12 जुलाई 2026
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ब्रिटेन ने रूस पर 18 कंपनियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए, रूसी दूतावास ने कहा — 'पाबंदियाँ बेकार हैं'

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ब्रिटेन ने रूस पर 18 कंपनियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए, रूसी दूतावास ने कहा — 'पाबंदियाँ बेकार हैं'

सारांश

ब्रिटेन ने रूस के क्रिप्टो-आधारित 'ए7 नेटवर्क' समेत 18 कंपनियों पर तत्काल प्रभाव से बैन लगाया — जो कथित तौर पर सालाना 90 बिलियन डॉलर ट्रांसफर करता है। रूसी दूतावास ने पलटवार करते हुए इन पाबंदियों को 'बेकार' बताया और कहा कि इनका नुकसान ब्रिटेन को खुद उठाना पड़ेगा।

मुख्य बातें

ब्रिटेन ने 26 मई को रूस के विरुद्ध 18 कंपनियों पर नए प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू किए।
प्रतिबंध क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और ए7 नेटवर्क को निशाना बनाते हैं, जो कथित तौर पर रूस के सैन्य खर्च का वित्तपोषण करता है।
ए7 नेटवर्क ने दावा किया है कि पिछले वर्ष उसने 90 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि हस्तांतरित की।
विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि ब्रिटेन अपनी प्रतिबंध रणनीति को अद्यतन कर रूस की 'युद्ध अर्थव्यवस्था' पर सीधा प्रहार कर रहा है।
लंदन स्थित रूसी दूतावास ने प्रतिबंधों को 'बेकार' बताया और कहा कि इनका सबसे अधिक नुकसान ब्रिटेन के नागरिकों व व्यवसायों को होगा।

ब्रिटेन ने मंगलवार, 26 मई को रूस के विरुद्ध नए प्रतिबंधों का ऐलान करते हुए 18 कंपनियों पर बैन लगा दिया, जिन पर आरोप है कि वे रूस के वित्तीय ढाँचे को सहारा देकर यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को वित्तपोषित करती हैं। लंदन स्थित रूसी दूतावास ने इन प्रतिबंधों को तुरंत 'बेकार' करार दिया और कहा कि ब्रिटिश अधिकारी इस सच्चाई को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं।

प्रतिबंधों में क्या शामिल है

ब्रिटेन सरकार की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नए प्रतिबंध क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और 'ए7 नेटवर्क' को निशाना बनाते हैं। सरकार का कहना है कि यह नेटवर्क क्रेमलिन-समर्थित प्रणाली है, जिसे पश्चिमी देशों के मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार करने, सैन्य खरीद को वित्तपोषित करने और तेल बिक्री से प्राप्त धनराशि को यूक्रेन-विरोधी अभियानों में लगाने के लिए तैयार किया गया है। विज्ञप्ति के मुताबिक, ए7 नेटवर्क ने दावा किया है कि पिछले वर्ष उसने 90 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि हस्तांतरित की — जो रूस के वार्षिक सैन्य बजट का लगभग आधा है। ये बैन तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

ब्रिटिश विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा, "अगर क्रेमलिन को लगता है कि वह क्रिप्टो नेटवर्क और शैडो फाइनेंशियल सिस्टम के पीछे छिपकर हमारे बैन से बच सकता है, तो वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन अपनी रणनीति को अद्यतन कर रहा है और उस बुनियादी ढाँचे पर सीधा प्रहार कर रहा है जो रूस की 'युद्ध अर्थव्यवस्था' को जीवित रखता है — ठीक उस समय जब यूक्रेन युद्ध के मैदान में दबाव बढ़ा रहा है।

रूसी दूतावास का पलटवार

लंदन स्थित रूसी दूतावास ने इन प्रतिबंधों को 'गैर-कानूनी पाबंदियाँ' बताते हुए कहा कि ब्रिटिश अधिकारी इस स्पष्ट तथ्य को मानने से इनकार कर रहे हैं कि रूस-विरोधी प्रतिबंध अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहे। दूतावास ने कहा कि "हमारा देश लंबे समय से बाहरी दबाव के अनुसार खुद को ढालता आया है और लंदन की इच्छा के अनुसार अपना मार्ग नहीं बदलेगा। इन बढ़ती पाबंदियों का सबसे पहला और सबसे अधिक असर ब्रिटेन के नागरिकों, व्यवसायों और उसकी अंतरराष्ट्रीय साख पर पड़ेगा।"

दूतावास ने यह भी कहा कि "ब्रिटिश अधिकारी दूसरों पर 'अपारदर्शी वित्तीय तंत्र' इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हैं, जबकि स्थानीय राजनीतिक वर्ग को मिलने वाले बड़े क्रिप्टोकरेंसी दान को अनदेखा करते हैं। शायद 'शैडो स्कीम' के विरुद्ध लड़ाई वेस्टमिंस्टर से शुरू होनी चाहिए, बिश्केक या त्बिलिसी से नहीं।"

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को लेकर आंतरिक बहस का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि रूस ने 2022 से अब तक कई दौर के पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपनी सैन्य गतिविधियाँ जारी रखी हैं, और आलोचकों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी व समानांतर वित्तीय नेटवर्क इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। ब्रिटेन का यह कदम इसी खामी को बंद करने का प्रयास है।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टो-आधारित प्रतिबंध-उल्लंघन नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अन्य पश्चिमी देश इस कदम के साथ कितनी तेज़ी से तालमेल बिठाते हैं। फिलहाल, रूस ने संकेत दिया है कि वह अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर ज़रूरी स्वीकृति है। असली सवाल यह है कि क्या अकेले ब्रिटेन की कार्रवाई उस नेटवर्क को बाधित कर सकती है जो कथित तौर पर सालाना 90 बिलियन डॉलर संभालता है, जब तक अमेरिका और यूरोपीय संघ समान कदम नहीं उठाते। रूसी दूतावास का 'वेस्टमिंस्टर में क्रिप्टो दान' वाला पलटवार राजनयिक शोर है, लेकिन यह उस व्यापक बहस को उजागर करता है जो पश्चिमी देशों में भी चल रही है। प्रतिबंधों की विश्वसनीयता तब तय होगी जब यह स्पष्ट होगा कि ए7 नेटवर्क वाकई बाधित हुआ या बस नए रूप में उभर आया।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिटेन ने रूस पर नए प्रतिबंध क्यों लगाए?
ब्रिटेन ने रूस के उस वित्तीय ढाँचे को निशाना बनाने के लिए 18 कंपनियों पर बैन लगाया जो कथित तौर पर मौजूदा पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करके यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध को वित्तपोषित करता है। सरकार का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क इस उल्लंघन का प्रमुख माध्यम बन गए हैं।
ए7 नेटवर्क क्या है और इसे क्यों बैन किया गया?
ब्रिटेन सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ए7 नेटवर्क एक क्रेमलिन-समर्थित प्रणाली है जिसे पश्चिमी प्रतिबंधों को बायपास करने, सैन्य खरीद को वित्तपोषित करने और तेल बिक्री से प्राप्त धन को यूक्रेन-विरोधी अभियानों में लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नेटवर्क ने खुद दावा किया है कि पिछले वर्ष उसने 90 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि हस्तांतरित की।
रूसी दूतावास ने इन प्रतिबंधों पर क्या कहा?
लंदन स्थित रूसी दूतावास ने इन प्रतिबंधों को 'बेकार' और 'गैर-कानूनी' बताया। दूतावास ने कहा कि रूस बाहरी दबाव में अपनी नीति नहीं बदलेगा और इन पाबंदियों का सबसे अधिक नुकसान ब्रिटेन के अपने नागरिकों, व्यवसायों और अंतरराष्ट्रीय साख को होगा।
ये नए प्रतिबंध कब से लागू हुए?
ब्रिटेन सरकार ने घोषणा की कि ये प्रतिबंध 26 मई को ऐलान के साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गए। इनमें क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और ए7 नेटवर्क से जुड़ी 18 कंपनियाँ शामिल हैं।
क्या ये प्रतिबंध रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिबंधों की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अन्य पश्चिमी देश कितनी तेज़ी से इसी दिशा में कदम उठाते हैं। विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा है कि ब्रिटेन अपनी रणनीति को अद्यतन कर रहा है, लेकिन रूस ने संकेत दिया है कि वह अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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