेरिकी ऑफिस ऑफ गवर्नमेंट एथिक्स (OGE) में दाखिल तीन वित्तीय खुलासा (फाइनेंशियल डिस्क्लोजर) रिपोर्टों से हुआ है। विशेष रूप से यह ट्रेडिंग उस दौर में हुई जब कूपांग के डेटा ब्रीच मामले में दक्षिण कोरिया की नियामकीय जाँच को लेकर सोल और वाशिंगटन के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर था।
कितने और कब-कब हुए लेनदेन
वित्तीय खुलासा रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने 9 अक्टूबर 2024 को दो अलग-अलग लेनदेन में कूपांग के शेयर खरीदे — पहले $1,001 से $15,000 के बीच और फिर उसी दिन $50,001 से $1,00,000 के बीच के शेयर। इसके बाद 16 अक्टूबर को उन्होंने $1,001 से $15,000 के बीच और शेयर खरीदे, जबकि उसी दिन $15,001 से $50,000 के बीच के शेयर बेचे भी।
11 दिसंबर को दो खरीद लेनदेन हुए — एक $1,001 से $15,000 और दूसरा $50,001 से $1,00,000 के बीच। 18 दिसंबर को $1,001 से $15,000 के बीच और शेयर खरीदे गए। बिक्री के मोर्चे पर, 10 नवंबर और 17 नवंबर को भी कूपांग के शेयर बेचे गए।
वर्ष 2025 में भी यह सिलसिला जारी रहा। 12 जनवरी को दो बिक्री लेनदेन हुए, 21 जनवरी को एक और। 12 फरवरी को दो खरीद लेनदेन दर्ज हुए — एक $1,00,001 से $2,50,000 के बीच और दूसरा $1,001 से $15,000 के बीच। 23 फरवरी को भी खरीद हुई। अंत में 18 मई और 22 मई 2025 को शेयर बेचे गए।
कूपांग में अनुमानित निवेश राशि
रिपोर्टों में लेनदेन की सटीक राशि नहीं, बल्कि मूल्य सीमा (रेंज) दर्शाई जाती है। इन आँकड़ों के आधार पर अनुमान है कि ट्रंप के पास कूपांग के अधिकतम $1,30,000 (लगभग ₹1.08 करोड़) तक के शेयर रहे होंगे। 2025 की वित्तीय फाइलिंग से यह भी संकेत मिलता है कि इन ट्रेड से उन्हें या तो कोई आय नहीं हुई या बेहद मामूली कमाई हुई।
दक्षिण कोरिया विवाद से संबंध
यह ट्रेडिंग गतिविधि उस पृष्ठभूमि में हुई जब दक्षिण कोरियाई नियामक कूपांग के एक बड़े डेटा ब्रीच की जाँच कर रहे थे। अमेरिका की ओर से इस जाँच की आलोचना हुई — हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी की एक स्टाफ रिपोर्ट और व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इसे कथित तौर पर 'भेदभावपूर्ण' करार दिया। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति के शेयर लेनदेन और इस राजनयिक दबाव के बीच के समय का संयोग सवाल खड़े करता है।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
इस मामले पर टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का व्हाइट हाउस ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए वित्तीय खुलासा रिपोर्ट दाखिल करना कानूनी बाध्यता है, परंतु इन रिपोर्टों में केवल मूल्य सीमा दर्शाई जाती है, सटीक आँकड़े नहीं।
आगे क्या हो सकता है
यह मामला अमेरिकी राजनीति में 'हितों के टकराव' (conflict of interest) की बहस को नए सिरे से हवा दे सकता है। कांग्रेस के कुछ सदस्य पहले ही राष्ट्रपति के व्यक्तिगत निवेश और विदेश नीति निर्णयों के बीच पारदर्शिता की माँग उठा चुके हैं। यह देखना होगा कि क्या OGE या कांग्रेस की कोई समिति इस मामले की औपचारिक जाँच शुरू करती है।