संयुक्त राष्ट्र ने 12 देशों में मानवीय संकट के लिए $169 मिलियन जारी किए, 8.7 करोड़ लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के सेंट्रल इमरजेंसी रिस्पॉन्स फंड (CERF) ने गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहे 12 देशों और क्षेत्रों में जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने के लिए $169 मिलियन (लगभग ₹1,400 करोड़) की आपातकालीन धनराशि जारी की है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने 3 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। यह फंडिंग इस वर्ष सबसे गंभीर मानवीय आवश्यकताओं का सामना कर रहे 8.7 करोड़ लोगों तक राहत पहुँचाने के व्यापक वैश्विक प्रयास का अंग है।
किन देशों को मिलेगी सहायता
ओसीएचए के अनुसार, $150 मिलियन की राशि अफगानिस्तान, बुर्किना फासो, कैमरून, चाड, क्यूबा, माली, नाइजर, कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सूडान और यमन के लिए निर्धारित की गई है। ये वे क्षेत्र हैं जहाँ सशस्त्र संघर्ष, जलवायु आपदा और खाद्य असुरक्षा मिलकर मानवीय स्थिति को अत्यंत जटिल बना रहे हैं।
विकलांग व्यक्तियों के लिए अलग से प्रावधान
कुल आवंटन में से $10 मिलियन की राशि विशेष रूप से इन 12 आपातकालीन स्थितियों में विकलांग व्यक्तियों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग से आरक्षित की गई है। ओसीएचए ने स्पष्ट किया कि इस कदम का उद्देश्य मानवीय सहायता को अधिक समावेशी और सुलभ बनाना है — एक ऐसा पहलू जो अक्सर आपातकालीन प्रतिक्रिया में नज़रअंदाज़ हो जाता है।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारी की चेतावनी
मानवीय मामलों और आपातकालीन राहत समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र के अवर-महासचिव टॉम फ्लेचर ने कहा, 'आज की नई फंडिंग हमें उन लोगों तक मदद पहुँचाने में सहायता करेगी जो अन्यथा पीछे छूट सकते थे। लेकिन सिर्फ पैसे से काम नहीं चलेगा — नेताओं को पहुँच बनाने, रुकावटें दूर करने और उन लोगों तक मदद पहुँचाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी, जिनकी जान खतरे में है।' यह बयान इस बात का संकेत है कि धनराशि की उपलब्धता के बावजूद ज़मीनी पहुँच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कूटनीतिक हस्तक्षेप की अपील
ओसीएचए ने बताया कि अफगानिस्तान, फिलिस्तीन के कब्जे वाले इलाके, दक्षिण सूडान, सूडान और यमन उन 10 मानवीय संकट-क्षेत्रों में शामिल हैं जहाँ फ्लेचर ने तत्काल कूटनीतिक कदम उठाने की अपील की है। उनका लक्ष्य इन क्षेत्रों में 1.1 करोड़ लोगों तक राहत सुनिश्चित करना है — जो कुल लक्षित 8.7 करोड़ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मानवीय वित्तपोषण में व्यापक कमी की रिपोर्टें सामने आ रही हैं। आने वाले हफ्तों में इन देशों में राहत एजेंसियों की पहुँच और वितरण तंत्र की कार्यकुशलता यह तय करेगी कि यह आवंटन कितना प्रभावी साबित होता है।