क्या ट्रंप ने कहा, 'मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं' और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया?
सारांश
Key Takeaways
- ट्रंप का बयान अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी करता है।
- ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार की अत्यावश्यकता है।
- अमेरिका का एकतरफा रवैया चिंताजनक है।
- 93.5 प्रतिशत लोग अमेरिका की नीति से असहमत हैं।
- अंतरराष्ट्रीय संगठनों से वापसी एक नया रिकॉर्ड है।
बीजिंग, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है।"
यह बयान वेनेजुएला पर अमेरिकी सेना के हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की जबरन गिरफ्तारी के बाद आया है। यह बयान अमेरिका के एकतरफा और वर्चस्ववादी रवैये को पूरी तरह से दर्शाता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने टिप्पणी की कि अमेरिकी वर्चस्व को मजबूत करने के लिए सैन्य, आर्थिक या राजनीतिक शक्ति के किसी भी साधन का उपयोग करने की अपनी स्वतंत्रता के बारे में ट्रंप का यह आकलन, उनके वैश्विक दृष्टिकोण की अब तक की सबसे स्पष्ट स्वीकारोक्ति है।
सीजीटीएन द्वारा किए गए एक वैश्विक जनमत सर्वेक्षण में, 93.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अमेरिका ने एकतरफा नीति अपनाकर खुद को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विरोध में खड़ा कर लिया है। साथ ही, 91.7 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार करना एक अत्यावश्यक प्राथमिकता है।
इससे ठीक एक दिन पहले, अमेरिका ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपनी वापसी की घोषणा की, जो बहुपक्षीय प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने का एक नया रिकॉर्ड है। ये संगठन जलवायु, ऊर्जा और वैश्विक शासन सहित कई क्षेत्रों से जुड़े हैं। ट्रंप का तर्क है कि इन संगठनों का संचालन अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और आर्थिक समृद्धि के विपरीत है।
इसके जवाब में 84.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अमेरिका के इस कदम पर कोई हैरानी नहीं जताई। वहीं, 88.9 प्रतिशत ने इसे 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत उठाया गया एक और कट्टरपंथी कदम माना।
इसके अलावा, 93 प्रतिशत का मानना था कि अमेरिका का अंतरराष्ट्रीय प्रणालियों का लाभ होने पर उपयोग करना और लाभ न होने पर उन्हें छोड़ देना, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक निष्पक्षता एवं न्याय को गंभीर रूप से कमजोर करता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)