ब्रिटेन ने रूस पर 18 कंपनियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए, रूसी दूतावास ने कहा — 'पाबंदियाँ बेकार हैं'
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटेन ने मंगलवार, 26 मई को रूस के विरुद्ध नए प्रतिबंधों का ऐलान करते हुए 18 कंपनियों पर बैन लगा दिया, जिन पर आरोप है कि वे रूस के वित्तीय ढाँचे को सहारा देकर यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को वित्तपोषित करती हैं। लंदन स्थित रूसी दूतावास ने इन प्रतिबंधों को तुरंत 'बेकार' करार दिया और कहा कि ब्रिटिश अधिकारी इस सच्चाई को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं।
प्रतिबंधों में क्या शामिल है
ब्रिटेन सरकार की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नए प्रतिबंध क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और 'ए7 नेटवर्क' को निशाना बनाते हैं। सरकार का कहना है कि यह नेटवर्क क्रेमलिन-समर्थित प्रणाली है, जिसे पश्चिमी देशों के मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार करने, सैन्य खरीद को वित्तपोषित करने और तेल बिक्री से प्राप्त धनराशि को यूक्रेन-विरोधी अभियानों में लगाने के लिए तैयार किया गया है। विज्ञप्ति के मुताबिक, ए7 नेटवर्क ने दावा किया है कि पिछले वर्ष उसने 90 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि हस्तांतरित की — जो रूस के वार्षिक सैन्य बजट का लगभग आधा है। ये बैन तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
ब्रिटिश विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा, "अगर क्रेमलिन को लगता है कि वह क्रिप्टो नेटवर्क और शैडो फाइनेंशियल सिस्टम के पीछे छिपकर हमारे बैन से बच सकता है, तो वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन अपनी रणनीति को अद्यतन कर रहा है और उस बुनियादी ढाँचे पर सीधा प्रहार कर रहा है जो रूस की 'युद्ध अर्थव्यवस्था' को जीवित रखता है — ठीक उस समय जब यूक्रेन युद्ध के मैदान में दबाव बढ़ा रहा है।
रूसी दूतावास का पलटवार
लंदन स्थित रूसी दूतावास ने इन प्रतिबंधों को 'गैर-कानूनी पाबंदियाँ' बताते हुए कहा कि ब्रिटिश अधिकारी इस स्पष्ट तथ्य को मानने से इनकार कर रहे हैं कि रूस-विरोधी प्रतिबंध अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहे। दूतावास ने कहा कि "हमारा देश लंबे समय से बाहरी दबाव के अनुसार खुद को ढालता आया है और लंदन की इच्छा के अनुसार अपना मार्ग नहीं बदलेगा। इन बढ़ती पाबंदियों का सबसे पहला और सबसे अधिक असर ब्रिटेन के नागरिकों, व्यवसायों और उसकी अंतरराष्ट्रीय साख पर पड़ेगा।"
दूतावास ने यह भी कहा कि "ब्रिटिश अधिकारी दूसरों पर 'अपारदर्शी वित्तीय तंत्र' इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हैं, जबकि स्थानीय राजनीतिक वर्ग को मिलने वाले बड़े क्रिप्टोकरेंसी दान को अनदेखा करते हैं। शायद 'शैडो स्कीम' के विरुद्ध लड़ाई वेस्टमिंस्टर से शुरू होनी चाहिए, बिश्केक या त्बिलिसी से नहीं।"
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को लेकर आंतरिक बहस का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि रूस ने 2022 से अब तक कई दौर के पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपनी सैन्य गतिविधियाँ जारी रखी हैं, और आलोचकों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी व समानांतर वित्तीय नेटवर्क इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। ब्रिटेन का यह कदम इसी खामी को बंद करने का प्रयास है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टो-आधारित प्रतिबंध-उल्लंघन नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अन्य पश्चिमी देश इस कदम के साथ कितनी तेज़ी से तालमेल बिठाते हैं। फिलहाल, रूस ने संकेत दिया है कि वह अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।