झारखंड शराब घोटाले में एसीबी की बड़ी सफलता: गोवा से रांची तक लुका-छिपी के बाद गिरफ्तार हुए मास्टरमाइंड नवीन केडिया
सारांश
Key Takeaways
- नवीन केडिया की गिरफ्तारी ने झारखंड शराब घोटाले में महत्वपूर्ण मोड़ लाया।
- एसीबी की जांच ने दिखाया कि घोटाला छत्तीसगढ़ से संचालित हो रहा था।
- झारखंड में शराब के कारोबार में फर्जी कंपनियों का बड़ा हाथ था।
- घोटाले में शामिल प्रभावशाली व्यक्तियों की गिरफ्तारी जारी है।
- सरकार को इस घोटाले के माध्यम से 129.55 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
रांची, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के चर्चित शराब घोटाले के प्रमुख संदिग्धों में से एक, छत्तीसगढ़ के दुर्ग का निवासी नवीन केडिया, आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आया है। उसे रांची से पकड़ा गया है। घोटाले की जांच कर रहे एंटी करप्शन ब्यूरो अब केडिया को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ करने की योजना बना रहे हैं, ताकि घोटाले की गहराइयों को और उजागर किया जा सके।
नवीन केडिया की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। पहले, 7 जनवरी को एसीबी की टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर उसे गोवा से गिरफ्तार किया था। वहां की अदालत ने उसे कुछ शर्तों के साथ 12 जनवरी तक रांची में सरेंडर करने के लिए ट्रांजिट बेल दी थी। लेकिन केडिया ने कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए फिर से फरार हो गया।
उसने बाद में एसीबी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। निरंतर चकमा दे रहे केडिया को पकड़ने के लिए एसीबी की विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही थी। एसीबी की जांच के अनुसार, पूरा घोटाला एक सिंडिकेट द्वारा छत्तीसगढ़ से संचालित किया जा रहा था। छत्तीसगढ़ एसीबी की जांच के दौरान एक कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया के ठिकाने से मिली डायरी ने झारखंड के इस संगठित खेल का पर्दाफाश किया।
इस डायरी में झारखंड के शराब बाजार को नियंत्रित करने, विरोधियों को रास्ते से हटाने, और सिंडिकेट के प्रबंधन की पूरी रणनीति दर्ज थी। जांच में यह भी सामने आया कि शराब दुकानों के संचालन के लिए जिन सात प्लेसमेंट कंपनियों को ठेका दिया गया, उन्होंने न केवल टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि उनकी बैंक गारंटी भी फर्जी पाई गई। झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने फर्जीवाड़े के जरिए सरकार को लगभग 129.55 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान पहुंचाया।
अब तक इस मामले में पूर्व आईएएस विनय कुमार चौबे, रिटायर्ड आईएएस अमित प्रकाश, और कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया समेत कई प्रभावशाली व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नवीन केडिया की गिरफ्तारी इस केस में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है, क्योंकि वह मैनपावर सप्लाई और सिंडिकेट के प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।