यमन में 21,000 परिवार बेघर, 125 नागरिक हताहत; संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा की अपील की
सारांश
मुख्य बातें
यमन में जारी सशस्त्र संघर्ष के कारण 1 अगस्त 2026 से अब तक करीब 21,000 परिवार विस्थापित हो चुके हैं और 125 आम नागरिक हताहत हुए हैं — यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने 22 सितंबर 2026 को दी। खाद्य सामग्री, आश्रय और चिकित्सा आपूर्ति की भारी कमी के बीच संयुक्त राष्ट्र ने संघर्षरत सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मानवीय सहायता पहुँचने देने की तत्काल अपील की है।
विस्थापन की भयावह तस्वीर
OCHA के अनुसार, 1 अगस्त से अब तक बेघर हुए अधिकांश परिवार ताइज और लहज प्रांतों से हैं। पंजीकरण कार्य अभी भी जारी है, इसलिए वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है। बेघर हुए लोगों को तत्काल खाद्य सामग्री, आश्रय और बुनियादी सुविधाओं की दरकार है, जबकि राहत संगठनों के पास उपलब्ध संसाधन तेज़ी से घट रहे हैं।
OCHA ने बताया कि अब तक करीब 13,000 बेघर परिवारों को आपातकालीन राहत किट और अन्य आवश्यक सहायता पहुँचाई जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अदन और मारिब के 4 अस्पतालों में शल्य चिकित्सा सामग्री और एंटीबायोटिक दवाएँ उपलब्ध कराई हैं।
नागरिक हताहत और स्वास्थ्य संकट
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने 1 अगस्त से 36 घटनाओं में 125 नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की है — जिनमें 32 लोगों की मौत और 93 लोग घायल हुए। इस महीने हताहत हुए लोगों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएँ और बच्चे हैं। अधिकारियों के अनुसार, असल संख्या इससे काफी अधिक होने की आशंका है।
शुक्रवार को लहज प्रांत में एम्बुलेंस पर हुए हमलों में एक ड्राइवर और एक आपातकालीन चिकित्सा कर्मचारी की जान चली गई। ताइज, लहज और अल-होदेदाह में 9 स्वास्थ्य केंद्र या तो क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, बंद हो गए हैं, या हमलों का सीधा निशाना बने हैं। घायलों का उपचार कर रहे अस्पतालों में रक्त, एनेस्थीसिया और शल्य चिकित्सा उपकरणों की गंभीर कमी हो गई है।
महिलाओं और नवजात शिशुओं पर खतरा
OCHA ने रेखांकित किया कि यमन में महिलाएँ और लड़कियाँ पहले से ही गंभीर जोखिम में हैं। यमन में गर्भावस्था या प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण प्रतिदिन तीन महिलाओं की मौत होती है — और हालिया संघर्ष ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुमान के अनुसार, विस्थापित लोगों में 2,700 से अधिक गर्भवती महिलाएँ हैं। इनमें से करीब 300 महिलाओं की अगले दो हफ्तों में प्रसव होने की संभावना है, जबकि कम से कम 500 महिलाओं को आपातकालीन प्रसूति या नवजात शिशु चिकित्सा की ज़रूरत है। गंभीर बात यह है कि ताइज में प्रसव से जुड़ी कई अहम आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ बंद हो चुकी हैं, जिसके कारण कुछ विस्थापित महिलाओं को बिना प्रशिक्षित चिकित्साकर्मियों के खुले में प्रसव कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
राहत कार्यों में बाधाएँ
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता कोष पहले से ही दबाव में हैं। OCHA ने स्पष्ट किया कि फंड की कमी और कई इलाकों तक पहुँच में आ रही रुकावटें राहत कार्यों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
गौरतलब है कि यमन वर्षों से दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक बना हुआ है। OCHA ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि नागरिकों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और एम्बुलेंस को सुरक्षित रखा जाए और मानवीय सहायता बिना किसी बाधा के पहुँचने दी जाए।
संयुक्त राष्ट्र की अपील
संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अनुरोध किया है कि यमन में बढ़ती मानवीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल वित्तीय सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। यदि संघर्ष और विस्थापन इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले हफ्तों में स्थिति और अधिक गंभीर होने की आशंका है।