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अमेरिका ने ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज 'नोबिटेक्स' समेत 4 कंपनियों, 4 लोगों पर लगाए प्रतिबंध

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अमेरिका ने ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज 'नोबिटेक्स' समेत 4 कंपनियों, 4 लोगों पर लगाए प्रतिबंध

सारांश

अमेरिका ने ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज 'नोबिटेक्स' सहित बिटपिन, रामजिनेक्स और वैलेक्स पर प्रतिबंध लगाकर कूटनीति और दबाव — दोनों मोर्चे एक साथ खोल दिए हैं। ट्रंप के 'इकोनॉमिक फ्यूरी' अभियान का यह नया अध्याय बताता है कि वॉशिंगटन अब डिजिटल वित्तीय ढाँचे को भी प्रतिबंधों के दायरे में खींच रहा है।

मुख्य बातें

अमेरिकी OFAC ने ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज 'नोबिटेक्स' समेत 4 कंपनियों और 4 व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए।
प्रतिबंधित कंपनियों में नोबिटेक्स , बिटपिन , रामजिनेक्स और वैलेक्स शामिल हैं।
यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'इकोनॉमिक फ्यूरी' अभियान का हिस्सा बताई गई।
पिछले सप्ताह तेहरान और वॉशिंगटन के बीच होर्मुज स्ट्रेट पुनः खोलने को लेकर शुरुआती समझ बनी थी।
ट्रंप ने कहा — “मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बातचीत खत्म हुई या नहीं।”

अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और तेज़ करते हुए उसके सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 'नोबिटेक्स' समेत चार कंपनियों और इनसे जुड़े चार व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने मंगलवार को इन प्रतिबंधों की घोषणा की, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'इकोनॉमिक फ्यूरी' अभियान का हिस्सा बताया गया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक बातचीत के प्रयास जारी हैं।

प्रतिबंधों के दायरे में कौन

रिपोर्टों के अनुसार, OFAC की सूची में जोड़े गए चारों व्यक्ति ईरान के सबसे बड़े डिजिटल एसेट एक्सचेंज 'नोबिटेक्स' से जुड़े बताए गए हैं। इसके अलावा वित्तीय और क्रिप्टो सेवाओं के क्षेत्र में सक्रिय तीन अन्य कंपनियाँ — बिटपिन, रामजिनेक्स और वैलेक्स — भी प्रतिबंधों के दायरे में लाई गई हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा कि ये एक्सचेंज ईरान से कथित खतरे का मुकाबला करने की व्यापक रणनीति के तहत निशाने पर लिए गए हैं।

'इकोनॉमिक फ्यूरी' अभियान का हिस्सा

वित्त मंत्रालय ने ईरान के विरुद्ध पहले से लगाए जाते रहे आरोपों को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के 'इकोनॉमिक फ्यूरी' अभियान के तहत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य कथित तौर पर ईरान की वित्तीय व्यवस्था पर दबाव बनाना और डिजिटल एसेट्स के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर अंकुश लगाना बताया जा रहा है।

कूटनीतिक बातचीत के बीच कड़ा संदेश

गौरतलब है कि ये नए प्रतिबंध उस समय लगाए गए हैं जब ट्रंप प्रशासन तेहरान के साथ किसी समझौते तक पहुँचने की कोशिश में जुटा है। रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य कार्रवाई के ज़रिए अपने उद्देश्यों को हासिल करने में असफल रहने के बाद अमेरिका कूटनीतिक रास्ते पर लौटा है। पिछले सप्ताह तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक शुरुआती समझ बनी थी, जिसके तहत होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह फिर से खोलने के बदले अमेरिका ईरान पर समुद्री दबाव को धीरे-धीरे कम करने को तैयार बताया गया था।

ट्रंप का दो-टूक बयान

वार्ता विफल होने की अटकलों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें इस बात की कोई खास चिंता नहीं है कि ईरान बातचीत रोक सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान के साथ बातचीत खत्म हो गई है, ट्रंप ने कहा, “सच कहूं तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बातचीत खत्म हुई या नहीं। मुझे बिल्कुल परवाह नहीं है।”

आगे क्या

विश्लेषकों का कहना है कि क्रिप्टो एक्सचेंजों पर सीधी कार्रवाई दर्शाती है कि अमेरिका अब केवल पारंपरिक बैंकिंग चैनलों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढाँचे को भी प्रतिबंधों की परिधि में ला रहा है। आने वाले हफ्तों में तेहरान की प्रतिक्रिया और बातचीत की दिशा पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर 'इकोनॉमिक फ्यूरी' से दबाव बढ़ा रहा है — यह 'मैक्सिमम प्रेशर 2.0' का परिचित खाका है, जो 2018-19 में भी आज़माया जा चुका है। होर्मुज को लेकर बनी शुरुआती समझ अब इन प्रतिबंधों की छाया में परखी जाएगी। असली सवाल यह है कि क्या ईरान को बातचीत की मेज़ पर रखने और उसकी अर्थव्यवस्था पर शिकंजा कसने — दोनों एक साथ टिकाऊ रूप से संभव हैं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने ईरान के किन क्रिप्टो एक्सचेंजों पर प्रतिबंध लगाए हैं?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के OFAC ने ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज 'नोबिटेक्स' सहित बिटपिन, रामजिनेक्स और वैलेक्स पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसके साथ ही इन एक्सचेंजों से जुड़े चार व्यक्तियों को भी प्रतिबंध सूची में जोड़ा गया है।
'इकोनॉमिक फ्यूरी' अभियान क्या है?
यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में चलाया जा रहा अमेरिकी आर्थिक दबाव अभियान है, जिसका उद्देश्य ईरान से कथित खतरे का मुकाबला करना बताया गया है। इसके तहत ईरान की वित्तीय और डिजिटल एसेट संरचनाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
ये प्रतिबंध बातचीत के बीच क्यों लगाए गए हैं?
ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ समझौते की कोशिश के साथ-साथ आर्थिक दबाव बनाए रखने की दोहरी रणनीति पर चल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य कार्रवाई से उद्देश्य हासिल न होने के बाद यह कूटनीतिक-आर्थिक संयोजन अपनाया जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्या समझ बनी थी?
रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक शुरुआती समझ बनी थी, जिसके तहत होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह फिर से खोलने के बदले अमेरिका ईरान पर समुद्री दबाव को धीरे-धीरे कम करने पर सहमत बताया गया था।
क्या ईरान-अमेरिका बातचीत समाप्त हो गई है?
आधिकारिक तौर पर बातचीत समाप्त होने की पुष्टि नहीं हुई है, हालाँकि अटकलें तेज़ हैं। ट्रंप ने स्वयं कहा है कि उन्हें इस बात की 'बिल्कुल परवाह नहीं' है कि बातचीत जारी रहती है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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