ट्रंप-विरोधी 'नो किंग्स' रैलियाँ: अमेरिका के दर्जनों शहरों में हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के लॉस एंजिलिस, डैलस, लुइसविले सहित दर्जनों प्रमुख शहरों में 18 अक्टूबर 2026 को हज़ारों लोग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सरकार की नीतियों के विरोध में सड़कों पर उतरे। ये प्रदर्शन 'नो किंग्स' अभियान के तहत आयोजित किए गए, जिसका घोषित उद्देश्य नागरिकों को आगामी मध्यावधि चुनावों में जल्दी मतदान के लिए प्रोत्साहित करना भी था।
प्रदर्शन का केंद्र और स्वरूप
लुइसविले के सेंट मैथ्यूज इलाके में फ्रैंकफोर्ट एवेन्यू पर शनिवार दोपहर 'नो किंग्स' प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। केंटुकियाना रेजिंग ग्रैनीज और ग्रंपी ग्रैम्पीज जैसे समूहों के सदस्यों ने ट्रंप-विरोधी गाने गाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उल्लेखनीय रहा कि इसी भीड़ के बीच से 'ट्रंप 2028' का झंडा लिए एक अकेले ट्रंप-समर्थक ने भी गुज़रने की कोशिश की।
'नो किंग्स' अभियान की व्यापकता
'नो किंग्स' समूह ने देशभर में तीन हज़ार से अधिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। 'नो किंग्स: वोट अर्ली' नाम से संगठित इन आयोजनों को आधिकारिक तौर पर 'गैर-पक्षपातपूर्ण' बताया गया है। गौरतलब है कि ये आयोजन ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के विरोध में पिछले लगभग दो वर्षों से जारी 'नो किंग्स' मार्चों और प्रदर्शनों की ही एक निरंतरता हैं।
मध्यावधि चुनावों से जुड़ाव
आयोजकों के अनुसार, इन रैलियों का एक प्रमुख लक्ष्य मतदाताओं को जल्दी मतदान (अर्ली वोटिंग) के प्रति जागरूक करना है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में मध्यावधि चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो रही है और ट्रंप की नीतियों पर जन-बहस का दायरा व्यापक होता जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि 'गैर-पक्षपातपूर्ण' का दावा करने के बावजूद ये रैलियाँ स्वाभाविक रूप से ट्रंप-विरोधी मतदाता लामबंदी का काम कर रही हैं।
आगे क्या
'नो किंग्स' समूह की ओर से देशभर में आगामी हफ्तों में और बड़े प्रदर्शनों की योजना बताई जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह जन-उभार मध्यावधि चुनावों में मतदान प्रतिशत को प्रभावित करता है, जो अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक निर्णायक संकेत होगा।